तुलसी का पौधा उपहार मे कभी न ले ।
● ताँबे और लोहे का छल्ला एक साथ न पहने ।
● घर के सभी लोग एक साथ बाहर न निकले ।● घर खाली हाथ वापस न आये ।
● पूजा का दीपक रोजाना दो लौग डालकर ही जलाये ।
● पूजा के बाद घंटा + शंख अवश्य बजाए ।
● नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने, वास्तु दोष के प्रभाव को कम करने और आर्थिक उन्नति हेतु, एक नन्हा सा तुलसी का पौधा अपने हाथो से लगाये ।
● पक्षीयो के पीने के लिए जल की व्यवस्था करे
● घर के सभी Mirror हमेशा ढककर रखे ।
● बाथरूम का दरवाजा हमेशा बंद रखे ।
● सोते समय मस्तक दक्षिण या पूर्व की दिशा मे रखे ।
● घर की गृहणी स्नानादि के बाद ही रसोई मे प्रवेश करे ।
● गृहणी सुबह-सुबह उठकर मुख्य द्वारपर जल का छिड़काव करे ।
● भोजन हमेशा पूर्व दिशा की ओर बैठकर ही करे ।
● झाडू हमेंशा दरवाजे के पीछे दक्षिण -पश्चिम की दिशा मे रखे ।
● घर मे टूटी-फूटी चीजै यह किसी भी तरह के कबाड़ को न रखे ।
● शुक्रवार को खीर जरूर खाये ।
Friday, April 6, 2018
वास्तु टिप्स
Sunday, April 1, 2018
दालचीनी की फायदे
💃 *दालचीनी* 💃
*दूध तो हम में से कई लोग पीते है फिर भी लोगो को शिकायत रहती है कि उन्हें दूध पचता नही है और ना ही शरीर को लगता है।*
*आज हम आपको एक ऐसी चीज बतायेंगे जिसे दूध में डालकर पीने से आपका शरीर फौलाद की तरह बन जायेगा। आप बीमारियों से कोसों दूर हो जाएंगे और एक स्वस्थ-निरोगी काया पाएंगे।*
ये चीज है *दालचीनी* जिसे हम दैनिक जीवन मे बहुतायत से उपयोग करते है पर इसके कई फायदों से अनजान हैं। दालचीनी को इसके अनोखे गुणों के कारण वंडर स्पाइस भी कहते है। दालचीनी को दूध के साथ मिलाकर पीने से इसके लाभ कई गुना बढ़ जाते है, ये ना केवल आपके शरीर को मजबूत करती है बल्कि सुंदरता भी बढ़ाती है।
दालचीनी वाला दूध बनाने के लिए आपको एक ग्लास गर्म दूध में आधा चम्मच दालचीनी अच्छी तरह मिला देना है और इसका गर्म ही सेवन करना है। इस दूध को पीने से आपको कई फायदे होंगे जैसे-
◆आपका ब्लड सुगर लेवल रेगुलेट रहेगा यानि डाइबिटिज के मरीजो के लिए दालचीनी वाला दूध बहुत बहुत फायदेमंद है।
◆ये स्किन और बालों से सम्बंधित हर समस्या को दूर करता है। इसमें एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते है जो बालों और स्किन से जुड़ी रोगाणुओं को नष्ट कर देते हैं।
◆दालचीनी वाले दूध का सेवन करने से गठिया और हड्डियों से जुड़ी समस्याएं होती ही नही हैं। और जिन लोगो को अर्थराइटिस से सम्बंधित समस्या है उन्हें इससे आराम मिलेगा।
◆पढ़ाई करने वाले छात्रों को दालचीनी वाला दूध देने से उनकी एकाग्रता और मेमोरी पावर बढ़ता है।
◆यदि आपको नींद ना आने की समस्या है तो रोज रात को ये दूध पीने से आपकी ये समस्या धीरे धीरे चली जायेगी।
◆यदि आप वजन कम करने के लिए परेशान हो रहे है तो रोज रात को दालचीनी वाला दूध पीने से आप महीने में 3 से 4 किलो वजन घटा सकते है।
◆दालचीनी वाले दूध का सेवन करने से आपको जीवन मे कभी भी दिल की बीमारी या हार्ट स्ट्रोक का सामना नही करना पड़ेगा।
यह मैसेज अगर आपको अच्छा लगे या समझ में आये कि यह किसी के लिया रामबाण की तरह काम आएगा तो आप से 🙏निवेदन है कि इस मैसेज को अपने *परिचित /मित्र/ या आपके व्हाट्स एप्प ग्रुप फ्रेंड्स* तक भेज दे ।
आपका यह कदम *स्वस्थ भारत के निर्माण* मैं योगदान के रूप में होगा
दुआ मैं बड़ी ताकत होती है।
Thursday, March 29, 2018
बच्चो के विकास के लिये
*बच्चों के विकास के लिए*
*बॉर्न्विटा हॉर्लिक्स वगैरह बच्चों के इम्यून सिस्टम को बिगाड़ देते हैं, इन्हें कभी प्रयोग नही करना चाहिए।*
मखाना 50 ग्राम
छुहारा 50 ग्राम
किश्मिस् 50 ग्राम
मुनक्का 50 ग्राम
अखरोट 50 ग्राम
बादाम 50 ग्राम
छोटी इलायची 10 ग्राम
सौंफ 50 ग्राम
अश्वगंधा पाउडर 50 ग्राम
मिश्री 200 ग्राम
सबको कूट पीस कर रख लें, 1 चम्मच ये पाउडर दूध में मिला कर दें,
*बुद्धि और शरीर के विकास के लिए उत्तम है।*
दस्त और पेट की समस्या
दस्त और पेट से जुड़ी ज्यादातर बीमारियां उन लोगों को होती हैं जाक बाहर खाना खाते हैं लेकिन इस बात की गारंटी नहीं ली जा सकती है कि जो लोग घर पर खाना खाते हैं उनका पेट हमेशा ठीक ही रहेगा.
पेट में इंफेक्शन होने के कई कारण हो सकते हैं. कई बार गलत खानपान की वजह से तो कई बार सफाई से नहीं रहने की वजह ये पेट से जुड़ी समस्याएं हो जाती हैं. इंफेक्शन हो जाने से बार-बार मोशन होना, कमजोरी होना, उल्टी होना और कभी-कभी बुखार होने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं.
अगर आपका पेट खराब हो गया है और आप दवाई खाने से बचना चाहते हैं या फिर दवा का आप पर असर नहीं हो रहा है तो एकबार डाक्टर के परामर्श से इन घरेलू उपायों को भी आजमाकर देखें.
1. ज्यादा से ज्यादा करें पानी पिएं
पेट खराब होने पर शरीर में पानी की कमी हो जाती है. ऐसे में कोशिश करें कि ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं. आप फलोें का जूस और सब्जियों का रस भी ले सकते हैं. बेहतर होगा अगर पानी में लवण मिला हो. आप चाहें तो नींबू पानी, नमक-चीनी का घोल या फिर नारियल पानी ले सकते हैं. गाजर का जूस भी ऐसे समय में काफी फायदेमंद होता है.
2. अदरक भी करेगा फायदा
अपसेट पेट में अदरक का इस्तेमाल काफी कारगर होता है. इसमें एंटीफंगल और एंटी-बैक्टीरियल तत्व पाए जाते हैं, जो पेट दर्द में राहत देता है. एक चम्मच अदरक पाउडर को दूध में मिलाकर पीने से आराम मिलता है.
3. दही है फायदेमंद
पेट दर्द में दही का इस्तेमाल काफी फायदेमंद रहता है. दही में मौजूद बैक्टीरिया संतुलन बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. जिससे पेट जल्दी ठीक होता है. साथ ही ये पेट को ठंडा भी रखता है.
4. केला खाना भी रहेगा सही
अगर आप बार-बार हो रहे मोशन से परेशान हो चुके हैं तो केले का इस्तेमाल आपको राहत देगा. इसमें मौजूद पेक्टिन पेट को बांधने का काम करता है. इसमें मौजूद पोटैशियम की उच्च मात्रा भी शरीर के लिए फायदेमंद होती है.
5. जीरा को अनदेखा नहीं कर सकते
अगर आपको लगातार दस्त हो रहे हों तो एक चम्मच जीरा चबा लें. अमूमन सभी घरों में मिलने वाला ये मसाला दस्त में काफी फायदेमंद है. जीरा चबाकर पानी पी लेने से दस्त बहुत जल्दी रुक जाते हैं.
मातृ दुग्ध वर्धक
माताओं के दूध बढ़ाने हेतु
मातृ-दुग्ध वर्धक :- सफ़ेद जीरा , मिश्री और सौंफ समान मात्रा में मिलाकर रख लें । एक चम्मच की मात्रा मे दिन में तीन बार दूध के साथ लेने से माँ का दूध खूब बढ़ता है ।
सहायक उपचार :- माँ को यदि खून की कमी है तो दूध कम बनेगा इसके लिए डाल से टूटा हुआ एक पका पपीता 21 दिन रोजाना खाएं ।
- अंगूर या मुनक्का (१०-१२ नग ) :- प्रसव काल में अधिक रक्त बह गया हो तो अंगूर का सेवन तेजी से खून बढाता है यदि किसी कारण अंगूर ना मिल पाए तो मुनक्के के 10-12 नग दूध में उबालकर सेवन करें ।
- गाजर का रस और भोजन में कच्चा प्याज भी दूध को बढ़ाता है ।
- स्तनों पर दो तीन बार एरंड के तेल की मालिश करते रहने से दूध बढ़ता है ।
- शतावरी का चूर्ण 1 चम्मच दूध में देने से , माताओं के दूध में वृद्धि होती है । इसके अलावा दाल का पानी , दूध और कैल्शियम देने से कब्ज नाशक , सुपाच्य आहार लेने से अधिकतर शाक-सब्जी लेने से यह समस्या दूर हो जाती है ।
- प्रतिदिन गुड और अजवाइन के काढ़े से भी दूध उतरने लगता है ।
- कभी कभी प्रसव के बाद बच्चे के दूध ना पीने से या उपरी बाधाओं के कारण भी माताओं का दूध सूख जाता है ऐसी स्थति में दवा और दुआ दोनों की आवश्यकता होती है ।
भुना जीरा आधा चम्मच तथा देशी खांड़ दो चम्मच – दोनों को पीसकर दूध के साथ सेवन करें| शीघ्र ही स्तनों में अधिक दूध उतरने लगेगा|
250 ग्राम धुले तिल को कूट-पीसकर रख लें| इसमें से दो चम्मच सुबह तथा दो चम्मच शाम को दूध के साथ लें| इससे दूध की वृद्धि अवश्य होगी|
नीम की थोड़ी-सी छाल को पानी में उबालकर एक सप्ताह तक पिएं| स्तनों में दूध की वृद्धि अवश्य होगी|
नियमित रूप से चुकन्दर खाने से माता को अधिक मात्रा में दूध उतरने लगता है|
बवासीर, फिसर और मस्सा के इलाज
*बवासीर , फिसर , मस्सा*
👆🏽 बहुत ही आम लेकिन गंभीर समस्या जो की कई लोगों को है
तो भक्तों आइये हम बताते हैं आपको इससे निजात पाने का बेहद सरल उपाय जो की आप स्वयं यानी रोगी को स्वयं ही करना होता है यदी रोगी असक्षम है तो कोई और भी कर सकता है
👉🏽 मंत्र 👇🏽
*ऊँ छाई छुई छलक छलाई आहुम आहुम क्लं क्लां क्लीं हुं फट्*
👆🏽 इस मंत्र से पानी के लोटे को सात बार मंत्र बोलें और सात बार ही पानी पर फूंक मारने से पानी अभिमंत्रित हो जाएगा फिर ऐसा करके उस पानी से ही बवासीर को धोयें
पहले दिन से ही आराम मिलेगा
आप भी करें व जिन्हें बवासीर की तकलीफ़ हो उनको बताने की कृपा करें 👈🏽 ऐसा करने से आपको तकलीफ में आराम महसूस होगा और दूसरे को बताने से उसकी दुआऐं भी मिलेंगी ।।
हमारे द्वारा अनूभूत है ।। इसी मंत्र से करीब सात सौ से आठ सौ रोगीयों को आराम दिलवा चुके है ।। तो आप भी करें आराम जरूर मिलेगा ।।
और वेसे भी बवासीर के इस मंत्र के बारे में बुजुर्गों के द्वारा कहा गया है कि यदी आप बवासीर का यह मंत्र जानते हैं और यदि किसी को बवासीर की तकलीफ़ है और आप उसे नहीं बताते हैं तो पाप के भागी बनते हैं । चाहे आपका दुश्मन ही क्यों ना हो उसे भी बताना जरुर चाहिए । अतः आप ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने की कोशिश करें और उनके आशीर्वाद प्राप्त करें व अपनी समस्या से निजात पायें ।।
जय महामांईं की भक्तों
Monday, March 12, 2018
रामायण कथा
मित्रों,,,
आज आपको एक ऐसे कथा के बारे में बताने जा रहा हूँ,,
जिसका विवरण संसार के किसी भी पुस्तक में आपको नही मिलेगा,,
और ये कथा सत प्रतिशत सत्य कथा है,,
जय श्री राम, जय श्री राम,,
कथा का आरंभ तब का है ,,
जब बाली को ब्रम्हा जी से ये वरदान प्राप्त हुआ,,
की जो भी उससे युद्ध करने उसके सामने आएगा,,
उसकी आधी ताक़त बाली के शरीर मे चली जायेगी,,
और इससे बाली हर युद्ध मे अजेय रहेगा,,
सुग्रीव, बाली दोनों ब्रम्हा के औरस ( वरदान द्वारा प्राप्त ) पुत्र हैं,,
और ब्रम्हा जी की कृपा बाली पर सदैव बनी रहती है,,
बाली को अपने बल पर बड़ा घमंड था,,
उसका घमंड तब ओर भी बढ़ गया,,
जब उसने करीब करीब तीनों लोकों पर विजय पाए हुए रावण से युद्ध किया और रावण को अपनी पूँछ से बांध कर छह महीने तक पूरी दुनिया घूमी,,
रावण जैसे योद्धा को इस प्रकार हरा कर बाली के घमंड का कोई सीमा न रहा,,
अब वो अपने आपको संसार का सबसे बड़ा योद्धा समझने लगा था,,
और यही उसकी सबसे बड़ी भूल हुई,,
अपने ताकत के मद में चूर एक दिन एक जंगल मे पेड़ पौधों को तिनके के समान उखाड़ फेंक रहा था,,
हरे भरे वृक्षों को तहस नहस कर दे रहा था,,
अमृत समान जल के सरोवरों को मिट्टी से मिला कर कीचड़ कर दे रहा था,,
एक तरह से अपने ताक़त के नशे में बाली पूरे जंगल को उजाड़ कर रख देना चाहता था,,
और बार बार अपने से युद्ध करने की चेतावनी दे रहा था- है कोई जो बाली से युद्ध करने की हिम्मत रखता हो,,
है कोई जो अपने माँ का दूध पिया हो,,
जो बाली से युद्ध करके बाली को हरा दे,,
इस तरह की गर्जना करते हुए बाली उस जंगल को तहस नहस कर रहा था,,
संयोग वश उसी जंगल के बीच मे हनुमान जी,, राम नाम का जाप करते हुए तपस्या में बैठे थे,,
बाली की इस हरकत से हनुमान जी को राम नाम का जप करने में विघ्न लगा,,
और हनुमान जी बाली के सामने जाकर बोले- हे वीरों के वीर,, हे ब्रम्ह अंश,, हे राजकुमार बाली,,
( तब बाली किष्किंधा के युवराज थे) क्यों इस शांत जंगल को अपने बल की बलि दे रहे हो,,
हरे भरे पेड़ों को उखाड़ फेंक रहे हो,
फलों से लदे वृक्षों को मसल दे रहे हो,,
अमृत समान सरोवरों को दूषित मलिन मिट्टी से मिला कर उन्हें नष्ट कर रहे हो,,
इससे तुम्हे क्या मिलेगा,,
तुम्हारे औरस पिता ब्रम्हा के वरदान स्वरूप कोई तुहे युद्ध मे नही हरा सकता,,
क्योंकि जो कोई तुमसे युद्ध करने आएगा,,
उसकी आधी शक्ति तुममे समाहित हो जाएगी,,
इसलिए हे कपि राजकुमार अपने बल के घमंड को शांत कर,,
और राम नाम का जाप कर,,
इससे तेरे मन में अपने बल का भान नही होगा,,
और राम नाम का जाप करने से ये लोक और परलोक दोनों ही सुधर जाएंगे,,
इतना सुनते ही बाली अपने बल के मद चूर हनुमान जी से बोला- ए तुच्छ वानर,, तू हमें शिक्षा दे रहा है, राजकुमार बाली को,,
जिसने विश्व के सभी योद्धाओं को धूल चटाई है,,
और जिसके एक हुंकार से बड़े से बड़ा पर्वत भी खंड खंड हो जाता है,,
जा तुच्छ वानर, जा और तू ही भक्ति कर अपने राम वाम के,,
और जिस राम की तू बात कर रहा है,
वो है कौन,
और केवल तू ही जानता है राम के बारे में,
मैंने आजतक किसी के मुँह से ये नाम नही सुना,
और तू मुझे राम नाम जपने की शिक्षा दे रहा है,,
हनुमान जी ने कहा- प्रभु श्री राम, तीनो लोकों के स्वामी है,,
उनकी महिमा अपरंपार है,
ये वो सागर है जिसकी एक बूंद भी जिसे मिले वो भवसागर को पार कर जाए,,
बाली- इतना ही महान है राम तो बुला ज़रा,,
मैं भी तो देखूं कितना बल है उसकी भुजाओं में,,
बाली को भगवान राम के विरुद्ध ऐसे कटु वचन हनुमान जो को क्रोध दिलाने के लिए पर्याप्त थे,,
हनुमान- ए बल के मद में चूर बाली,,
तू क्या प्रभु राम को युद्ध मे हराएगा,,
पहले उनके इस तुच्छ सेवक को युद्ध में हरा कर दिखा,,
बाली- तब ठीक है कल के कल नगर के बीचों बीच तेरा और मेरा युद्ध होगा,,
हनुमान जी ने बाली की बात मान ली,,
बाली ने नगर में जाकर घोषणा करवा दिया कि कल नगर के बीच हनुमान और बाली का युद्ध होगा,,
अगले दिन तय समय पर जब हनुमान जी बाली से युद्ध करने अपने घर से निकलने वाले थे,,
तभी उनके सामने ब्रम्हा जी प्रकट हुए,,
हनुमान जी ने ब्रम्हा जी को प्रणाम किया और बोले- हे जगत पिता आज मुझ जैसे एक वानर के घर आपका पधारने का कारण अवश्य ही कुछ विशेष होगा,,
ब्रम्हा जी बोले- हे अंजनीसुत, हे शिवांश, हे पवनपुत्र, हे राम भक्त हनुमान,,
मेरे पुत्र बाली को उसकी उद्दंडता के लिए क्षमा कर दो,,
और युद्ध के लिए न जाओ,
हनुमान जी ने कहा- हे प्रभु,,
बाली ने मेरे बारे में कहा होता तो मैं उसे क्षमा कर देता,,
परन्तु उसने मेरे आराध्य श्री राम के बारे में कहा है जिसे मैं सहन नही कर सकता,,
और मुझे युद्ध के लिए चुनौती दिया है,,
जिसे मुझे स्वीकार करना ही होगा,,
अन्यथा सारी विश्व मे ये बात कही जाएगी कि हनुमान कायर है जो ललकारने पर युद्ध करने इसलिए नही जाता है क्योंकि एक बलवान योद्धा उसे ललकार रहा है,,
तब कुछ सोंच कर ब्रम्हा जी ने कहा- ठीक है हनुमान जी,,
पर आप अपने साथ अपनी समस्त सक्तियों को साथ न लेकर जाएं,,
केवल दसवां भाग का बल लेकर जाएं,,
बाकी बल को योग द्वारा अपने आराध्य के चरणों में रख दे,,
युद्ध से आने के उपरांत फिर से उन्हें ग्रहण कर लें,,
हनुमान जी ने ब्रम्हा जी का मान रखते हुए वैसे ही किया और बाली से युद्ध करने घर से निकले,,
उधर बाली नगर के बीच मे एक जगह को अखाड़े में बदल दिया था,,
और हनुमान जी से युद्ध करने को व्याकुल होकर बार बार हनुमान जी को ललकार रहा था,,
पूरा नगर इस अदभुत और दो महायोद्धाओं के युद्ध को देखने के लिए जमा था,,
हनुमान जी जैसे ही युद्ध स्थल पर पहुँचे,,
बाली ने हनुमान को अखाड़े में आने के लिए ललकारा,,
ललकार सुन कर जैसे ही हनुमान जी ने एक पावँ अखाड़े में रखा,,
उनकी आधी शक्ति बाली में चली गई,,
बाली में जैसे ही हनुमान जी की आधी शक्ति समाई,,
बाली के शरीर मे बदलाव आने लगे,
उसके शरीर मे ताकत का सैलाब आ गया,
बाली का शरीर बल के प्रभाव में फूलने लगा,,
उसके शरीर फट कर खून निकलने लगा,,
बाली को कुछ समझ नही आ रहा था,,
तभी ब्रम्हा जी बाली के पास प्रकट हुए और बाली को कहा- पुत्र जितना जल्दी हो सके यहां से दूर अति दूर चले जाओ,
बाली को इस समय कुछ समझ नही आ रहा रहा,,
वो सिर्फ ब्रम्हा जी की बात को सुना और सरपट दौड़ लगा दिया,,
सौ मील से ज्यादा दौड़ने के बाद बाली थक कर गिर गया,,
कुछ देर बाद जब होश आया तो अपने सामने ब्रम्हा जी को देख कर बोला- ये सब क्या है,
हनुमान से युद्ध करने से पहले मेरा शरीर का फटने की हद तक फूलना,,
फिर आपका वहां अचानक आना और ये कहना कि वहां से जितना दूर हो सके चले जाओ,
मुझे कुछ समझ नही आया,,
ब्रम्हा जी बोले-, पुत्र जब तुम्हारे सामने हनुमान जी आये, तो उनका आधा बल तममे समा गया, तब तुम्हे कैसा लगा,,
बाली- मुझे ऐसा लग जैसे मेरे शरीर में शक्ति की सागर लहरें ले रही है,,
ऐसे लगा जैसे इस समस्त संसार मे मेरे तेज़ का सामना कोई नही कर सकता,,
पर साथ ही साथ ऐसा लग रहा था जैसे मेरा शरीर अभी फट पड़ेगा,,,
ब्रम्हा जो बोले- हे बाली,
मैंने हनुमान जी को उनके बल का केवल दसवां भाग ही लेकर तुमसे युद्ध करने को कहा,,
पर तुम तो उनके दसवें भाग के आधे बल को भी नही संभाल सके,,
सोचो, यदि हनुमान जी अपने समस्त बल के साथ तुमसे युद्ध करने आते तो उनके आधे बल से तुम उसी समय फट जाते जब वो तुमसे युद्ध करने को घर से निकलते,,
इतना सुन कर बाली पसीना पसीना हो गया,,
और कुछ देर सोच कर बोला- प्रभु, यदि हनुमान जी के पास इतनी शक्तियां है तो वो इसका उपयोग कहाँ करेंगे,,
ब्रम्हा- हनुमान जी कभी भी अपने पूरे बल का प्रयोग नही कर पाएंगे,,
क्योंकि ये पूरी सृष्टि भी उनके बल के दसवें भाग को नही सह सकती,,
ये सुन कर बाली ने वही हनुमान जी को दंडवत प्रणाम किया और बोला,, जो हनुमान जी जिनके पास अथाह बल होते हुए भी शांत और रामभजन गाते रहते है और एक मैं हूँ जो उनके एक बाल के बराबर भी नही हूँ और उनको ललकार रहा था,,
मुझे क्षमा करें,,
और आत्मग्लानि से भर कर बाली ने राम भगवान का तप किया और अपने मोक्ष का मार्ग उन्ही से प्राप्त किया,,
तो बोलो,
पवनपुत्र हनुमान की जय,
जय श्री राम जय श्री राम,,
( कथा विशेष- श्री श्रीधर महाजन, सारंगढ़)
कृपया ये कथा जन जन तक पहुचाएं,
और पुण्य के भागी बने,,
जय श्री राम जय हनुमान,
🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻