Monday, December 2, 2013

पूरी जगन्नाथ के 8 अजूबे

पुरी में जगन्नाथ मंदिर के 8 अजूबे इस
प्रकार है।
1.मन्दिर के ऊपर झंडा हमेशा हवा के विपरीत दिशा में लहराते हुए।
2.पुरी में किसी भी जगह से आप मन्दिर के ऊपर लगे सुदर्शन चक्र को देखेगे तो वह आपको सामने ही लगा दिखेगा।
3.सामान्य दिन के समय हवा समुद्र से जमीन की तरफ आती है, और शाम के दौरान इसके विपरीत, लेकिन पूरी में इसका उल्टा होता है.     
4.पक्षी या विमानों मंदिर के ऊपर उड़ते हुए नहीं पायेगें।   
5.मुख्य गुंबद की छाया दिन के किसी भी समय अदृश्य है.
6.मंदिर के अंदर पकाने के लिए भोजन की मात्रा पूरे वर्ष के लिए रहती है। प्रसाद की एक भी मात्रा कभी भी यह व्यर्थ नहीं जाएगी, चाहे कुछ हजार लोगों से 20 लाख लोगों को खिला सकते हैं.
7. मंदिर में रसोई (प्रसाद)पकाने के लिए बर्तन एक दूसरे पर रखा जाता है और लकड़ी पर पकाया जाता है. इस प्रक्रिया में शीर्ष बर्तन में सामग्री पहले पकती है फिर क्रमश: नीचे की तरफ एक के बाद एक पकते जाती है।.
8. मन्दिर के सिंहद्वार में पहला कदम प्रवेश करने पर (मंदिर के अंदर से) आप सागर द्वारा निर्मित किसी भी ध्वनि नहीं सुन सकते. आप (मंदिर के बाहर से) एक ही कदम को पार करें जब आप इसे सुन सकते हैं. इसे शाम को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। साथ में यह भी जाने:-
मन्दिर का रसोई घर दुनिया का सबसे बड़ा रसोइ घर है। प्रति दिन सांयकाल मन्दिर के ऊपर लगी ध्वजा को मानव द्वारा उल्टा चढ़
कर बदला जाता है। मन्दिर का क्षेत्रफल चार लाख वर्ग फिट में है। मन्दिर की ऊंचाई 214 फिट है। विशाल रसोई घर में भगवान जगन्नाथ को चढ़ाने वाले महाप्रसाद को बनाने 500 रसोईये एवं 300 उनके सहयोगी काम करते है।

Thursday, November 28, 2013

बच्चो के पेट के कीड़े

अगर बच्चा रात को दांत किटकिटाए तो इसका कारण पेट में कीडे होना है पेट में कीड़ों के कारण बच्चे के पेट में दर्द होता है। कभी बच्चे की भूख मर जाती है तो कभी उसका पेट साफ नहीं होता। कभी-सभी सर्दी, पेट दर्द होना, बुखार और टांसिल्स की शिकायत भी हो जाती है। ये जीव अपनी संख्या में वृद्धि कर हमारे शरीर को नुकसान पहुंचाते है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के अनुसार ये परजीवी गोलकृमी,फीता कृमी,पिनकृमी आदि नामों से जाने जाते हैं। इनमें कुछ हेल्मिन्थवर्ग के जीव हैं। जो धीरे-धीरे अपनी संख्या को बढाते हैं। कुछ सूक्ष्म जीव अमीबा। जैसे होते हैं जो शरीर में सहजीवी के रूप में रहते हैं तथा शरीर में पाचन सहित मल निर्माण क़ी प्रक्रिया में भी भाग लेते है। ये गुदा के अन्दर और मलद्वार पर काटते हैं जिससे बच्चा रोता है। विशेष रूप से यह तकलीफ रात को होती है जिस कारण बच्चा सो नहीं पाता। यदि बच्चा सोते समय दांत पीसे या किटकिटाए या शक्कर या गुड़ जैसे मीठे पदार्थ बहुत अधिक खाये, नामक और गुदा खुजाए, पेट के बल सोए, उसका हाजमा खराब हो, उसके मुंह सांस से दुर्गन्ध आये तो समझना चाहिए कि ेट में थ्रेड वर्म है।
आइए जानते है इनके आसान और कारगर ईलाज:
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अजवायन का चूर्ण बनाकर आधा ग्राम लेकर समभग गुड में गोली बनाकर दिन में तीन बार खिलाने से सभी प्रकार के पेट के कीडे नष्ट होते है।
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सुबह उठते ही बच्चे दस ग्राम (और बडे २५ ग्राम) गुड खाकर दस - पन्द्रह मिनट आराम करें। इससे आंतों में चिपके सब कीडे निकलकर एक जगह जमा हो जायेंगे। फिर बच्चे आधा ग्राम (और बडे एक - दो ग्राम) अजवायन का चुर्ण बासी पानी के साथ खायें। इससे आंतों में मौजूद सब प्रकार के कीडे एकदम नष्ट होकर मल के साथ शीघ्र ही बाहर निकल जाते हैं।
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अजवायन चूर्ण आधा ग्राम में चुटकी भर काला नमक मिलाकर रात्रि के समय रोजाना गर्म जल से देने से बालकों के कीडे नष्ट होते हैं। बडे अजवायन के चुर्ण चार भाग में काला नमक एक भाग मिलाकर दो ग्राम की मात्रा से गर्म पानी के साथ लें।
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अजवायन का चूर्ण आधा ग्राम, साठ ग्राम मट्ठे या छाछ के साथ और बडो को दो ग्राम १२५ ग्राम मट्ठे के साथ देने से पेट के कीडे नष्ट होकर मल के साथ बाहर निकल जाते है।
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थायमल (अजवायन का सत) रात को खाली कैपसूल में डालकर पानी के साथ लेने से भी कृमियों से छुटकारा मिलता है। पीपलमूल के चूर्ण की लगभग 3 ग्राम मात्रा रात को सोते समय गोमूत्र के साथ लेने से भी लाभ होता है। कड़वी तुंबी के बीजों के बारीक पिसे चूर्ण की दो ग्राम मात्रा सुबह छाछ के साथ देने से भी अमाशय के कृमि नष्ट हो जाते हैं।
खजूर के पत्तों को उबालकर, काढ़ा बनाकर 24 घंटे रखकर बासी करके पीने से भी लाभ होता है। कृमि नष्ट करने के लिए वायविडंग के बारीक पिसे चूर्ण की 60 ग्राम मात्रा 250 ग्राम शहद में मिलाकर रखें इस मिश्रण की 1 या 2 चम्मच मात्रा सुबह चाट लें और फिर पानी से कुल्ले करके मुंह साफ कर लें।
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सुबह आनार का रस थोडी मात्रा में दे इससे कीडे कम होते है
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प्याज का थोडा सा रस पीलाने से कीडे ठीक हो जाते है
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बच्चे को दूध और मीठा पीलाए इससे कीडे बढते है
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कृमि चिकित्सा के लिए कृमि कुठार रस की एकएक रत्ती वजन की एकएक गोली सुबहशाम शहद के साथ तीन दिन देकर चौथे दिन एक चम्मच कैस्टर आयल (अरण्डी का तेल) दूध में मिलाकर दें। इससे लाभ होता है। भोजन के बाद बच्चों को एकएक चम्मच विडंगारिष्ट पानी में मिलाकर देने से भी लाभ होता है। वयस्कों को विडंगारिष्ट की दोदो चम्मच मात्रा का सेवन करना चाहिए।