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Thursday, November 16, 2017

अस्थमा रोग के कारण और निवारण

*अस्थमा रोग.. कारण और निवारण..*

– मिलावटी खान पान और ग़लत आदतें..
– तनाव, क्रोध या डर
– ब्लड में संक्रमण
– पालतू जानवरों से एलर्जी
– मद्यपान या मादक पदार्थों का सेवन
– खांसी, जुकाम और नज़ला
– मिर्च मसालेदार चीज़ें खाना
– फेफड़े और आंतों की कमज़ोरी
– सांस की नली में धूल जाना या ठंड लगना
– मोटापा
– अनुवांशिकता; परिवार में पहले किसी को दमा रोग हो
– दवाइयों के प्रयोग से कफ़ सूख जाना
– प्रदूषण
– महिलाओं के हार्मोंस का बदलाव

*अस्थमा रोग के लक्षण..*

– सांस लेने में अत्यधिक परेशानी
– बीमारी के चलते सूखी खांसी
– सख़्त और बदबूदार कफ़
– सांस लेते समय ज़ोर लगाने पर चेहरा लाल होना
– छाती में जकड़न महसूस होना
– ज़ोर ज़ोर सांस लेने के बाद थक जाना और पसीना आना

*अस्थमा रोग में खान-पान..*

– हल्का और जल्दी पचने वाला भोजन खाएँ
– लौकी, तरोई, टिंडे, मेथी, अदरक और लहसुन को खाने में प्रयोग करें
– मोटे पिसे आटे की बनी रोटियाँ और दलियाँ खाएँ
– मुन्नका और खजूर खाएँ
– गुनगुना पानी पिएँ

*अस्थमा रोग का घरेलू उपचार*

अस्थमा रोग में घरेलू उपचार से होने वाली तकलीफ़ों को कम किया जा सकता है। संभवत: कंट्रोल किया जा सकता है..

– दमा के ट्रीटमेंट में लहसुन का प्रयोग बहुत फ़ायदेमंद है। 30 मिली दूध में लहसुन की 5 छिली कलियाँ उबालकर रोज़ सेवन कीजिए.. चाहें तो अदरक वाली चाय में लहसुन की कलियाँ पीसकर डालें और इस चाय का सेवन करें..

– 1 चम्मच अदरक का रस, एक कप मेथी का काढ़ा और थोड़ा शहद मिलाकर मिश्रण तैयार करें। अस्थमा के उपचार में इसका सेवन लाभकारी है..

– 5 लौंग की कलियाँ आधा गिलास पानी में 5 मिनट उबालें.. फिर इसे छानकर इसमें थोड़ा शहद मिलाकर गरमागरम पिएँ। दिन में तीन बार नियमित रूप से सेवन करने से दमा कंट्रोल में आ जाता है..

– 2 चम्मच शहद में 2 चम्मच हल्दी मिलाकर चाटने से दमा रोग कम हो जाता है..

– तुरंत राहत पाने के लिए आप हॉट काफ़ी पी सकते हैं। इससे श्वसन नलिका साफ़ हो जाती है और सांस लेने में कोई परेशानी नहीं होती है..

– दमा रोग का देशी इलाज करने के लिए छांव में सूखे पीपल के पत्तों को जलाकर बचे हुए चूरे को सूती कपड़े से छान लीजिए..
इस राख को शहद के साथ मिलाकर नियमित 2 महीने तक दिन में 3 बार चाटने से काफ़ी आराम मिलेगा..

– सरसों के तेल में थोड़ी कपूर डालकर अच्छे से गरम कर लें और थोड़ा ठंडा होने के बाद छाती और कमर पर मालिश करें.. रोज़ इसकी मालिश से अस्थमा ठीक हो सकता है..

– तुलसी के पत्ते पानी के साथ पीसकर 2 चम्मच शहद मिलाकर खाने से दमा रोग क़ाफ़ूर हो जाता है..

– 1 गिलास दूध में 1 चम्मच हल्दी डालकर पीने से अस्थमा कंट्रोल में रहता है और एलर्जी भी नहीं होती है..

– दमा के घरेलू उपचार में इलायची बहुत लाभकारी है। बड़ी इलायची के सेवन से हिचकी और अस्थमा दोनों में आराम मिलता है..
अंगूर, बड़ी इलायची और खजूर को बराबर मात्रा में लेकर पीस लें, अब इस मिश्रण को शहद के साथ चाटने से खांसी और दमा दूर होता है..

*दमा का आयुर्वेदिक उपचार*

आयुर्वेदिक दवाओं से इलाज करने के सबसे बड़ा फ़ायदा ये है कि इनके साइड इफ़ेक्ट नहीं होते हैं, और बीमारी का जड़ से इलाज होता है..

– 2 चम्मच आंवले का पाउडर किसी कप में डालकर इसमें 1 चम्मच शहद अच्छे से मिक्स करें। हर दिन सुबह इसे खाने से अस्थमा कंट्रोल में रहता है..

– दो तिहाई हिस्सा गाजर जूस और एक तिहाई हिस्सा पालक जूस, एक गिलास जूस पिएँ..

– जौं, बथुआ, अदरक और लहसुन का सेवन अस्थमा के रोगी के लिए फायदेमंद है..

*नैचुरोपैथी से अस्थमा का इलाज*

– फलों का जूस पिएँ, इससे शरीर को पोषक तत्व मिलेंगे और टॉक्सिंस बाहर निकल जाएंगे। जूस और पानी को समान मात्रा में मिलाकर सेवन करना चाहिए..

– कफ और बलगम बनाने वाली चीज़ें खाने से बचें, जैसे चावल, शक्कर, दही और तिल..

– पेट भरकर भोजन नहीं करना चाहिए और भोजन को धीरे धीरे चबाकर खाएँ..

– खाना खाते समय पानी न पिएँ बल्कि पूरे दिन में 10 से 12 गिलास पानी पी जाएँ..

– मौसमी बदलाव के समय एलर्ट रहें..

*योग द्वारा अस्थमा का इलाज*

अस्थमा का उपचार करने के लिए नैचुरल होम रेमेडीज़ के प्रयोग के साथ अगर योग किया जाए तो आप को अच्छे रिज़ल्ट मिल सकते हैं..
योग की शुरुआत आप अनुलोम-विलोम से कर सकते हैं..
आप अगर कपाल भारती और भस्त्रिकासन करने की सोच रहे हैं, तो योगा टीचर की निगरानी में करें...!

Thursday, May 4, 2017

अस्थमा (Asthama)

अस्थमा क्या है ?  करे ये उपाय -
द्वारा :- आयुर्वेदाचार्य डॉ. अनुपम ढवले B.A.M.S. MD(AM), Reiki Grandmaster (U.S.A.), Acupressure, Su-Jok therapy practitioner and trainer    (संचालक - गोदावरी हेल्थकेअर &  होलिस्टिक हीलिंग सेण्टर ) MOb- 07385016383
जब किसी व्यक्ति की सूक्ष्म श्वास नलियों में कोई रोग उत्पन्न हो जाता है तो उस व्यक्ति को सांस लेने मे परेशानी होने लगती है जिसके कारण उसे खांसी होने लगती है। इस स्थिति को दमा रोग कहते हैं-
अस्थमा (Asthma) एक गंभीर बीमारी है, जो श्वास नलिकाओं को प्रभावित करती है। श्वास नलिकाएं फेफड़े से हवा को अंदर-बाहर करती हैं-
अस्थमा होने पर इन नलिकाओं की भीतरी दीवार में सूजन होता है। यह सूजन नलिकाओं को बेहद संवेदनशील बना देता है और किसी भी बेचैन करनेवाली चीज के स्पर्श से यह तीखी प्रतिक्रिया करता है। जब नलिकाएं प्रतिक्रिया करती हैं, तो उनमें संकुचन होता है और उस स्थिति में फेफड़े में हवा की कम मात्रा जाती है। इससे खांसी, नाक बजना, छाती का कड़ा होना, रात और सुबह में सांस लेने में तकलीफ आदि जैसे लक्षण पैदा होते हैं।
अस्थमा एक अथवा एक से अधिक पदार्थों (एलर्जेन) के प्रति शारीरिक प्रणाली की अस्वीकृति (एलर्जी) है। इसका अर्थ है कि हमारे शरीर की प्रणाली उन विशेष पदार्थों को सहन नहीं कर पाती और जिस रूप में अपनी प्रतिक्रिया या विरोध प्रकट करती है, उसे एलर्जी कहते हैं। हमारी श्वसन प्रणाली जब किन्हीं एलर्जेंस के प्रति एलर्जी प्रकट करती है तो वह अस्थमा होता है। यह साँस संबंधी रोगों में सबसे अधिक कष्टदायी है। अस्थमा के रोगी को सांस फूलने या साँस न आने के दौरे बार-बार पड़ते हैं और उन दौरों के बीच वह अकसर पूरी तरह सामान्य भी हो जाता है।
आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों में तो दमा का कोई स्थायी इलाज नहीं है लेकिन, आयुर्वेद के द्वारा इसे आसानी से पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। हर साल हमारे सेण्टर से सैकड़ों लोग कूरियर द्वारा दवाई मंगवा कर इसे पूरी तरह ठीक हो चुके है ।  इस मैसेज द्वारा हमारा उद्देश्य अस्थमा के ऐसे उपायों को आप के साथ शेयर करना है, जीने इस्तेमाल कर आप इस रोग से छुटकारा पा सके । अगर हो सके तो  इस मैसेज को १० लोगों के साथ शेयर करना है ताकि, दमे से पीड़ित व्यक्ति सामान्य जीवन व्यतीत कर सके।  फॉरवर्ड करने की कोई कसम नहीं है, बस किसी के जीवन में मुस्कराहट लाने की एक वजह है ।
आज का विषय :- अस्थमा क्या है ?  करे ये उपाय -
-दमा रोग से पीड़ित रोगी का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार करने के लिए सबसे पहले रोगी व्यक्ति को प्रतिदिन नींबू तथा शहद को पानी में मिलाकर पीना चाहिए और फिर उपवास रखना चाहिए। इसके बाद 1 सप्ताह तक फलों का रस या हरी सब्जियों का रस तथा सूप पीकर उपवास रखना चाहिए। फिर इसके बाद 2 सप्ताह तक बिना पका हुआ भोजन करना चाहिए। इसके बाद साधारण भोजन करना चाहिए।
-सबसे पहले पेट पर मिट्टी की पट्टी सुबह-शाम रखकर कब्ज के कारण आतों में सचित मल को मुलायम करे। तत्पश्चात एनिमा या वस्ति क्रिया अथवा अरंडी के तेल से ‘गणेश क्रिया’ करके कब्ज को तोड़े।
-नाक के बढ़े हुए मास या हड्डी से छुटकारा पाने के लिए तेल नेति, रबर नेति व नमक पड़े हुए गर्म पानी से जल नेति करे।
-फेफड़े में बसी ठडक निकालने के लिए छाती और पीठ पर कोई गर्म तासीर वाला तेल लगाकर ऊपर से रुई की पर्त बिछाकर रात भर या दिन भर बनियान पहने रहें।
-बायीं नासिका के छिद्र में रुई लगाकर बन्द कर लेने से दाहिनी नासिका ही चलेगी। इस स्वर चिकित्सा से दमा के रोगियों को बहुत आराम मिलता है।
-भोजन में प्रात: तुलसी, अदरक, गुलबनफसा आदि की चाय या सब्जी का सूप, दोपहर में सादी रोटी व हरी सब्जी, गर्म दाल, तीसरे पहर सूप या देशी चाय और रात्रि में सादे तरीके से बनी मिश्रित हरी सब्जिया माइक्रोवेब या कुकर से वाष्पित (स्ट्रीम्ड) सब्जियों का सेवन करे।
-दमा रोग से पीड़ित रोगी को रात के समय में जल्दी ही भोजन करके सो जाना चाहिए तथा रात को सोने से पहले गर्म पानी को पीकर सोना चाहिए तथा अजवायन के पानी की भाप लेनी चाहिए। इससे रोगी को बहुत अधिक लाभ मिलता है।
-दमा रोग से पीड़ित रोगी को अपनी छाती पर तथा अपनी रीढ़ की हड्डी पर सरसों के तेल में कपूर डालकर मालिश -करनी चाहिए तथा इसके बाद भापस्नान करना चाहिए। ऐसा प्रतिदिन करने से रोगी का रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
-दमा रोग को ठीक करने के लिए प्राकृतिक चिकित्सा के अनुसार कई प्रकार के आसन भी है जिनको करने से दमा रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है। ये आसन इस प्रकार हैं- योगमुद्रासन, मकरासन, शलभासन, अश्वस्थासन, ताड़ासन, उत्तान कूर्मासन, नाड़ीशोधन, कपालभाति, बिना कुम्भक के प्राणायाम, उड्डीयान बंध, महामुद्रा, श्वास-प्रश्वास, गोमुखासन, मत्स्यासन, उत्तामन्डूकासन, धनुरासन तथा भुजांगासन आदि।
-कंबल या दरी बिछाकर घुटनों के बल लेट जाएं और अपने दाहिने पांव को घुटने से मोड़कर नितंब के नीचे लगा दें। अब बाएं पांव को भी घुटने से मोड़कर, बाएं भुजदण्ड पर रख लें और दोनों हाथों को गर्दन के पीछे ले जाकर परस्पर मिला लें। इस आसन की यही पूर्ण स्थिति है।इस आसन से फेंफड़ों में शक्ति आती है। दमा और क्षय आदि रोगों को यह शांत करता है। साथ ही हाथ-पांवों में लचीलापन और दृढ़ता लाकर उन्हें मजबूत बनाता है। यह आसन लड़के और लड़कियों के लिए बेहद फायदेमंद है।
-दमा रोग से पीड़ित रोगी को सुबह के समय में रीढ़ की हड्डी को सीधे रखकर खुली और साफ स्वच्छ वायु में 7 से 8 बार गहरी सांस लेनी चाहिए और छोड़नी चाहिए तथा कुछ दूर सुबह के समय में टहलना चाहिए।
-दमा रोग से पीड़ित रोगी को चिंता और मानसिक रोगों से बचना चाहिए क्योंकि ये रोग दमा के दौरे को और तेज कर देते हैं।
-दमा रोग से पीड़ित रोगी को अपने पेट को साफ रखना चाहिए तथा कभी कब्ज नहीं होने देना चाहिए।
-दमा रोग से पीड़ित रोगी को धूम्रपान करने वाले व्यक्तियों के साथ नहीं रहना चाहिए तथा धूम्रपान भी नहीं करना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से इस रोग का प्रकोप और अधिक बढ़ सकता है।
-दमा रोग से पीड़ित रोगी को अपने पेड़ू पर मिट्टी की पट्टी और उसके बाद गुनगुने जल का एनिमा लेना चाहिए। फिर लगभग 10 मिनट के बाद सुनहरी बोतल का सूर्यतप्त जल जो प्राकृतिक चिकित्सा से बनाया गया है उसे लगभग 25 ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन पीना चाहिए। इस प्रकार की क्रिया को प्रतिदिन नियमपूर्वक करने से दमा रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
-दमा रोग से पीड़ित रोगी को सप्ताह में 2-3 बार सुबह के समय में कुल्ला-दातुन करना चाहिए। इसके बाद लगभग डेढ़ लीटर गुनगुने पानी में 15 ग्राम सेंधानमक मिलाकर धीरे-धीरे पीकर फिर गले में उंगुली डालकर उल्टी कर देनी चाहिए। इससे रोगी को बहुत अधिक लाभ मिलता है।
-दमा रोग से पीड़ित रोगी को अपने रोग के होने के कारणों को सबसे पहले दूर करना चाहिए और इसके बाद इस रोग को बढ़ाने वाली चीजों से परहेज करना चहिए। फिर इस रोग का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार कराना चाहिए।
-इस रोग से पीड़ित रोगी को कभी घबराना नहीं चाहिए क्योंकि ऐसा करने से दौरे की तीव्रता (तेजी) बढ़ सकती है।
-दमा रोग से पीड़ित रोगी का उपचार करने के लिए सबसे पहले रोगी को कम से कम 10 मिनट तक कुर्सी पर बैठाना चाहिए क्योंकि आराम करने से फेफड़े ठंडे हो जाते हैं। इसके बाद रोगी को होंठों से थोड़ी-थोड़ी मात्रा में हवा खींचनी चाहिए और धीरे-धीरे सांस लेनी चाहिए। इस प्रकार से प्रतिदिन उपचार करने से यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है। दमा रोग से पीड़ित रोगी को गर्म बिस्तर पर सोना चाहिए।
-दमा रोग से पीड़ित रोगी को अपनी रीढ़ की हड्डी की मालिश करवानी चाहिए तथा इसके साथ-साथ कमर पर गर्म सिंकाई करवानी चाहिए। इसके बाद रोगी को अपनी छाती पर न्यूट्राल लपेट करवाना चाहिए। इस प्रकार से प्रतिदिन उपचार करने से कुछ ही दिनों में दमा रोग ठीक हो जाता है।
-शरीर शोधन में कफ के निवारण के लिए वमन (उल्टी) लाभप्रद उपाय है। श्वास के रोगी को आमाशय, आतों और फेफड़ों के शुद्धीकरण के लिए ‘अमलतास’ का विरेचन विशेष लाभप्रद है। इसके लिए 250 मि.ली. पानी में 5 से 10 ग्राम अमलतास का गूदा उबालें। चौथाई शेष रहने पर छानकर रात को सोते समय दमा पीड़ित शख्स को चाय की तरह पिला दें।हमेशा खुश रहें , खिलखिलाकर हंसें और अपनी जीवनशैली संयमित रखें।
अस्थमा की दवाई उपलब्ध :-
यदि आप अस्थमा से परेशान है तो आप हमारे सेण्टर से विशेष आयुर्वेद विधि से निर्मित दवाई अपने घर बैठे कूरियर से मंगवा सकते है
दवाई में निम्नलिखित चीजे समाविष्ट रहेगी
1) पेट में लेने हेतु 2 प्रकार की दवाई
2)  अस्थमा के लिए विशेष आयुएवेदिक विधि से तैयार काढ़ा
४) साथ ही सम्पूर्ण डाइट चार्ट
५) पथ्य पथ्य का विशेष विवरण
दवाई पूर्णतः आयुर्वेदिक तथा किसी भी आयु के लिए सुरक्षित है, दवाई लेते ही 15 दिनों में असर दिखाना शुरू हो जाता है । 6 महीने में अस्थमा पूरी तरह से समाप्त हो जायेगा ।
१ महीने के दवाई की कीमत मात्रा २१०० रूपये । दवाई मंगवाने हेतु निचे दिए गए नंबर पर संपर्क करें ।
@ आयुर्वेदाचार्य डॉ. अनुपम ढवले  +917385016383
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कृपया ध्यान दे :-  हमारा कॊइ भी ग्रुप नहीं है, अतः ग्रुप में सामिल करवाने हेतु अनावश्यक मेसेजेस न भेजे । टिप्स पाने के लिए हमारा नंबर अपने ग्रुप में ऐड करवाये, या अपने और अपने मित्रों का ग्रुप बना कर इस नंबर  +917385016383  को उसमे ऐड करे  ।
एक सामाजिक जिम्मेदारी के तहत इसे सभी लोगों तक पहुचाएं ।