अतिरज (Menorrhagia)
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इस रोग मे योनि स्राव पिरियड खत्म होने के बाद भी चलता रहता है यानि 10-15 रोज तक या महीने मे 2-3 बार पिरियड आ जाता है |
*कारण -:* इसका मुख्य कारण हार्मोन्स का unbalance होना है, कुछ अन्य कारण भी हो सकता है जैसे योनी मे इन्फेक्सन, योनी पर चोट या ट्यूमर
*एलोपैथ -:*
♦इसमे स्त्री रोग विशेषज्ञ स्त्री हार्मोन्स Progestrone कि दवा अपनी देख-रेख मे देते है या अन्य कारण मे जांच कराकर उसकी चिकित्सा करते है |
*होमेयोपैथ -:*
➖ Secal Cor 30 -- 3 खुराक रोज 3 बार
➖Hydrastis Q -- 10-10 बूँद 3 बार रोज पानी के साथ
➖Ashoka Q -- 15-15 बूँद 3 बार रोज पानी के साथ |
*☘आयुर्बेद -:*
*♓ आम की गुठली का 1 से 2 ग्राम चूर्ण 5 से 10 ग्राम शहद के साथ लेने से या एक पके केले में आधा तोला घी मिलाकर रोज सुबह-शाम खाने से रक्तप्रदर में लाभ होता है।
*♈ 10 ग्राम खैर का गोंद रात में पानी में भिगोकर सुबह मिश्री डालकर खाने से अथवा जवाकुसुम (गुड़हल) की 5 से 10 कलियों को दूध में मसलकर पिलाने से रक्तप्रदर में लाभ होता है।
*♊ अशोक की 1-2 तोला छाल को अधकूटी करके 100 ग्राम दूध एवं 100 ग्राम पानी में मिलाकर उबालें। केवल दूध रहने पर छानकर पीने से रक्तप्रदर में लाभ होता है।
* ♑गोखरू एवं शतावरी के समभाग चूर्ण में से 3 ग्राम चूर्ण को बकरी या गाय के सौ ग्राम दूध में उबालकर पीने से रक्तप्रदर में लाभ होता है।
* कच्चे केलों को धूप में सुखाकर उसका चूर्ण बना लें। इसमें से 5 ग्राम चूर्ण में 2 ग्राम गुड़ मिलाकर रक्तप्रदर की रोगिणी स्त्री को खिलाने से लाभ होगा। इस चूर्ण के साथ कच्चे गूलर का चूर्ण समान मात्रा में मिलाकर प्रतिदिन प्रातः-सायं 1-1 तोला सेवन करने से ज्यादा लाभ होता है |
*⚠सावधानीः* उपचार के दौरान लाभ न होने तक आहार में दूध व चावल ही लें। बुखार हो तो उन दिनों उपवास करें l
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इस रोग मे योनि स्राव पिरियड खत्म होने के बाद भी चलता रहता है यानि 10-15 रोज तक या महीने मे 2-3 बार पिरियड आ जाता है |
*कारण -:* इसका मुख्य कारण हार्मोन्स का unbalance होना है, कुछ अन्य कारण भी हो सकता है जैसे योनी मे इन्फेक्सन, योनी पर चोट या ट्यूमर
*एलोपैथ -:*
♦इसमे स्त्री रोग विशेषज्ञ स्त्री हार्मोन्स Progestrone कि दवा अपनी देख-रेख मे देते है या अन्य कारण मे जांच कराकर उसकी चिकित्सा करते है |
*होमेयोपैथ -:*
➖ Secal Cor 30 -- 3 खुराक रोज 3 बार
➖Hydrastis Q -- 10-10 बूँद 3 बार रोज पानी के साथ
➖Ashoka Q -- 15-15 बूँद 3 बार रोज पानी के साथ |
*☘आयुर्बेद -:*
*♓ आम की गुठली का 1 से 2 ग्राम चूर्ण 5 से 10 ग्राम शहद के साथ लेने से या एक पके केले में आधा तोला घी मिलाकर रोज सुबह-शाम खाने से रक्तप्रदर में लाभ होता है।
*♈ 10 ग्राम खैर का गोंद रात में पानी में भिगोकर सुबह मिश्री डालकर खाने से अथवा जवाकुसुम (गुड़हल) की 5 से 10 कलियों को दूध में मसलकर पिलाने से रक्तप्रदर में लाभ होता है।
*♊ अशोक की 1-2 तोला छाल को अधकूटी करके 100 ग्राम दूध एवं 100 ग्राम पानी में मिलाकर उबालें। केवल दूध रहने पर छानकर पीने से रक्तप्रदर में लाभ होता है।
* ♑गोखरू एवं शतावरी के समभाग चूर्ण में से 3 ग्राम चूर्ण को बकरी या गाय के सौ ग्राम दूध में उबालकर पीने से रक्तप्रदर में लाभ होता है।
* कच्चे केलों को धूप में सुखाकर उसका चूर्ण बना लें। इसमें से 5 ग्राम चूर्ण में 2 ग्राम गुड़ मिलाकर रक्तप्रदर की रोगिणी स्त्री को खिलाने से लाभ होगा। इस चूर्ण के साथ कच्चे गूलर का चूर्ण समान मात्रा में मिलाकर प्रतिदिन प्रातः-सायं 1-1 तोला सेवन करने से ज्यादा लाभ होता है |
*⚠सावधानीः* उपचार के दौरान लाभ न होने तक आहार में दूध व चावल ही लें। बुखार हो तो उन दिनों उपवास करें l