Wednesday, May 31, 2017

पुनर्नवा मूल

*पुनर्नवा मूल(Punarnava Tablet)*
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*1⃣ पुनर्नवा सुजन को नष्ट करती है यह ह्रदय रोग व किडनी के विकारों में (पथरी,किडनी फेल्युअर, किडनी की सुजन आदि) में विशेष लाभदायी है ।*
*पुनर्नवा सुजन को नष्ट करती है यह ह्रदय रोग व किडनी के विकारों में (पथरी,किडनी फेल्युअर, किडनी की सुजन आदि) में विशेष लाभदायी है*
*प्रोस्टेट ग्रंथि में वृद्धि होने पर पुनर्नवा की जड़ के चूर्ण का सेवन करें*
*संधिवात में पुनर्नवा के पत्तों की भाजी सोंठ डालकर खायें.*
*पैर की एड़ी में वेदना होती हो तो पुनर्नवा में सिद्ध किया हुआ तेल पैर की एड़ी पर लगाए एवं सेंक करें।*
*मोटापा दूर करने के लिए पुनर्नवा के 5 ग्राम चूर्ण में 10 ग्राम शहद मिलाकर सुबह-शाम लें। पुनर्नवा की सब्जी बना कर खायें।*
*पेट के रोगः गोमूत्र एवं पुनर्नवा का रस समान मात्रा में मिलाकर पियें।1. पुनर्नवा सुजन को नष्ट करती है यह ह्रदय रोग व किडनी के विकारों में (पथरी,किडनी फेल्युअर, किडनी की सुजन आदि) में विशेष लाभदायी है.*
*2⃣ प्रोस्टेट ग्रंथि में वृद्धि होने पर पुनर्नवा की जड़ के चूर्ण का सेवन करेंसंधिवात में पुनर्नवा के पत्तों की भाजी सोंठ डालकर खायें।*
 *3⃣ पैर की एड़ी में वेदना होती हो तो पुनर्नवा में सिद्ध किया हुआ तेल पैर की एड़ी पर लगाए एवं सेंक करें।*
*4⃣ मोटापा दूर करने के लिए पुनर्नवा के 5 ग्राम चूर्ण में 10 ग्राम शहद मिलाकर सुबह-शाम लें।*
 *5⃣ पुनर्नवा की सब्जी बना कर खायें।पेट के रोगः गोमूत्र एवं पुनर्नवा का रस समान मात्रा में मिलाकर पियें।*
*6⃣ पुनर्नवा लीवर का कार्य सुधारकर रक्त की वृद्धि करती है ।*
*मात्रः 2-2 गोली सुबह - शाम गुनगुने पानी अथवा अदरक के रस और गुड़ के साथ ।*
 *(डायबिटीजवाले गुनगुने पानी के साथ लें) वैद्यकीय सलाहानुसार प्रयोग करें ।*
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Sunday, May 28, 2017

बिच्छु का काटना, कांटा लग जाना, कांच गुस जाना, मधुमक्खी काटना

बिच्छू के डंक मारने पर ये दवा लें ,कुछ ही समय पर डंक अपने आप बाहर निकल जाएगा । जरूर पढ़ें ।

मित्रो बिच्छू काटने पर बहुत दर्द होता है और जिसको बिच्छू काटता है उसके सिवा और कोई जान नही सकता कितना भयंकर कष्ट होता है। तो ऐसी परिस्थिति मे क्या करना चाहिए ? तो बिच्छू काटने पर एक दावा है होमेओपेथी की दवा है ! उसका नाम है Silicea -200 इसका लिकुइड 5 ml घर में रखे । बिच्छू काटने पर इस दावा को जीभ पर एक एक ड्रोप 10-10 मिनट अंतर पर तीन बार देना है । बिच्छू जब काटता है तो उसका जो डंक है न उसको अन्दर छोड़ देता है वो ही सबसे ज्यादा दर्द करता है । इस डंक को बाहर निकलना आसान काम नही है, डॉक्टर के पास जायेंगे वो काट करेगा चीरा लगायेगा फिर खिंच के निकालेगा उसमे उसमे ब्लीडिंग भी होगी तकलीफ भी होगी । ये मेडिसिन इतनी बेहतरीन मेडिसिन है के आप इसके तीन डोस देंगे 10-10 मिनट पर एक एक बूंद और आप देखेंगे वो डंक अपने आप निकल कर बाहर आ जायेगा। सिर्फ तीन डोस में आधे घन्टे में आप रोगी को ठीक कर सकते है। बहुत जबरदस्त मेडिसिन है ये Silicea 200. आपको जानकार हैरानी होगी ये मेडिसिन मिट्टी से बनती है,वो नदी कि मिट्टी होती है न जिसमे थोड़ी बालू रहती है उसी से ये मेडिसिन बनती है ।इस मेडिसिन को और भी बहुत सारी काम में आती है । अगर आप सिलाई मशीन में काम करती है तो कभी कभी सुई चुभ जाती है और अन्दर टूट जाती है उस समय भी आप ये मेडिसिन ले लीजिये ये सुई को भी बाहर निकाल देगा। आप इस मेडिसिन को और भी कई जगह मे प्रयोग कर सकते है जैसे कांटा लग गया हो , कांच घुस गया हो, ततैया ने काट लिया हो, मधुमखी ने काट लिया हो ये सब जो काटने वाले अन्दर जो छोड़ देते है वो सब के लिए आप इसको ले सकते है । बहुत तेज दर्द निवारक है और जो कुछ अन्दर छुटा हुआ है उसको बाहर निकलने की मेडिसिन है ।
और तो और हमारी सेना के जवानो को युद्ध बम आदि के कारण बम के छर्रे शरीर मे रह जाते है ! जिसे डाक्टर मे भाई बहुत बार निकालने के लिए माना कर देते है ! राजीव भाई ने ऐसे बहुत से जवानो को इसी दवा से ठीक किया है ! इसके बहुत ही चमत्कारिक परिणाम आते है !
बहुत सस्ता मेडिसिन है 5 ml सिर्फ 10-20 रूपए की आती है इससे आप कम से कम 50 से 100 लोगों का भला कर सकते है ।

Saturday, May 27, 2017

अगर हार्ट अटैक से बचना है तो तुरंत बंद कर दे मलेशिया से इम्पोर्ट यह तेल (Palm Oil)

भारत के तेल बाज़ार मे अब सबसे ज्यादा विदेशी तेल बिक रहा है । आप जानते है एक मलेशिया नाम का छोटा सा देश है, उस देश का एक तेल है जिसका नाम है पामोलिन तेल (Palm Oil). ये पामोलिन तेल सबसे जादा भारत के बाज़ार मे है वो भी लाखो टन । अब पामोलिन तेल का भाव भारत मे आके पड़ता है 20-22 रूपए लीटर (अब 45 रूपए लीटर) और भारत के किसान जो तेल उत्पन्न करके देता है वो है 40 रूपए लीटर (अब 85 रूपए लीटर) । अब भारत का किसान सरसों का तेल पैदा करे 40 रूपए लीटर (अब 85 रूपए लीटर), नारियेल का तेल पैदा करे 60 रुपये लीटर, तिलहन का तेल पैदा करे 90 रूपए लीटर पर पाम तेल का भाव मिलता है 20-22 रूपए लीटर तो सारे तेल बेचनेवाले उद्योगपति धड़ल्ले से लाखों लाखों टन पाम तेल इम्पोर्ट कर रहें है और उस पामोलिन तेल को मिलावट करके आपको बेच रहें है । आप बाज़ार से डिब्बा बंध जितना भी तेल लाके खातें है वो सब पाम तेल है ।
आपको सुनकर हैरानी होगी के 4-5 साल पहले हमारे देश मे ऐसा कानून था के पाम तेल किसी भी दुसरे तेल मे मिलके नहीं बेचा जा सकता GATT करार और WTO के दबाव मे अब कानून ऐसा है के palm तेल किसी भी तेल मे मिलाके बेचा जा सकता है । रिफाइंड और Doubled रिफाइंड तेल के नाम से बाज़ार मे जितना भी तेल मिल रहा है वो सब पाम तेल है ।
इस पाम तेल के दो दुष्परिणाम है –
1. जो जो किसान सरसों, नारियेल, तिल पैदा कटे थे उनको नुकसान क्योंकि उनको अपने तेल का भाव नहीं मिलता।
2. जो पाम तेल खएगा उसको हार्ट अटैक जरुर होगा, क्योंकि पाम तेल मे सबसे जादा ट्रान्स फैट्स है और ट्रान्स फैट्स कभी भी शरीर मे विघटित नहीं होते, किसी भी तापमान पर विघटित नहीं होते और फैट्स जमते जमते जरुरत से जादा हो जाता है तो हृदयघात आता है और आदमी मर जाता है, ब्रेन हेमारेज होता है और आदमी को पक्षाघात होता है, हाइपर टेनशॉन आता है, बिपि होता है । तेल का बाज़ार अब पूरी तरह से विदेशियों के कब्ज़े मे चला गया है।

Wednesday, May 24, 2017

चूहे, काक्रोच, खटमल से मुक्ति

*छोटे छोटे उपाय से मुक्ति*

1. चूहों से मुक्ति चूहों को पिपरमिंट की गंध बिल्कुल पसंद नहीं होती. अगर घर में चूहे उत्पात मचा रहे हैं तो रूई के कुछ फाहों को पिपरमिंट में डाल कर उनके होने की संभावित जगह के पास रख दें. इसकी गंध से उनका दम घुटेगा और वे मर जाएंगे.
2. कॉकरोच से राहत काली-मिर्च, प्याज और लहसुन को पीसकर मिला लें और इस पेस्ट में पानी डालकर एक सॉल्यूशन तैयार कर लें. इस सॉल्यूशन को उन जगहों पर छिड़कें, जहां कॉकरोच बहुत ज्यादा हैं. इसकी तेज गंध से वे आपका घर छोड़कर भाग जाएंगे.
3. मक्खी से मुक्ति मक्खियों को दूर रखने के लिए कोशिश करें कि घर साफ और दरवाजे बंद रहें. बावजूद इसके मक्खियां घर में आ जाएं तो कॉटन बॉल को किसी तेज गंध वाले तेल में डुबोकर दरवाजे के पास रख दें. तेल की गंध से मक्खियां दूर रहती हैं और इस उपाय को आजमाएंगे तो वे आपके घर से तुरंत भाग जाएंगी.
4. खटमल मारो प्याज का रस खटमल को मारने की प्राकृतिक औषधि है. इसकी गंध से उनकी सांस बंद हो जाती है और ये तुरंत मर जाते हैं.
5. छिपकली भगाओ अंडे के खाली छिलकों को कुछ ऊंचाई पर रख दें. अंडे की गंध से छिपकली दूर भागती हैं. इनको घर से भगाने का यह एक कारगर उपाय है.
6. अगर आपको कहीं पर भी थूकने की आदत है तो यह निश्चित है कि आपको यश, सम्मान अगर मुश्किल से मिल भी जाता है तो कभी टिकेगा ही नहीं . wash basin में ही यह काम कर आया करें ! यश,मान-सम्मान में अभिवृध्दि

अतिराज (Menorrhagia), रक्तश्राव

अतिरज (Menorrhagia)
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इस रोग मे योनि स्राव पिरियड खत्म होने के बाद भी चलता रहता है यानि 10-15 रोज तक या महीने मे 2-3 बार पिरियड आ जाता है |

*कारण -:* इसका मुख्य कारण हार्मोन्स का unbalance होना है, कुछ अन्य कारण भी हो सकता है जैसे योनी मे इन्फेक्सन, योनी पर चोट या ट्यूमर

*एलोपैथ -:*
♦इसमे स्त्री रोग विशेषज्ञ स्त्री हार्मोन्स Progestrone कि दवा अपनी देख-रेख मे देते है या अन्य कारण मे जांच कराकर उसकी चिकित्सा करते है |


*होमेयोपैथ -:*
➖ Secal Cor 30 -- 3 खुराक रोज 3 बार
➖Hydrastis Q -- 10-10 बूँद 3 बार रोज पानी के साथ
➖Ashoka Q -- 15-15 बूँद 3 बार रोज पानी के साथ |


*☘आयुर्बेद -:*

*♓ आम की गुठली का 1 से 2 ग्राम चूर्ण 5 से 10 ग्राम शहद के साथ लेने से या एक पके केले में आधा तोला घी मिलाकर रोज सुबह-शाम खाने से रक्तप्रदर में लाभ होता है।

*♈ 10 ग्राम खैर का गोंद रात में पानी में भिगोकर सुबह मिश्री डालकर खाने से अथवा जवाकुसुम (गुड़हल) की 5 से 10 कलियों को दूध में मसलकर पिलाने से रक्तप्रदर में लाभ होता है।

*♊ अशोक की 1-2 तोला छाल को अधकूटी करके 100 ग्राम दूध एवं 100 ग्राम पानी में मिलाकर उबालें। केवल दूध रहने पर छानकर पीने से रक्तप्रदर में लाभ होता है।

* ♑गोखरू एवं शतावरी के समभाग चूर्ण में से 3 ग्राम चूर्ण को बकरी या गाय के सौ ग्राम दूध में उबालकर पीने से रक्तप्रदर में लाभ होता है।

* कच्चे केलों को धूप में सुखाकर उसका चूर्ण बना लें। इसमें से 5 ग्राम चूर्ण में 2 ग्राम गुड़ मिलाकर रक्तप्रदर की रोगिणी स्त्री को खिलाने से लाभ होगा। इस चूर्ण के साथ कच्चे गूलर का चूर्ण समान मात्रा में मिलाकर प्रतिदिन प्रातः-सायं 1-1 तोला सेवन करने से ज्यादा लाभ होता है |

*⚠सावधानीः* उपचार के दौरान लाभ न होने तक आहार में दूध व चावल ही लें। बुखार हो तो उन दिनों उपवास करें l

पान के फायदे (Benifit of Betel Leaf)

पान  (Betel Leaf) के पत्ते के 20 अद्भुत फायदे : 
कब्ज : पान के पत्ते चबाना कब्ज के लिए भी एक कारगर इलाज है। कब्ज की स्थिति में पान के पत्ते पर अरंडी का तेल (Castor Oil) लगाकर चबाने से कब्ज में राहत मिलती है।
खाँसी : पान के 15 पत्तो को 3 ग्लास पानी में डाल ले. इसके बाद, इसे तब तक उबाले, जब तक पानी उबल कर 1/3 ना रह जाए। इसे दिन में 3 बार पिए।
पाचन तंत्र : पान के पत्ता का वैसे माउथ फेशनर की तरह इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन इसे चबाने से हमारें लिए कापी फायदेमंद हो सकता है। जब हम इसे चबा कर खाते है तब हमारी लार ग्रंथि पर असर पड़ता है। इससे इससे सलाइव लार बनने में मदद मिलती है। जो हमारी पाचन तंत्र के लिए बहुत ही जरुरी है। अगर आपने भारी भोजन भी कर दिया है उसके बाद आप पान खा लें। इससे आपको भोजन आसानी से पच जाएगा।
ब्रोंकाइटिस : पान के 7 पत्तो को 2 कप पानी में रॉक शुगर के साथ उबाले। जब पानी एक ग्लास रह जाए तो उसे दिन में तीन बार पिए. ब्रोंकाइटिस में लाभ होगा।
शरीर की दुर्गंध : 5 पान के पत्तो को 2 कप पानी में उबाले। जब पानी एक कप रह जाए तो उस पानी को दोपहर के समय पी ले। शरीर की दुर्गंध दूर हो जाएगी।
घाव : पान के पत्ते को पीस कर जले हुए जगह पर लगाए. कुछ देर बाद इस पेस्ट को धो दे और वहा शहद लगा कर छोड़ दे। घाव जल्दी ठीक हो जाता हैं।
गैस्ट्रिक अल्सर : पान के पत्ते के रस को पीने से गैस्ट्रिक अल्सर को रोकने में काफी मदद करता है। क्योंकि इसे गैस्ट्रोप्रोटेक्टिव गतिविधि के लिए भी जाना जाता है।
नकसीर : गर्मियो के दिनों में नाक से खून आने पर पान के पत्ते को मसलकर सूँघे। इससे बहुत जल्दी आराम मिलेगा।
मुँह के छाले : मुँह में छाले हो जाने पर पान को चबाए और बाद में पानी से कुल्ला कर ले। ऐसा दिन में 2 बार करे। राहत मिलेगी। आप चाहे तो ज़्यादा कत्था लगवा कर मीठा पान खा सकते हैं।
कैंसर : पान चबाने से ओरल कैंसर से भी बचा जा सकता है बशर्ते की पान का इस्तेमाल जर्दा और तम्बाकू के बिना किया जाये। पान के पत्ते में मौजूद एब्सकोर्बिक एसिड (Abscorbic acid) और अन्य एंटीऑक्सीडेंट मुंह में बन रहे हानिकारक कैंसर फ़ैलाने वाले तत्वों को नष्ट करते हैं। इसके सेवन से मुंह की दुर्गन्ध भी जाती है।
आँखों की जलन और लाल होना : 5-6 छोटे पान के पत्तो को ले और उन्हे एक ग्लास पानी में उबाले. इस पानी से आँखो पर छींटे मारे। आँखो को काफ़ी आराम मिलेगा।
खुजली : पान के 20 पत्तो को पानी में उबाले। अच्छी तरह से उबलने के बाद इस पानी से नहा ले। खुजली की समस्या ख़त्म हो जाएगी।
मोटापा : वजन कम कर रहे लोगो के लिए पान के पत्ते चबाना बहुत ही फायदेमंद होता है। पान के सेवन शरीर का मेटाबोलिज्म आश्चर्यजनक रूप से बढता है। जिस से वजन कम करने में सहयता मिलती है। इसके सेवन से शरीर से अतिरिक्त वसा भी नष्ट होती है।
मसूड़ो से खून आना : 2 कप पानी में 4 पान के पत्ते को डाल कर उबाल ले। इस पानी से गरारे करे। मसूड़ो से खून आना बंद हो जाएगा।
पौरुष शक्ति : पान को से*क्स का सिंबल भी माना जाता है। से*क्स संबंध से पहले खाने से इस क्रिया का अधिक सुख लिया जा सकता है। इसलिए नए जोड़े को पान खिलाने की परंपरा भी काफी पुरानी है। इसलिए इसे दिया जाता है।
स्तनपान करवाने की समस्या : पान के कुछ पत्तो को ले। इन्हे धोने के बाद इन पर तेल लगा कर हल्का सा गर्म कर ले और गुनगुना होने पर इसे स्तनों (ब्रेस्ट निपल्स) के आस-पास रखे, इससे सूजन चली जाएगी और बच्चें को दूध पिलाने में आसानी होगी।
मुँह की बदबू : पान के पत्ते चबा ले या पानी में उबाल कर गरारे करे। मूह से बदबू की समस्या दूर हो जाएगी।
मुहांसे : पान के 8 पत्ते अच्छी तरह से पीस ले। इसे 2 ग्लास पानी में गाढ़ा होने तक उबाले। बाद में इसे फेसपैक की तरह इस्तेमाल करे। मुहांसे दूर हो जाएँगे।
महिलाओं में श्वेत प्रदर : पान के 11 पत्ते 2.5 लिटर पानी में उबाल ले। इस पानी से अपनी योनि को धोए। सफेद पानी आने की समस्या में आराम मिलेगा।
बालतोड़ : आयुर्वेद में पान के पत्तों का इस्तेमाल बालतोड़ के उपचार के लिए किया जाता है। बालतोड़ (Boil) हो जाने पर पान के पत्तों को हल्का गर्म कर लें और उसपर अरंडी का तेल लगाकर बालतोड़ वाले स्थान पर चिपकाएँ।

पथरी का इलाज

पथरी का केवल एक खुराक से इलाज
केवल एक दिन की खुराक वो भी केवल एक बार लेनी हे
व्यक्ती गत अनुभूत हे करीब सो लोगों की निकल चुकी हे
पॉच सात mm की तक निकल सकती हे बडी होये तो कुछ कह नही सकते
वेसे इस दवा की एक खुराक पॉच से दस ग्राम की होती हे दवा का नाम हमारे यहां का पंसारी *विष्णुकांता* के नाम से जानता हे
हम खरीद कर लाते हें व लोगों को फिरी मे देते हें
इस दवा को लेने के लिये सुबह पॉच बजे बासी मुंह लेनी होती हे पॉच सात गिलास पानी गुनगुने से लेनी होती हे
बिना मुंह धोये बिना खाये पिये रहना होता हे आठ घंटों तक
सोना नही खाना नही पीना नही कुछ ना कुछ काम करते रहें बस
यहा प्रक्रीया हे इसकी !
आठ घंटे बाद सब कुछ ले सकते हें
पेशाब के द्वारा बाहर आ जायेगी पथरी

श्वेत प्रदर (ल्यूकोरिया)

श्वेत प्रदर  (ल्यूकोरिया  )
जासु कृपा कर मिटत सब आधि,व्याधि अपार
तिह प्रभु दीन दयाल को बंदहु बारम्बार
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चूहे की मेगनी को पीसकर बराबर मिश्री मिला कर सुबह निराहार 3 माशा दुध से ले तीन दिन ले तीन दिन मे कैसी भी कितनी भी दिन का रोगी हो शर्तिया ठीक होता है.
ये अनुभूत नुक्सा है!

Friday, May 19, 2017

शुगर रोग कम और षड्यंत्र ज्यादा है

जानिए डायबिटीज का सच, ये बातें डॉक्टर आपको कभी भी नही बताएगा
आजकल शुगर के रोगी इतने ज्यादा बढ़ गए हैं कि हर गली हर मोहले और हर घर में आपको कम से कम एक रोगी तो जरुर मिल ही जाता है। लेकिन क्या आपने कभी यह सोचा है कि रोज नित नई तकनीक और दवाओं पर हो रहे रिसर्च के बावजूद शुगर रूपी यह राक्षसी रोग बढ़ता ही क्यों जा रहा है।आज का हमारा यह विशेष लेख इसी बात के ऊपर आधारित है ।आज हम इस लेख के द्वारा हमारे सभी मित्रो को डोक्टरो और बड़ी बड़ी दवा कंपनियों के षड्यंत्र के बारे में बताने जा रहे हैं ।आप से अनुरोध है कि इस पोस्ट को थोडा ध्यान से पढ़े और पढ़ने के बाद इसे शेयर करके ज्यादा से ज्यादा लोगो तक इस जानकारी को पहुचाए।Know the truth of diabetes
आइये अब हम मैन मुद्दे पर आते हैं मित्रो क्या आप जानते हैं, 1997 से पहले Fasting Diabetes की limit 140 थी।फिर दवा कंपनियों ने डॉक्टर्स के साथ मिलकर Fasting Sugar की limit 126 कर दी।इससे World Population में 14% Diabetes रोग से पीड़ित लोग बढ़ गए। उसके बाद 2003 में medical Asso. ने फिर से Fasting Sugar की limit कम करके 100 कर दी। यानि फिर से कुल जनसंख्या के करीबन 70% लोग Diabetes माने जाने लगे।डॉक्टर से पूछने पर उनका तर्क होता है कि लोगो का खान पान बदला है ये बात कुछ हद तक सच है लेकिन इतना भी नही बदला कि इतनी ज्यादा संख्या में लोग इसके मरीज हो जाएँ गावों के लोग तो आज भी लगभग वही पुरानी जीवन शैली अपनाकर जी रहें हैं फिर भी शहरों से ज्यादा गावों में शुगर के मरीज हैं
दरअसल Diabetes Ratio या limit को तय करने वाली कुछ Pharmaceutical कंपनियां थीं। जों अपना Business बढ़ाने के लिए यह सब कर रही हैं।
इतना ही नही यह मानव भक्षी कंपनियों ने सिर्फ इतना ही नहीं किया अपितु इन्होंने अपने प्रयोगशालाओं में बनने वाले उपकरणों की सेन्स्टिविटी को इतना अधिक सेट कर रखा है कि जब तक रोगी लास्ट स्टेज पर ना पहुंचे तब तक इनकी रिपोर्ट में सब कुछ नार्मल ही रहता है । क्योंकि यदि रोगी को पता चल गया कि उसे 20 % सुगर है , या 20 % हार्ट ब्लोकेज है तो वह रसोईघर में रखी औषधियों से स्वयं को ठीक हो सकता है ।लेकिन क्या आपको पता है कि
Actually Diabetes कैसे Count करनी चाहिए ?
कैसे पता चलेगा कि आप Diabetes हैं या नहीं ?
पुराने जमाने के इलाज़ के हिसाब से Diabetes Count करने का एक सरल उपाय है ।
आप की उम्र + 100 जी हाँ यही एक सच्चाई है
अगर आपकी उम्र 65 है तो आपका शुगर लेवल भोजन के बाद 165 होना चाहिए ।
अगर आपकी उम्र 75 है तो आपकी भोजन के बाद सामान्य शुगर लेवल 175 होना चाहिए ।
यह होता है उम्र के हिसाब से जैसे – जिसकी उम्र 80 वर्ष है उनकी भोजन के बाद सामान्य शुगर 180 होगी ।
उसके साथ साथ यह भी सच है कि,अगर आपका पाचन तंत्र अच्छा है।आपको कोई टेंशन नहीं है ।आप अच्छा खाना खाते हो,आप जंक फ़ूड , spicy , heavy oily food नहीं खाते ।आप प्रतिदिन योग या प्राणायाम करते हैं और आपका वजन आपकी लंबाई के अनुरूप लगभग बराबर है , तो आपको शुगर नहीं हो सकती है ।यह एक पूर्ण सत्य है। बस टेंशन न लें अच्छा खाना खाएं योग करते रहें ।

घरेलू गर्भनिरोधक उपाय

घरेलू गर्भनिरोधक उपाय आजमायें
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वैसे तो गर्भनिरोधकों के तमाम विकल्प बाजार में मौजूद हैं लेकिन अगर आप इनके केमिकल या साइड एफेक्ट से दूरी रखना चाहते हैं या फिर इन प्रचलित तरीकों में यकीन नहीं रखते हैं तो आपके लिए आयुर्वेद में कु‌छ घरेलू उपाय भी हैं यदि आप आयुर्वेद पर यकीन रखते हैं तो इन उपायों का गर्भनिरोधक(Contraceptive)के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं-
वैसे तो इनके साइड एफेक्ट नहीं है लेकिन इनका इस्तेमाल आप किसी अनुभवी आयुर्वेदिक डॉक्टर के परामर्श से करें तो प्राकृतिक और सुरक्षित तौर पर गर्भनिरोध और बेफिक्र सेक्स लाइफ आसान हो सकेगी-
घरेलू उपाय-
1- मासिक धर्म के पश्‍चात स्‍नान करने के बाद एरंड के बीज(Castor seeds) की गिरी छीलकर खाने से गर्भ नहीं ठहरता है एक गिरी निगलने पर एक वर्ष तथा दो गिरी निगलने पर दो वर्ष व तीन गिरी निगलने पर तीन वर्ष तक बच्‍चे पैदा नहीं होंगे बच्‍चे पैदा करने की इच्‍छा हो तो गिरी खाना बंद कर दें एक वर्ष बाद पुन: गर्भधारण करने की क्षमता उत्‍पन्‍न हो जाती है किसी भी हाल में एक साथ तीन से अधिक गिरी न खाएं क्युकि यह नुकसान दायक हो सकता है-
2- पीरियड के बाद लहसुन(Garlic) की दो कलियां छीलकर निगल जाएं तो गर्भ नहीं ठहरेगा-
3- पीपल, सुहागा व बायबिडंग को बराबर-बराबर लेकर पीस लें- जिस दिन पीरियड आरंभ हो उस दिन से सात दिनों तक छह ग्राम चूर्ण पानी से खाएं- एक वर्ष तक गर्म नहीं ठहरेगा-
4- तालीसपत्र व गेरू को 25 ग्राम लेकर चार दिनों तक ठंडे पानी से पीने से स्‍थाई बांझपन आ जाती है-
5- सीताफल का बीज(Pumpkin seeds) पीसकर योनी में मलने से गर्भ नहीं ठहरेगा और इससे गर्भाशय की सफाई भी हो जाती है-
6- पीरियड बंद होने के बाद एक कप तुलसी के पत्‍ते(Basil leaves)लेकर काढ़ा बनाएं और तीन दिन तक लगातार पीएं इससे गर्भ भी नहीं ठहरेगा और कोई नुकसान भी नहीं होगा-
7- हल्‍दी की गांठ(turmeric root) पीसकर उसे छान ले- छह ग्राम पाउडर पानी के साथ खाएं इसे पूरे पीरियड के दौरान खाएं तो गर्भ नहीं ठहरेगा-
8- पीरियड के पांचवें दिन करेले का रस(Bitter gourd juice) पीने से गर्भ नहीं ठहरता है-
9- संभोग के दौरान नीम के तेल(Neem oil) में रूई का फाहा भिंगोकर योनी में रखने से गर्भ ठहरने की संभावना नहीं रहती है-
10- कैस्टर यानी अरंडी के बीज को फोड़ें और इनमें मौजूद एक सफेद बीज को निकालें और सेक्स के 72 घंटे के भीतर महिलाएं इसका सेवन करें तो यह आई-पिल की तरह ही गर्भधारण रोक सकता है- महिलाएं इसका सेवन पीरियड्स के तीन दिनों तक करें तो एक महीने तक इसका प्रभाव रहेगा-
11- त‌िल के तेल में सेंधा नमक का टुकड़ा डुबोएं और सेक्स के बाद इसे महिलाएं अपने प्राइवेट पार्ट पर कम से कम दो मिनट तक रखें-इससे वीर्य गर्भाशय में पहुंचते ही नष्ट हो जाएगा- महिलाएं सेक्स के बाद प्राइवेट पार्ट को गुनगुने पानी और सेंधा नमक से भी साफ कर सकती हैं-इससे भी गर्भ नहीं ठहरेगा-
12- मासिक धर्म से शुद्ध होने पर (पांचवें दिन से) चमेली की एक कली (चमेली का फूल, जो खिला न हो) पानी के साथ रोज लगातार तीन दिन तक निगलने से एक वर्ष तक गर्भनिरोधक का काम करेगा-
13- सूखे पुदीने के पत्ते का पाउडर बनाएं और स्टोर कर लें-सेक्स के पांच मिनट के बाद एक ग्लास गुनगुने पानी के साथ एक चम्मच पाउडर का सेवन करें-महिलाओं के लिए यह नैचुरल कंट्रासेप्टिव दवा का काम करेगा-
14- गुड़हल के फूल का पेस्ट बनाएं इसमें स्टार्च मिलाएं-पीरियड्स के शुरुआती तीन दिनों तक इसका सेवन कंट्रासेप्टिव की तरह ही काम करेगा-
15- संभोग के समय प्‍याज का रस योनी में रखने पर शुक्राणु बेसर हो जाते हैं-
16- आंवला, रसनजनम और हरितकारी को समान मात्रा में लेकर इनका पाउडर बनाएं और स्टोर करें- ये औषध‌ियां क‌िसी भी आयुर्वेदिक स्टोर पर म‌िल जाएंगी- महिलाएं इनका सेवन पीरियड्स के चौथे दिन से 16वें दिन तक करें तो यह गर्भनिरोधक गोलियों की तरह ही असरदार होता है-
17- यदि आप गर्भ निरोधक प्रयोग नहीं करना चाहते या गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन नहीं करना चाहते हों तो चावल धुले पानी में चावल के पौधे की जड़ पीसकर छान लें और इसमें शहद मिलाकर पिला दें- यह हानिरहित सुरक्षित गर्भनिरोधक उपाय है
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महिला संजीवनी 
गुरुवेंद्र सिंह शाक्य
जिला -एटा , उत्तर प्रदेश
9466623519
संजीवनी परिवार 
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Tuesday, May 16, 2017

पैर छूने का भारतीय रिवाज़

हमारे पूर्वजो और प्राचीन समय के विद्वानों की सबसे बड़ी खोज यह थी की उन्होंने प्रक्रति के कई रहस्यों को आज से हजारो सालो पहले ही समझ लिया था, वो भी जब उस दौर में आजकल जैसी सुविधाएँ नहीं थी. न सिर्फ उन्होंने ने इन रहस्यों को समझा, उनके महत्त्व को पहचाना बल्कि साथ ही साथ उन्होंने इन बातों को हमारे दिनचर्या में ऐसे जोड़ा, जिस से की वो हमारे संस्कार बनते चले गए.
अपने गुरुजन बड़े बूढों और माता पिता का पैर छूना (Feet-touching) एक ऐसा ही संस्कार है. आजकल लोग इस संस्कार का महत्व नहीं समझने की वजह से इसे नहीं करते या व्यर्थ की खानापूर्ति मान लेते है.
पैर छूने के पीछे छुपा वैज्ञानिक/मानसिक कारणScientific & Psychological Reason behind touching feet :
विज्ञानं इस बात को सिद्ध कर चुका है कि हमारे शरीर के चारो तरफ एक आभामंडल (Aura) होता है. लोगों की ऊर्जा-स्तर (energy level) के अनुसार हर मनुष्य का आभा मंडल अलग ऊर्जा और अलग रंग का होता है. जैसे कुछ लोग फुर्त और कुछ आलसी होते है. यह आभा मंडल हमारे ऊर्जा, मानसिक शक्ति, इच्छा-शक्ति (will power) और विचारो के प्रकार पर निर्भर करता है. हमारे विचारो और व्यव्हार से इनमे परिवर्तन आता रहता है.जब हम किसी का पैर छूते है तो यह दिखाता है की हम अपने अहम् से परे होकर किसी की गुरुता , सम्मान और आदर की भावना से चरण स्पर्श कर रहे है. किसी के समक्ष झुकना समर्पण और विनीत भाव को को दर्शाता है. जिसका हम पैर छूते है इस क्रिया से उसपर तुरंत मनोवैज्ञानिक असर (Psychological effect)  पड़ता है, और उसके ह्रदय से प्रेम, आशीर्वाद और संवेदना, सहानुभूति की भावनाएं निकलती है जो उसकी आभामंडल (Aura) में परिवर्तन लाती है .
पैर छूने से हम उस व्यक्ति के आभामंडल से अपने आभामंडल  में इन ऊर्जाओं को ग्रहण करते है जो की हमारे मनो-मष्तिष्क पर सकारात्मक प्रभाव ( Positive effect ) डालती है और हमारे आभामंडल (Aura) को अधिक ऊर्जावान बनाती है, हमारी नकारात्मक सोच और विचारों से हमें मुक्ति दिलाती है. बड़े लोगों के दिए हुए आशीर्वाद हमारे सौभाग्य में सहायक बनती है.
सही ढंग से अच्छी भावना के साथ पैर छूना चाहिए जिस से की वह व्यक्ति आपके सम्मान और आदर को अनुभव कर सके और उसके मन में आपके प्रति प्रेम और आशीर्वाद की भावनाएं उत्पन्न हो. इसलिए हमें निःसंकोच बड़ो के पैर छूना चाहिए और उनके आशीर्वाद ( Blessings )को ग्रहण करना चाहिए.

बच्चे के पेट मे कीड़े होने पर

*✨✨ बच्चे के पेट में कीड़े होने पर✨✨*

*🅰१ केले की जड़ को सुखा कर चूर्णं बना लें। फिर २ ग्राम चूर्णं को पानी के साथ बच्चे को खिलाएं। ऐसा करने से  बच्चे के पेट में मौजूद कीड़े बाहर निकल जाएंगें।*

*💲२  बच्चे को काले जीरे (स्याह जीरा) का पाउडर शहद में मिलाकर चटाने से पेट के कीड़े मर जाते हैं।*

*♓३ सौंफ का पाउडर कपड़े से छानकर एक बटा १/४ टेबलस्पून शहद के साथ सुबह शाम चटाएं। बच्चे को आराम मिलेगा।*

*♈४ आप बच्चे को अजवायन के तीन – चार दाने के साथ बच्चे को पान खिलाएं। इससे पेट के कीड़े मरने लगते हैं।*
🅰🌿💲🌿♓🌿♈🌿♊🌿♑🌿😄🙏🏼

Monday, May 15, 2017

स्त्री स्वस्थ्य का सम्पूर्ण विश्लेषण

Ladies Health स्त्री स्वस्थ्य का सम्पूर्ण विश्लेषण

🅰स्त्री-स्वास्थ्य और आयुर्वेद का बहुत गहरा सम्बन्ध रहा है । और हो भी सकता है अगर आधुनिक नारियां इसे गंभीरता से लें । आज कल 99% नारियां बीमार नज़र आ रही हैं और इसके कारण भी बहुत रोचक है।
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💲पुराने वक्त में बुखार, हरारत, सर्दी, खांसी जैसी छोटी-छोटी बीमारियों के लिए अजवाईन का काढा दे दिया जाता था । लोग आराम से पी भी लेते थे नतीजा यहथा की लोग लम्बे समय तक शारीरिक क्षमता के अत्यधिक उपयोग के साथ जी भी लेते थे ।

♓किन्तु आज …… आज किसी महिला को आप अजवाइन फांकने को या काढा पीने को कहिये तो वह मुंह बना लेती हैं।

♈अधिकाँश को तो उलटी होने लगेगी या उबकाई आ जाएगी। वे कहती हैं कि कोई टैबलेट या गोली दे दीजिये खा लेंगे। इन्हीं गोलियों और टैबलेट ने आज की बीमार नारियों को पैदा किया है । जहाँ पहले की महिलायें संयुक्त परिवार में रहकर ढेर सारे काम घर के भी, खेती के भी बिना थके कर लेती थी । वही आज सिर्फ अपने पति और बच्चे के साथ रहने वाली महिला थोड़ा सा काम करके ही थक जाती हैं और आये दिन बीमार रहती है ।

♊तमाम शोधों से यह बात तो सामने आ ही चुकी है कि दर्द निवारक गोलियां या अंग्रेजी दवाएँ साइड इफ़ेक्ट जरूर पैदा करती है । ये इफ़ेक्ट जहाँ शरीरकी प्रतिरोधक क्षमता को कम करते हैं वहीँ पाचन तंत्र पर भी बुरा प्रभाव डालते हैं । फिर अगर पेट ही बीमार हो तो सारे शरीर को बीमार होना ही है । इसबात को स्त्रियों को समझना होगी और उन्हें फिर से अपने घर की रसोई में मौजूद आयुर्वेदिक दवाओं की तरफ लौटना होगा ।
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🌵यदि आपको बुखार हो या थकान या हरारत या हल्का सर दर्द महसूस हो तो 5 ग्राम अजवाइन सादे पानी से फांक लीजिये । अजवाइन बुखार को शरीर में रहने नहींदेती और दर्द को जड़ से ख़त्म कर देती है जबकि कोई भी दर्द निवारक गोली सिर्फ दर्द को दबाती है जो शरीर के किसी और भाग में उभर कर सामने आता है ।

🌵गर्भवती स्त्रियाँ यदि साढ़े आठ महीने बाद 3 ग्राम हल्दी दिन में एक बार पानी से फांक लें तो 100% सामान्य प्रसव होगा । किसीआपरेशन की जरूरत नहीं पड़ेगी।

🌵बच्चा पैदा होने के 5-6 दिन बाद मंगरैल का काढा जरूर 3-4 दिनों तक पिये । इससे सबसे बड़ा फायदा यहहोगा कीपेट बाहर नहीं निकलेगा,वरना 90% महिलायें यही बताती है कि बच्चा होने के बाद पेट निकलना शुरू हुआ ।
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🌵बच्चा होने के बाद शरीर की मालिश बेहद जरुरी है और हल्दी के लड्डू खाने जरुरी है जो शरीर को नव जीवन तो देते ही हैं ज्वाइंट के रोग नहीं होने देते और ब्रेस्ट कैंसर और स्किन कैंसर से बचाते है ।

🌵सभी महिलाओं को बचपन से ही पानी ज्यादा पीने की आदत डालनी चाहिए। ये पानी आपके शरीर को तमाम बीमारियों से दूर जरूर रखता है । पथरी, बवासीर, कब्ज, गैस, मोटापा, जोड़ो का दर्द, इतनी सारी बीमारियाँ ये अकेला पानी ही नहीं होने देता ।
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*🌸ल्यूकोरिया या श्वेत-प्रदर*की बीमारी शरीर को पूरीतरह खोखला कर देती है । किसी काम में मन नहीं लगता, कमर-दर्द, चेहरा निस्तेज हो जाना, हर वक्त बुखार सारहना, ये सब ल्यूकोरिया के लगातार रहने की वजह से पैदा हो जाते है । किसी भी उम्र की महिला को सफ़ेद पानी गिरने की शिकायत हो रही है तो 2 केले, दो चम्मच देशी घी और आधा चम्मच शहद में मसल कर चटनी बना ले व एक महीने तक लगातार रोज खाएं ।

*🌸चेहरे पर दाग-धब्बे, झाइया*ं हो जाएँ तो दो चम्मच मंगरैल को सिरके में पीस कर पेस्ट बनाएं और रोज रात में लगाकर सो जाएँ । 20-25दिन में चेहरा साफ़हो जायेगा । कास्मेटिक्स के ज्यादा प्रयोग से चेहरे पर झुर्रियां जल्दी आ जाती हैं और चेहरे की ताजगी खत्म हो जाती है ।
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🌸चेहरे पर कभी खीरे का रस लगाकर सो जाएँ, कभी टमाटर का रस, तो कभी हल्दी और बेसन का पेस्ट तो कभी फिटकरी के पानी से धो कर सोयें। ये ही सबसे अच्छे कास्मेटिक्स है ।

🌸बच्चे न होने के लिए खाई जाने वाली कन्ट्रासेप्टिव पिल्स
आपको बाँझ भी बना सकती है । सेक्स के प्रति रूचि भी ख़त्म कर सकती है और गर्भाशय से सम्बंधित कुछ और बीमारियाँ भी पैदा कर सकती है । जबकि सबसे अच्छी पिल्स तो आपकी रसोई में ही मौजूद है  जिस दिन पीरियड ख़त्म हो उसी दिनएक अरंडी का बीजपानी से निगल लीजिये। पूरे महीने बच्चा नहीं रुकेगा ।

🌸या एक लौंग पानी से निगल लीजिये यह भी महीने भर आपको सुरक्षित रखेगी।
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🌸कोलेस्ट्राल बढ़ रहा हो तो रोज एक चम्मच मेथी का पाउडर पानी से निगल लीजिये ( सुबह सवेरे खाली पेट)।

🌸खून साफ़ रखने, प्रतिरोधक क्षमता बढाने और स्किन को जवान रखने के लिएआप एक चम्मच हल्दी का पाउडर ( लगभग ३-४ ग्राम) पानी से सुबह सवेरे निगल लीजिये, यहगले की भी सारी बीमारियाँ दूर कर देती है- टांसिल्स, छाले, कफ, आदि ख्त्म।आवाज भी सुरीलीहो जायेगी।

🌸खुद को फिट रखने का सही तरीका ये होगा की एक महीना हल्दी का पाउडर निगलिये,
एक महीना मेथी का पाउडर, एक महीने तक सवेरे नीम की 10 पत्तियां चबा लीजिये,
एक महीना तुलसी की 10 पत्तियाँ 10 दाने काली मिर्च के साथ चबाएं ।
फिर एक महीना सुबह सवेरे 100 ग्राम गुड का शरबत पीयें। एक महीना कुछ मत लीजिये । फिर अगले महीने से यही रुटीन शुरू कीजिए, आपको आपके बाल सुन्दर, चेहरा सुन्दर, स्किन सुन्दर,शरीर में भी अजीब सी ताजगी और क्या क्या चमत्कार दिखाई देगा, ये खुद ही जान जायेंगी।
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🌸खुद को प्रकृति के नजदीक रखिये और स्वस्थ रहिये ।

🌸कभी आपको डाक्टर के पास जाने की जरुरत नहीं पड़ेगी।

शरीर पर किसी भी तरह का घाव, बहुत गंभीर चोट, गैंग्रीन (अंग का सड जाना), ओस्टोमएलइटिस (अस्थिमज्जा का प्रदाह), गीला एक्जीमा, मधुमेह का घाव, एक्सीडेन्ट का घाव की चिकित्सा

शरीर पर किसी भी तरह का घाव, बहुत गंभीर चोट, गैंग्रीन (अंग का सड जाना), ओस्टोमएलइटिस (अस्थिमज्जा का प्रदाह), गीला एक्जीमा, मधुमेह का घाव, एक्सीडेन्ट का घाव की चिकित्सा

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🅰कुछ चोट लग जाती है, और कुछ छोटे बहुत गंभीर हो जाती है। जैसे कोई डाईबेटिक पेशेंट है चोट लग गयी तो उसका सारा दुनिया जहां एक ही जगह है, क्योंकि जल्दी ठीक ही नही होता है। और उसके लिए कितना भी चेष्टा करे डाक्टर हर बार उसको सफलता नही मिलता है। और अंत में वो चोट धीरे धीरे गैंग्रीन (अंग का सड जाना) में कन्वर्ट हो जाती है।

💲ऐसी परिस्थिति में एक औषधि है जो गैंग्रीन को भी ठीक करती है और ओस्टोमएलइटिस (अस्थिमज्जा का प्रदाह) को भी ठीक करती है। गैंग्रीन माने अंग का सड जाना, जहाँ पर नए कोशिका विकसित नही होते। ना तो मांसमें और ना ही हड्डी में और सब पुराने कोशिका मरते चले जाते हैं और वो ऐसा सडता है के डाक्टर कहता है की इसको काट के ही निकालना है और कोई दूसरा उपाय नही है।।
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♓ऐसे परिस्तिथि में जहां शरीर का कोई अंग काटना पड जाता हो या पडने की संभावना हो, घाव बहुत हो गया हो उसके लिए आप एक औषधि अपने घर में तैयार कर सकते है।

*♈👉🏼औषधि :*
♊देशी गाय का मूत्र (सूती कपडे के 8 परत कपडो में छान कर), हल्दी और गेंदे का फूल। गेंदे के फूल की पीला या नारंगी पंखुरियाँ निकालना है,फिर उसमे हल्दी डालकर गाय का मूत्र डालकर उसकी चटनी बनानी है। अब चोट कितना बडा है उसकी साइज के हिसाब से गेंदे के फूल की संख्या तय होगी, माने चोट छोटा है तो एक फूल, बडा है तो दो,तीन, चार अनुमान से लेना है। इसकी चटनी बनाकर इस चटनी को लगाना है जहाँ पर भी बाहर से खुली हुई चोट है जिससे खून निकल रहा है और ठीक नही हो रहा।
🅰💲♓♈♊♑♦
♑इसको दिन में कम से कम दो बार लगाना है जैसे सुबह लगाकर उसके ऊपर रुई पट्टी बांध दीजिये ताकि उसका असर बाँडी पर रहे और शाम को जब दुबारा लगायेंगे तो पहले वाला धोना पडेगा, इसको गोमूत्र से ही धोना है डेटोल जैसो का प्रयोग मत करिए, गाय के मूत्र को डेटोल की तरह प्रयोग करे। धोने के बाद फिर से चटनी लगा दे। फिर अगले दिन सुबह कर दीजिये।
🅰💲♓♈♊♑♦
🅰यह इतना प्रभावशाली है के आप सोच नही सकते, चमत्कार जैसा लगेगा। इस औषधि को हमेशा ताजा बनाकर लगाना है। किसी का भी घाव किसी भी औषधि से ठीक नही हो रहा है तो ये लगाइए।

💲जो सोराइसिस गिला है जिसमे खून भी निकलता है, पस भी निकलता है उसको यह औषधि पूर्णरूप से ठीक कर देता है।
🅰💲♓♈♊♑♦
♓प्राय: यह एक्सीडेंट के केस में खूब प्रयोग होता है क्योंकि ये लगाते ही खून बंद हो जाता है। आपरेशन का कोई भी घाव के लिए भी यह सबसे अच्छा औषधि है।

♈ गीला एक्जीमा में यह औषधि बहुत काम करता है,

♊जले हुए घाव में भी काम करता है।

Friday, May 12, 2017

पित्ताशय का केंसर

*पित्ताशय का केंसर*

होम्यो की बर्बेरिस वलगेरिस 200 लेकर , 15 बून्द 1 गिलास पानी में डालकर पिए।
इस पानी को आधा आधा दिन में 2 बार ले।
दिन में टोटल 4 बार ये पिये।

राजीव दीक्षित जी द्वारा प्राप्त ज्ञान से।

आज ही yutube पर राजीव दीक्षित सर्च करे।

पवन गौड़।

कुत्ता काटे का इलाज

कुत्ता काटे का इलाज
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नमस्कार दोस्तों अगर किसी को कोई पागल  कुत्ता काट ले तो बहुत समस्या मे घिर जाते है क्या करे dr भी 5 इंजेक्शन लगाते है और एक की कीमत कम से कम 400 के आस पास होती है उसका इलाज अपने पास बिल्कुल फ्री है और सुलभ है
प्रयोग - एक काला झीगुर पकडे और गुड़ मे दवा कर खिला दे पूरे दिन सिवा दूध के कुछ न दे जब वो मूत्र करे तो एक कपड़े पर करे तो पायेगा कि उसे जिस कलर के कुत्ते ने काटा है वैसे ही बाल उस कपड़े पर मिलेंगे ऐसा ही फ़िर तीसरे दिन करे
है न बिल्कुल फ्री की दवा
शाकाहारी लोगों के लिये भी है एक अन्य प्रयोग
कुकरौंधा के पत्ते साफ कर पीस कर गुड़ के साथ तीन दिन दे एक खुराक मे लगभग दो चम्मच दवा ले
आजमाये और लाभ ले ये पोस्ट आगे भेजो जिससे और लोग भी लूट से बचे
वंदेमातरम
जय मातादी
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महिला संजीवनी 
गुरुवेंद्र सिंह शाक्य
जिला -एटा , उत्तर प्रदेश
9466623519
संजीवनी परिवार 
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दाद, खाज, खुजली को जड़ से मिटाएं ।

दाद, खाज, खुजली को जड़ से मिटाएं ।
दाद, खाज, खुजली एक गंभीर चर्म रोग है। यदि समय से इस पर ध्‍यान नहीं दिया गया तो यह त्‍वचा पर अपनी जड़ें जमा लेता है । खासतौर से गुप्‍तांगों के आसपास यह तेज़ी से फैलता है। जब दाद के बाद काले निशान पड़ जाते हैं तो उसे एक्ज़िमा कहते हैं।
✔दाद, खाज, खुजली के कारण
रसायनिक चीज़ों – साबुन, चूना, सोडा, डिटर्जेंट आदि का ज़्यादा प्रयोग, कब्‍ज़, रक्‍त विकार, महिलाओं में मासिक धर्म की गड़बड़ी और किसी दाद, खाज, खुजली वाले व्‍यक्ति के कपड़े पहनने से यह रोग हो सकता है।
✔लक्षण
इस रोग में त्वचा पर छोटे-छोटे लाल दाने निकल आते हैं, इनमें खुजली होती है और खुजलाने के बाद जलन होती है। बाद में ये दाग़ के रूप में फैलने लगते हैं। यदि पूरे शरीर में एक्ज़िमा हो गया है तो बुखार भी आ सकता है।
✔बचाव
 जिन्‍हें दाद, खाज, खुजली हो गई है उन्‍हें सबसे पहले चाहिए कि नहाते वक़्त साबुन, शैंपू आदि का इस्‍तेमाल बंद कर दें। यदि ज़रूरी हो तो नहाने में ग्लिसिरीन सोप का इस्‍तेमाल करें। नहाने के बाद नारियल का तेल लगाएं।
 कपड़े साफ़ करते वक्‍त अच्‍छी तरह धुल लेना चाहिए, उसमें डिटर्जेंट का थोड़ा सा भी अंश नहीं होना चाहिए। पूरी तरह सूख जाने के बाद ही पहनें।
 नमक का सेवन बंद कर दें, यदि ज़रूरी हो तो बहुत कम मात्रा में नमक लें।
पानी में नीम के पत्‍तों को उबाल कर स्‍नान करने से आराम मिलता है और एक्ज़िमा के कीटाणु नष्‍ट हो जाते हैं।
 दाद, खाज, खुजली में खट्टे, चटपटे व मीठी चीज़ों के सेवन से बचें।
✔उपचार
 अनार के पत्‍तों को पीसकर लगाने से दाद ठीक हो जाता है।
 दाद  नींबू का रस लगा दें। दिन में तीन-चार बार ऐसा करने से कुछ ही दिनों दाद चला जाता है।
 केले का गूदा मसलकर उसमें नींबू का रस मिला लें और दाद पर लगा दें, कुछ दिनों के नियमित प्रयोग से दाद समाप्‍त हो जाएगा।
 बथुआ की सब्‍ज़ी खाने व उसे उबालकर उसका रस निचोड़कर पीने से किसी भी प्रकार के चर्म रोग में लाभ मिलता है।
 गाजर को घिस लें और उसमें सेंधा नमक डालकर हल्‍का गरम कर लें, इसे दाद पर नियमित लगाने से दाद जड़ से चला जाता है।
कच्‍चे आलू का रस पीने से दाद ठीक हो जाता है।
सूखे सिंखाड़े को नींबू के रस में घिस कर लगाने से दाद, खाज, खुजली दूर हो जाती है। इसे लगाने पर पहले जलन होगी लेकिन बाद में ठंडा करता है।
 हल्‍दी का लेप लगाने से भी दाद ठीक हो जाता है। इसे दिन में तीन बार और रात को सोते समय एक बार लगाएं।
 नीम के पत्‍तों का रोज़ रस पीने से दाद ठीक हो जाएगा ।
 गुलकंद व दूध पीने से भी लाभ होता है।
 दाद, खाज, खुजली को जड़ से समाप्‍त करने के लिए नीम की पत्‍ती को दही के साथ पीसकर लगाया जाता है। यह बहुत ही कारगर औषधि है।
 गेंदे  के फूल की पत्तियों को पानी में उबालकर प्रभावित जगह पर दिन में तीन-चार बार लगाएं। गेंदे के फूल में एंटी बैक्टीरियल व एंटी वायरल तत्व होते हैं जो चर्म रोग को दूर करने में सहायक होते हैं।

चर्बी कम करने का नुक्शा

*_⚫चर्बी कम करने का नुक्शा_⚫*
*☘हरा धनिया            50 ग्राम*
*नींबू का रस         02 चमच*
*☘जीरा                  1/2 चमच*
*कढ़ी  पत्ता           02  Gms*
*☘सेंधा नमक.     01स्वादानुसार*
*पानी                  02 Glass*
_उपर बताइ गइ सभी चिजो को मिक्स करें आैर लगभग 2 ग्लास पानी मिलाकर मिक्सर मे क्रश करके रस बनाले फिर इसको छानकर सुबह खाली पेट यहं ज्युस एक साथ दो ग्लास पी लीजिए उसको पीने के बाद 30 मिनिट तक कुछ भी नही खानां है_
*शुभ प्रभात मित्रों*

स्वस्थ रहने के साधारण उपाय

Arogya
*स्वस्थ रहने के साधारण उपाय*::--
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1-- 90 प्रतिशत रोग केवल पेट से होते हैं। पेट में कब्ज नहीं रहना चाहिए। अन्यथा रोगों की कभी कमी नहीं रहेगी।
2-- कुल 13 अधारणीय वेग हैं !
3--160 रोग केवल मांसाहार से होते है !
4-- 103 रोग भोजन के बाद जल पीने से होते हैं। भोजन के 1 घंटे बाद ही जल पीना चाहिये।
5-- 80 रोग चाय पीने से होते हैं।
6-- 48 रोग ऐलुमिनियम के बर्तन या कुकर के खाने से होते हैं।
7-- शराब, कोल्डड्रिंक और चाय के सेवन से हृदय रोग होता है।
8-- अण्डा खाने से हृदयरोग, पथरी और गुर्दे खराब होते हैं।
9-- ठंडे जल (फ्रिज) और आइसक्रीम से बड़ी आंत सिकुड़ जाती है।
10-- मैगी, गुटका, शराब, सूअर का माँस, पिज्जा, बर्गर, बीड़ी, सिगरेट, पेप्सी, कोक से बड़ी आंत सड़ती है।
11-- भोजन के पश्चात् स्नान करने से पाचनशक्ति मन्द हो जाती है और शरीर कमजोर हो जाता है।
12-- बाल रंगने वाले द्रव्यों (हेयरकलर) से आँखों को हानि (अंधापन भी) होती है।
13-- दूध (चाय) के साथ नमक (नमकीन पदार्थ) खाने से चर्म रोग हो जाता है।
14-- शैम्पू, कंडीशनर और विभिन्न प्रकार के तेलों से बाल पकने, झड़ने और दोमुहें होने लगते हैं।
15-- गर्म जल से स्नान से शरीर की प्रतिरोधक शक्ति कम हो जाती है और शरीर कमजोर हो जाता है। गर्म जल सिर पर डालने से आँखें कमजोर हो जाती हैं।
16-- टाई बांधने से आँखों और मस्तिष्क को हानि पहुँचती है।
17-- खड़े होकर जल पीने से घुटनों (जोड़ों) में पीड़ा होती है।
18-- खड़े होकर मूत्र-त्याग करने से रीढ़ की हड्डी को हानि होती है।
19-- भोजन पकाने के बाद उसमें नमक डालने से रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) बढ़ता है।
20-- जोर लगाकर छींकने से कानों को क्षति पहुँचती है।
21-- मुँह से साँस लेने पर आयु कम होती है।
22-- पुस्तक पर अधिक झुकने से फेफड़े खराब हो जाते हैं और क्षय (टीबी) होने का भी डर रहता है।
23-- चैत्र माह में नीम के पत्ते खाने से रक्त शुद्ध हो जाता है, मलेरिया नहीं होता है।
24-- तुलसी के सेवन से मलेरिया नहीं होता है।
25-- मूली प्रतिदिन खाने से व्यक्ति अनेक रोगों से मुक्त रहता है।
26-- अनार आंव, संग्रहणी, पुरानी खांसी व हृदय रोगों के लिए सर्व श्रेष्ठ है।
27-- हृदय-रोगी के लिए अर्जुन की छाल, लौकी का रस, तुलसी, पुदीना, मौसमी, सेंधा नमक, गुड़, चोकर-युक्त आटा, छिलके-युक्त अनाज औषधियां हैं।
28-- भोजन के पश्चात् पान, गुड़ या सौंफ खाने से पाचन अच्छा होता है। अपच नहीं होता है।
29-- अपक्व भोजन (जो आग पर न पकाया गया हो) से शरीर स्वस्थ रहता है और आयु दीर्घ होती है।
30-- मुलहठी चूसने से कफ बाहर आता है और आवाज मधुर होती है।
31-- जल सदैव ताजा (चापाकल, कुएं आदि का) पीना चाहिये, बोतलबंद (फ्रिज) पानी बासी और अनेक रोगों के कारण होते हैं।
32-- नीबू गंदे पानी के रोग (यकृत, टाइफाइड, दस्त, पेट के रोग) तथा हैजा से बचाता है।
33-- चोकर खाने से शरीर की प्रतिरोधक शक्ति बढ़ती है। इसलिए सदैव गेहूं मोटा ही पिसवाना चाहिए।
34-- फल, मीठा और घी या तेल से बने पदार्थ खाकर तुरन्त जल नहीं पीना चाहिए।
35-- भोजन पकने के 48 मिनट के अन्दर खा लेना चाहिए। उसके पश्चात् उसकी पोशकता कम होने लगती है। 12 घण्टे के बाद पशुओं के खाने लायक भी नहीं रहता है।
36-- मिट्टी के बर्तन में भोजन पकाने से पोष्कता 100%, कांसे के बर्तन में 97%, पीतल के बर्तन में 93%, अल्युमिनियम के बर्तन और प्रेशर कुकर में 7-13% ही बचते हैं।
37-- गेहूँ का आटा 15 दिनों पुराना और चना, ज्वार, बाजरा, मक्का का आटा 7 दिनों से अधिक पुराना नहीं प्रयोग करना चाहिए।
38-- 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को मैदा (बिस्कुट, ब्रैड, समोसा आदि) कभी भी नहीं खिलाना चाहिए।
39-- खाने के लिए सेंधा नमक सर्वश्रेष्ठ होता है उसके बाद काला नमक का स्थान आता है। सफेद नमक जहर के समान होता है।
40-- जल जाने पर आलू का रस, हल्दी, शहद, घृतकुमारी में से कुछ भी लगाने पर जलन ठीक हो जाती है और फफोले नहीं पड़ते।
41-- सरसों, तिल, मूंगफली या नारियल का तेल ही खाना चाहिए। देशी घी ही खाना चाहिए है। रिफाइंड तेल और वनस्पति घी (डालडा) जहर होता है।
42-- पैर के अंगूठे के नाखूनों को सरसों तेल से भिगोने से आँखों की खुजली लाली और जलन ठीक हो जाती है।
43-- पान खाने का चूना 70 रोगों को ठीक करता है।
44-- चोट, सूजन, दर्द, घाव, फोड़ा होने पर उस पर 5-20 मिनट तक चुम्बक रखने से जल्दी ठीक होता है। हड्डी टूटने पर चुम्बक का प्रयोग करने से आधे से भी कम समय में ठीक होती है।
45-- मीठे में मिश्री, गुड़, शहद, देशी (कच्ची) चीनी का प्रयोग करना चाहिए सफेद चीनी जहर होता है।
46-- कुत्ता काटने पर हल्दी लगाना चाहिए।
47-- बर्तन सदा मिटटी के ही प्रयोग करने चाहिए।
48-- टूथपेस्ट और ब्रुश के स्थान पर दातुन और मंजन करना चाहिए दाँत मजबूत रहेंगे। (आँखों के रोग में दातुन नहीं करना)
49-- यदि सम्भव हो तो सूर्यास्त के पश्चात् न तो पढ़े और लिखने का काम तो न ही करें तो अच्छा है।
50-- निरोग रहने के लिए अच्छी नींद और अच्छा (ताजा) भोजन अत्यन्त आवश्यक है।
51-- देर रात तक जागने से शरीर की प्रतिरोधक शक्ति कमजोर हो जाती है। भोजन का पाचन भी ठीक से नहीं हो पाता है आँखों के रोग भी होते हैं।
52-- प्रातः का भोजन राजकुमार के समान, दोपहर का राजा और रात्रि का भिखारी के समान करना चाहिये ।
आशा है आप स्वयं अपने परिवार में भी इसे लागू करेंगे।
प्रिय स्वीट फॅमिली मेंबर,
अपनी दिनचर्या को बीमार होने के बाद भी तो सही बनाओगे, बेहतर हैं बीमार नहीं हो, ऐसी दिनचर्या बना ले। निश्चित लाभ मिलेगा। मैं स्वयं भी प्रयासरत हूं आप भी प्रयत्न करना शुरू करे.