Saturday, November 25, 2017

सूर्य को जल देने के लाभ

सूर्य नव ग्रहो के स्वामी हैं। ये पंचदेवों में एक हैं।
जीवन को व्यवस्था सूर्य से ही
मिलती है। पुराणों में सूर्य की उपासना को
सभी रोगों को दूर करने वाला बताया गया है।
हिंदू संस्कृति में अर्घ्य दान यानी जल देना सामने वाले
के प्रति श्रद्धा और आस्था दिखाने का प्रतीक है।
लिहाजा स्नान के बाद सूर्य को अर्घ्य देने का अर्थ है
जीवन में संतुलन को आमांत्रित करना।अघर्य देते समय
सूर्य के नामों का उच्चारण करने का विघान है।
शास्त्रों के मुताबिक प्रातःकाल पूर्व दिशा की ओर मुख
करके और शाम के वक्त पश्चिम की ओर मुख करके
सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए। मान्यता है कि सूर्य को अर्घ्य देते
समय गिरने वाले जलकण वज्र बनकर रोग रूपी राक्षसों
का विनाश करते हैं।
जल चिकित्सा और आयुर्वेद के अनुसार प्रातःकालीन
सूर्य को सिर के ऊपर पानी का बर्तन ले जाकर जल
अर्पित करना चाहिए। ऐसा करते समय अपनी दृष्टि
जलधारा के बीच में रखें ताकि जल से छनकर सूर्य
की किरणें दोनों आंखों के मध्य में पड़ें। इससे आंखों
की रौशनी और बौद्धिक क्षमता
बढ़ती है।
जल से छनकर जब सूर्य की किरणें शरीर
पर पड़ती हैं तो शरीर में ऊर्जा का संचार
होता है। इससे शरीर में रोग से लड़ने की
शक्ति बढ़ती है साथ ही आस-पास
सकारात्मक उर्जा का संचार होता है जो जीवन में आगे
बढ़ने की प्रेरणा देता है।
ज्योतिषशास्त्र में कहा जाता है कि कुण्डली में सूर्य
कमज़ोर स्थिति में होने पर उगते सूर्य को जल देना चाहिए। सूर्य के
मजबूत होने से शरीर स्वस्थ और उर्जावान रहता है।
इससे सफलता के रास्ते में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।

Thursday, November 16, 2017

अस्थमा रोग के कारण और निवारण

*अस्थमा रोग.. कारण और निवारण..*

– मिलावटी खान पान और ग़लत आदतें..
– तनाव, क्रोध या डर
– ब्लड में संक्रमण
– पालतू जानवरों से एलर्जी
– मद्यपान या मादक पदार्थों का सेवन
– खांसी, जुकाम और नज़ला
– मिर्च मसालेदार चीज़ें खाना
– फेफड़े और आंतों की कमज़ोरी
– सांस की नली में धूल जाना या ठंड लगना
– मोटापा
– अनुवांशिकता; परिवार में पहले किसी को दमा रोग हो
– दवाइयों के प्रयोग से कफ़ सूख जाना
– प्रदूषण
– महिलाओं के हार्मोंस का बदलाव

*अस्थमा रोग के लक्षण..*

– सांस लेने में अत्यधिक परेशानी
– बीमारी के चलते सूखी खांसी
– सख़्त और बदबूदार कफ़
– सांस लेते समय ज़ोर लगाने पर चेहरा लाल होना
– छाती में जकड़न महसूस होना
– ज़ोर ज़ोर सांस लेने के बाद थक जाना और पसीना आना

*अस्थमा रोग में खान-पान..*

– हल्का और जल्दी पचने वाला भोजन खाएँ
– लौकी, तरोई, टिंडे, मेथी, अदरक और लहसुन को खाने में प्रयोग करें
– मोटे पिसे आटे की बनी रोटियाँ और दलियाँ खाएँ
– मुन्नका और खजूर खाएँ
– गुनगुना पानी पिएँ

*अस्थमा रोग का घरेलू उपचार*

अस्थमा रोग में घरेलू उपचार से होने वाली तकलीफ़ों को कम किया जा सकता है। संभवत: कंट्रोल किया जा सकता है..

– दमा के ट्रीटमेंट में लहसुन का प्रयोग बहुत फ़ायदेमंद है। 30 मिली दूध में लहसुन की 5 छिली कलियाँ उबालकर रोज़ सेवन कीजिए.. चाहें तो अदरक वाली चाय में लहसुन की कलियाँ पीसकर डालें और इस चाय का सेवन करें..

– 1 चम्मच अदरक का रस, एक कप मेथी का काढ़ा और थोड़ा शहद मिलाकर मिश्रण तैयार करें। अस्थमा के उपचार में इसका सेवन लाभकारी है..

– 5 लौंग की कलियाँ आधा गिलास पानी में 5 मिनट उबालें.. फिर इसे छानकर इसमें थोड़ा शहद मिलाकर गरमागरम पिएँ। दिन में तीन बार नियमित रूप से सेवन करने से दमा कंट्रोल में आ जाता है..

– 2 चम्मच शहद में 2 चम्मच हल्दी मिलाकर चाटने से दमा रोग कम हो जाता है..

– तुरंत राहत पाने के लिए आप हॉट काफ़ी पी सकते हैं। इससे श्वसन नलिका साफ़ हो जाती है और सांस लेने में कोई परेशानी नहीं होती है..

– दमा रोग का देशी इलाज करने के लिए छांव में सूखे पीपल के पत्तों को जलाकर बचे हुए चूरे को सूती कपड़े से छान लीजिए..
इस राख को शहद के साथ मिलाकर नियमित 2 महीने तक दिन में 3 बार चाटने से काफ़ी आराम मिलेगा..

– सरसों के तेल में थोड़ी कपूर डालकर अच्छे से गरम कर लें और थोड़ा ठंडा होने के बाद छाती और कमर पर मालिश करें.. रोज़ इसकी मालिश से अस्थमा ठीक हो सकता है..

– तुलसी के पत्ते पानी के साथ पीसकर 2 चम्मच शहद मिलाकर खाने से दमा रोग क़ाफ़ूर हो जाता है..

– 1 गिलास दूध में 1 चम्मच हल्दी डालकर पीने से अस्थमा कंट्रोल में रहता है और एलर्जी भी नहीं होती है..

– दमा के घरेलू उपचार में इलायची बहुत लाभकारी है। बड़ी इलायची के सेवन से हिचकी और अस्थमा दोनों में आराम मिलता है..
अंगूर, बड़ी इलायची और खजूर को बराबर मात्रा में लेकर पीस लें, अब इस मिश्रण को शहद के साथ चाटने से खांसी और दमा दूर होता है..

*दमा का आयुर्वेदिक उपचार*

आयुर्वेदिक दवाओं से इलाज करने के सबसे बड़ा फ़ायदा ये है कि इनके साइड इफ़ेक्ट नहीं होते हैं, और बीमारी का जड़ से इलाज होता है..

– 2 चम्मच आंवले का पाउडर किसी कप में डालकर इसमें 1 चम्मच शहद अच्छे से मिक्स करें। हर दिन सुबह इसे खाने से अस्थमा कंट्रोल में रहता है..

– दो तिहाई हिस्सा गाजर जूस और एक तिहाई हिस्सा पालक जूस, एक गिलास जूस पिएँ..

– जौं, बथुआ, अदरक और लहसुन का सेवन अस्थमा के रोगी के लिए फायदेमंद है..

*नैचुरोपैथी से अस्थमा का इलाज*

– फलों का जूस पिएँ, इससे शरीर को पोषक तत्व मिलेंगे और टॉक्सिंस बाहर निकल जाएंगे। जूस और पानी को समान मात्रा में मिलाकर सेवन करना चाहिए..

– कफ और बलगम बनाने वाली चीज़ें खाने से बचें, जैसे चावल, शक्कर, दही और तिल..

– पेट भरकर भोजन नहीं करना चाहिए और भोजन को धीरे धीरे चबाकर खाएँ..

– खाना खाते समय पानी न पिएँ बल्कि पूरे दिन में 10 से 12 गिलास पानी पी जाएँ..

– मौसमी बदलाव के समय एलर्ट रहें..

*योग द्वारा अस्थमा का इलाज*

अस्थमा का उपचार करने के लिए नैचुरल होम रेमेडीज़ के प्रयोग के साथ अगर योग किया जाए तो आप को अच्छे रिज़ल्ट मिल सकते हैं..
योग की शुरुआत आप अनुलोम-विलोम से कर सकते हैं..
आप अगर कपाल भारती और भस्त्रिकासन करने की सोच रहे हैं, तो योगा टीचर की निगरानी में करें...!

हृदय की बीमारी

*हृदय की बीमारी*

*आयुर्वेदिक इलाज !!*

हमारे देश भारत मे 3000 साल पहले एक बहुत बड़े ऋषि हुये थे

उनका नाम था *महाऋषि वागवट जी !!*

उन्होने एक पुस्तक लिखी थी

जिसका नाम है *अष्टांग हृदयम!!*

*(Astang  hrudayam)*

और इस पुस्तक मे उन्होने ने
बीमारियो को ठीक करने के लिए *7000* सूत्र लिखे थे !

यह उनमे से ही एक सूत्र है !!

वागवट जी लिखते है कि कभी भी हृदय को घात हो रहा है !

मतलब दिल की नलियों मे blockage होना शुरू हो रहा है !

तो इसका मतलब है कि रकत (blood) मे acidity(अम्लता ) बढ़ी हुई है !

अम्लता आप समझते है !

जिसको अँग्रेजी मे कहते है acidity !!

*अम्लता दो तरह की होती है !*

एक होती है *पेट कि अम्लता !*

*और एक होती है रक्त (blood) की अम्लता !!*

आपके पेट मे अम्लता जब बढ़ती है !

तो आप कहेंगे पेट मे जलन सी हो रही है !!

खट्टी खट्टी डकार आ रही है !

मुंह से पानी निकाल रहा है !

और अगर ये अम्लता (acidity)और बढ़ जाये !

तो hyperacidity होगी !

और यही पेट की अम्लता बढ़ते-बढ़ते जब रक्त मे आती है तो रक्त अम्लता  (blood acidity) होती !!

और जब blood मे acidity बढ़ती है तो ये अम्लीय रक्त  (blood) दिल की नलियो मे से निकल नहीं पाता !

और नलिया मे blockage कर देता है !

तभी heart attack होता है !! इसके बिना heart attack नहीं होता !!

और ये आयुर्वेद का सबसे बढ़ा सच है जिसको कोई डाक्टर आपको बताता नहीं !

क्योंकि इसका इलाज सबसे सरल है !!

इलाज क्या है ??

वागबट जी लिखते है कि जब रक्त (blood) मे अम्लता (acidity) बढ़ गई है !

तो आप ऐसी चीजों का उपयोग करो जो क्षारीय है !

आप जानते है दो तरह की चीजे होती है !

*अम्लीय और क्षारीय !!*

*acidic and alkaline*

अब अम्ल और क्षार को मिला दो तो क्या होता है ! ?????

*acid and alkaline को मिला दो तो क्या होता है )?????*

*neutral*

होता है सब जानते है !!

तो वागबट जी लिखते है !

*कि रक्त की अम्लता बढ़ी हुई है तो क्षारीय(alkaline) चीजे खाओ !*

तो रक्त की अम्लता (acidity) neutral हो जाएगी !!!

और रक्त मे अम्लता neutral हो गई !

तो heart attack की जिंदगी मे कभी संभावना ही नहीं !!

ये है सारी कहानी !!

अब आप पूछोगे जी ऐसे कौन सी चीजे है जो क्षारीय है और हम खाये ?????

आपके रसोई घर मे ऐसी बहुत सी चीजे है जो क्षारीय है !

जिनहे आप खाये तो कभी heart attack न आए !

और अगर आ गया है !

तो दुबारा न आए !!

सबसे ज्यादा आपके घर मे क्षारीय चीज है वह है लौकी !!

जिसे दुधी भी कहते है !!

English मे इसे कहते है bottle gourd !!!

जिसे आप सब्जी के रूप मे खाते है !

इससे ज्यादा कोई क्षारीय चीज ही नहीं है !

तो आप रोज लौकी का रस निकाल-निकाल कर पियो !!

या कच्ची लौकी खायो !!
वागवतट जी कहते है रक्त  की अम्लता कम करने की सबसे  ज्यादा ताकत लौकी मे ही है !

तो आप लौकी के रस का सेवन करे !!

कितना सेवन करे ?????????

रोज 200 से 300 मिलीग्राम पियो !!

कब पिये ??

सुबह खाली पेट (toilet जाने के बाद ) पी सकते है !!

या नाश्ते के आधे घंटे के बाद पी सकते है !!

इस लौकी के रस को आप और ज्यादा क्षारीय बना सकते है !

इसमे 7 से 10 पत्ते के तुलसी के डाल लो

*तुलसी बहुत क्षारीय है !!*

इसके साथ आप पुदीने से 7 से 10 पत्ते मिला सकते है !

*पुदीना बहुत क्षारीय है !*

इसके साथ आप काला नमक या सेंधा नमक जरूर डाले !

ये भी बहुत क्षारीय है !!

लेकिन याद रखे नमक काला या सेंधा ही डाले !

वो दूसरा आयोडीन युक्त नमक कभी न डाले !!

ये आओडीन युक्त नमक अम्लीय है !!!!

तो मित्रों आप इस लौकी के जूस का सेवन जरूर करे !!

2 से 3 महीने आपकी सारी heart की blockage ठीक कर देगा !!

21 वे दिन ही आपको बहुत ज्यादा असर दिखना शुरू हो जाएगा !!!

कोई आपरेशन की आपको जरूरत नहीं पड़ेगी !!

घर मे ही हमारे भारत के आयुर्वेद से इसका इलाज हो जाएगा !!

और आपका अनमोल शरीर और लाखो रुपए आपरेशन के बच जाएँगे !!

और पैसे बच जाये ! तो किसी गौशाला मे दान कर दे !

डाक्टर को देने से अच्छा है !किसी गौशाला दान दे !!

हमारी गौ माता बचेगी तो भारत बचेगा !!

आपने पूरी पोस्ट पढ़ी आपका बहुत बहुत धन्यवाद !!

- यदि आपको लगता है कि मेने ठीक कहा है तो आप ये जानकारी सभी तक पहुचाए

*ॐ नमो भगवते वासुदेवाय*

Monday, November 6, 2017

महिलाओं के लिए सफेद पानी और लाल पानी की परेशानी से मुक्ति के लिए

महिलाओं के लिए सफेद पानी व लाल पानी की परेसानी से मुक्ती के लिए

हमने हमारे गुरुदेव का बताया नुस्खा आजमाया है कइ बार और सफलता मिली है

*अशोक वृक्ष की छाल ली करीब ढाई तीन किलो जितनी । फिर उसको कूट कर करीब पांच छः लीटर पानी में डालकर अच्छी तरह से उबाला । जब तक की पानी आधा नहीं हो गया तब तक उबाला । फिर कपड़े से छान लीया  और फिर प्रतीदिन मरीज को आधा गिलास पानी में आधा गिलास दूसरा पानी मिलाकर पीने की सलाह दी गई.
इस प्रयोग से कुछ ही दिनों में उन महिलाओं को आराम हो जाता है लाल व सफेद पानी की परेसानी से निजात मिल जाएगी

मौसमी खाँसी के लिये सेंधा नमक

*मौसमी खाँसी के लिये सेंधा नमक*
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सेंधे नमक की लगभग एक सौ ग्राम डली को चिमटे से पकड़कर आग पर , गैस पर या तवे पर अच्छी तरह गर्म कर लें . जब लाल होने लगे तब गर्म डली को तुरंत आधा कप पानी में डुबोकर निकाल लें और नमकीन गर्म पानी को एक ही बार में पी जाएँ . ऐसा नमकीन पानी सोते समय लगातार दो - तीन दिन पीने से खाँसी , विशेषकर बलगमी खाँसी से आराम मिलता है . नमक की डली को सुखाकर रख लें एक ही डली का बार बार प्रयोग किया जा सकता है .

आंवले के फायदे

आंवले –
   आंवले को आयुर्वेद में गुणों की खान माना गया है। यह कई बीमारियों को दूर करता है। इसका अपना पौष्टिक महत्व भी है। संतरे से बीस गुना ज्यादा विटामिन सी इसमें पाया जाता हैं। आंवले को गूजबेरी के नाम से भी जाना जाता हैं। आंवले का सबसे बड़ा गुण यह है कि इसे पकाने के बाद भी इसमें मौजूद विटामिन सी खत्म नहीं होता।आज हम आपको बताने जा रहे हैं आंवले के कुछ ऐसे ही पौष्टिक गुणों के बारे में......

-आंवला मोतियाबिंद की परेशानी में फायदेमंद रहता है।

- सुबह नाश्ते में आंवले का मुरब्बा खाने से आप स्वस्थ बने रह सकते हैं।

- आंवला हमारी आंखों के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है।

- आंवला हमारे पाचन तन्त्र और हमारी किडनी को स्वस्थ रखता है।

- आंवला अर्थराइटिस के दर्द को कम करने में भी सहायक होता है।

- आंवला खाने से सर्दी, खांसी, जुकाम जैसी बीमारियों से बचा जा सकता है।

- दिल को सेहतमंद रखने के लिए रोजा आंवला खाने की आदत डालें। इससे आपके दिल की मांसपेशियां मजबूत होंगी।

- आंवला बालों को मजबूत बनाता है, इनकी जड़ों को मजबूत करता है और बालों का झडऩा भी काफी हद तक रोकता है।

- आंवला खाने से कब्ज दूर होती है। यह डायरिया जैसी परेशानियों को दूर करने में बहुत फायदेमंद है।

- एसीडिटी की समस्या है, तो एक ग्राम आंवला पाउडर और थोड़ी-सी चीनी को एक गिलास पानी या दूध में मिलाकर लें।

- आंवला खाने को अच्छी तरह पचाने में मदद करता है, जिससे आपको खाने के तमाम न्यूट्रिएंट्स मिलते हैं

अरुचि के लिये मुनक्का, हरड़ और चीनी

*अरुचि के लिये मुनक्का हरड़ और चीनी*
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भूख न लगती हो तो बराबर मात्रा में मुनक्का ( बीज निकाल दें ) , हरड़ और चीनी को पीसकर चटनी बना लें . इसे पाँच छह ग्राम की मात्रा में ( एक छोटा चम्मच ) , थोड़ा शहद मिला कर खाने से पहले दिन में दो बार चाटें .

Friday, November 3, 2017

खांसी जुकाम का प्रयोग

🌺🙏🏻🌺 *!! खांसी जुकाम का प्रयोग !!* 🌺🙏🏻🌺

......एक ख़ास दवा, जब कभी जुकाम हो जाए या खांसी हो जाए कैसी भी तो आप थोडा सा अदरक देशी घी में सुन्हेरा होने तक भूने और आंच से उतार कर घी अलग कर ले फिर अदरक में बहुत थोडा सा गुड हाथ से मसल कर डाले और जितना गरम खा सकते है खा ले और एक घंटे तक पानी ना पिए. दो बार में ही हमेशा के लिए जुकाम और खांसी ठीक हो जाएगी. यह नुस्खा बहुत बार अपनाया हुआ है और १००% खरा उतरा है.!!

              🌺🙏🏻🌺🌿🌿🌷🌷🌿🌿🌺🙏🏻🌺

मोटापा नाशक चूर्ण

आयुर्वेदिक मोटापनाशक चूर्ण

पोदीना पंचाग 100 ग्राम
दारू हल्दी 80 ग्राम
मेथी 50 ग्राम
करंजी 20 ग्राम
आवला 100 ग्राम
गिलोय 20 ग्राम
कुटकी 50 ग्राम
बहेड़ा 30 ग्राम
कालीजीरी 50 ग्राम
चिरायता 20 ग्राम
भूमि आवला 50 ग्राम
हरड़ 150 ग्राम
शुद्ध गुगुल 10 ग्राम
बाकुची 10 ग्राम
जीरा 50 ग्राम
शुद्ध शिलाजीत 10 ग्राम
दालचीनी 30 ग्राम
सोंफ 50 ग्राम
धनिया  50 ग्राम
काली मिर्च 20 ग्राम
जीरा 50 ग्राम

सभी को कूट पीस कर चूर्ण बना ले और सुबह शाम एक एक चमच्च गुनगुने पानी से ले
5 से 10 किलो वजनकम हो जाएगा 30 दिन से 40 दिन में । इसको काढ़ा बनाकर भी लिया जा सकता है जिससे इसका और भी बेहतर रिजल्ट आयेगा ।

Tuesday, October 31, 2017

पुष्टिवर्धक लड्डू (पाक) और बर्फी

पुष्टिवर्धक लड्डू (पाक)

विधि : उड़द, गेहूँ, जौ व चने का 500-500 ग्राम आटा घी में भून लें । 2 किलो शक्कर की चाशनी में भूने हुए आटे को डाल के छोटे-छोटे लड्डू बना लें । आवश्यकतानुसार पिस्ता, बादाम, इलायची डाल दें । सुबह-शाम 1-1 लड्डू अथवा अपनी पाचनशक्ति के अनुकूल मात्रा में खूब चबा-चबाकर खायें । ऊपर से एक गिलास मीठा दूध पी लें ।

लाभ : यह शक्ति, बल व वीर्य वर्धक, चुस्ती-फुर्ती देनेवाला और शरीर को सुडौल बनानेवाला है । सेवनकाल में आसन-व्यायाम नित्य करें । अधिक मसालेदार, तले व खट्टे पदार्थों (विशेषरूप से इमली एवं अमचूर) से परहेज रखें ।

  

पौष्टिक गुणों से युक्त तिल की बर्फी

1-1 कटोरी तिल व मूँगफली अलग-अलग सेंक लें व एक सूखा नारियल-गोला किस लें । 500 ग्राम गुड़ की दो तार की चाशनी बनाकर इन सबकी बर्फी जमा लें । स्वादिष्ट व पौष्टिक गुणों से युक्त यह बर्फी शीत ऋतु में बहुत लाभकारी है ।

Friday, October 27, 2017

आयुर्वेदिक पाक/अवलेह भाग

*!! आयुर्वेदिक पाक/ अवलेह भाग १ !!*

           *!! हरिद्रा खण्ड !!*

*गुण व उपयोग : -* हरिद्रा खण्ड शीतपित्त, उदर्द, चकते, कण्डु, खुजली, ‌‌‌एग्जिमा-छाजन, जीर्णज्वर, कृमि, पांडुरोग, शाथ आदि रोगों में उत्तम लाभ करता है ! यह मृदु विरेचक भी है !!

*मात्रा व अनुपान : -*
६ से १० ग्राम, पानी के साथ !!

          *!! हरीतकी खण्ड !!*

*गुण व उपयोग : -* हरीतकी खण्ड अम्लपित्तजन्य दर्द व अम्लपित्त, अर्श, काष्ठगत विकार, वातरोग, कटिशूल में उत्तम लाभ करता है ! यह उत्तम विरेचक भी है !!

*मात्रा व अनुपान : -*
    ६ से १० ग्राम, बलानुसार गर्म दूध या पानी के साथ !!

          *!! सौभग्य शुण्ठीपाक !!*

*गुण व उपयोग : -* सौभग्य शुण्ठीपाक बल एवं आयु की वृद्धि करता है ! पुरूषों के लिए भी बल-वर्द्धक है ! स्त्रियों के लिए अमृत-तुल्य लाभकारी है ! इसके सेवन से योनिविकार, प्रदर, कष्टार्तव आदि रोग नष्ट होते हैं ! प्रसूता स्त्रियों के लिए विशेष लाभप्रद है !!

*मात्रा व अनुपान : -* ६ से २० ग्राम, दिन में दो बार !!

           *!! सुपारी पाक !!*

*गुण व उपयोग : -* सुपारी पाक के सेवन से स्त्रियों की योनि से होने वाले विभिन्न प्रकार के स्राव (प्रदर) नष्ट होते हैं ! बन्ध्यत्व दोष को नष्ट करके उन्हे सन्तानोपत्ति योग्य बना देता है ! पुरूषों के शीघ्रपतन व शुक्रपतन एवं शुक्रमेह रोग में अत्यन्त गुणकारी है ! गर्भाशय को शक्ति देता है व योनि को संकुचित करता है !!
       विशेषतय: प्रसूता स्त्रियों के लिए अतिशय गुणकारी है ! इसके सेवन से प्रौढ़ा स्त्री भी कान्तियुक्त हो जाती है ! प्रदर रोग के कारण होने वाले कमर दर्द, सिर दर्द रहना, कमजोरी आदि में उत्तम लाभ करता है ! स्त्रियों में अमृततुल्य लाभ करता है !!

*मात्रा व अनुपान : -* १० से २० ग्राम, सुबह-शाम, गाय के दूध के साथ !!

         *!! व्याघ्री हरीतकी !!*

*गुण व उपयोग : -* व्याघ्री हरीतकी खाँसी, श्वास रोग, बद्धकोष्ठ, गले की खराबी आदि में उत्तम लाभकारी है ! कफ व वात प्रधान रोगों में इससे विशेष लाभ होता है ! कास व श्वास रोगी के लिए यह अमृत के समान लाभ प्रदान करता है !!
*मात्रा व अनुपान : -* ६ से १० ग्राम, दिन में दो बार, पानी या दूध के साथ !!

         *!! वासाहरीतकी अवलेह !!*

*गुण व उपयोग : -* वासाहरीतकी अवलेह खाँसी, क्षय, श्वास, रक्तपित्त, प्रतिश्याय, रक्तस्राव, रक्त मिश्रित दस्त, बवासीर, रक्तप्रदर, हृदय की कमजोरी, कब्ज आदि में लाभदायक है ! यह विशेष रूप से श्वास नलिका, खाँसी, कफ रोग आदि में लाभ करता है !!

*मात्रा व अनुपान : -* ६ से १० ग्राम अवलेह चटाकर ऊपर से गाय का गर्म दूध पीना चाहिए !!

            *!! वासावलेह !!*

*गुण व उपयोग : -* वासावलेह के सेवन से खाँसी, श्वास, रक्तप्रदर, रक्तपित्त, खूनी बवासीर, रक्तमिश्रित दस्त, पुरानी कफज खाँसी, श्वास-नलिका की सूजन, न्यूमोनिया, प्लूरिसी, इन्फ्लुएन्जा के बाद की खाँसी आदि में लाभ मिलता है !!

*मात्रा व अनुपान : -* ६ से १० ग्राम, दिन में दो बार शहद या रोगानुसार अनुपान के साथ !!

        *!! लऊक सपिस्ताँ !!*

*गुण व उपयोग : -* लऊक सपिस्ताँ के सेवन से कठिन से कठिन नजला, जुकाम आदि रोग शीघ्र नष्ट होते हैं ! कास-श्वास रोग में भी उत्तम ‌‌‌लाभकारी है !!

*मात्रा व अनुपान : -* ६ से १० ग्राम, ‌‌‌प्रात: शाम चाटकर ऊपर से सुखोष्ण पानी पी लें !!

          *!! मूसली पाक !!*

*गुण व उपयोग : -* मूसली पाक अत्यन्त पौष्टिक, बल-वीर्य व कामशक्ति-वर्द्धक और नंपुसकता- नाशक है ! इसके सेवन से धातु- दौर्बल्य नष्ट होकर शरीर स्वस्थ, कान्तियुक्त व बलशाली बनता है ! स्त्रियों के प्रदर रोग व पुरूषों के वीर्य दोष को नष्ट करने में यह अतिउत्तम है !!

*मात्रा व अनुपान : -* ६ से १० ग्राम, दूध या पानी के साथ !!

        *!! माजनू फलासफा !!*

*गुण व उपयोग : -* माजनू फलासफा दिल, दिमाग, वातनाड़ियों व स्नायु मण्डल की कमजोरी में उत्तम लाभ प्रदान करता है ! इसके सेवन से वातरोगों में विशेष लाभ मिलता है !!

*मात्रा व अनुपान : -* ५ से ६ ग्राम !!

           *!! मदनानन्द मोदक !!*

*गुण व उपयोग : -* मदनानन्द मोदक के उपयोग से बल- वीर्य की वृद्धि, रति- शक्ति की वृद्धि व स्तम्भन शक्ति प्राप्त होती है ! यह अपस्मार, ज्वर, उन्माद क्षय, वातव्याधि, कासव्याधि, कासश्वास, शोथ, भगन्दर, अर्श, ग्रहणी, बहुमूत्र, प्रमेह, शिरोरोग, अरूचि व वातिक- पैतिज और कफज रोग आदि में लाभ प्रदान करता है ! यह संग्रहणी व मन्दाग्नि की उत्तम दवा है ! इसका सेवन वैद्य की देखेरख में ही करना चाहिए !!

*मात्रा व अनुपान : -* ३ से ६ ग्राम, दूध या पानी के साथ !!

             *!! भार्गी गुड़ !!*

*गुण व उपयोग : -* भार्गी गुड़ पुराने कास- श्वास वाले रोगी के लिए अमृत के समान लाभ करता है, क्योंकि इसका प्रभाव वातवाहिनी व कफवाहिनी नाड़ियों पर विशेष होता है !!

*मात्रा व अनुपान : -* १० से २० ग्राम, दिन में दो बार !!

        *!! ब्राह्मी रसायन !!*

*गुण व उपयोग : -* ब्राह्मी रसायन खाँसी, दमा, क्षय, कब्जियत आदि में लाभ करती है ! इसके सेवन से शरीर व दिमाग की कमजोरी दूर हो कर आयु, बल, कान्ति व स्मरण शक्ति की वृद्धि होती है !!

*मात्रा व अनुपान : -* १० ग्राम, गाय के दूध या पानी के साथ !!

         *!! नारिकेल खण्ड पाक !!*

*गुण व उपयोग : -* नारिकेल खझउ पाक के सेवन से पुरूषत्व निद्रा व बल की वद्धि होती है ! और यह अम्लपित्त, परिणामशूल, शुक्र-क्षयादि, अपचन, उदरशूल, खट्टी डकारें व क्षय आदि रोगों मे विशेष लाभकारी है ! इसके सेवन से पौरूष की बढ़ोत्तरी हो कर शरीर को बल मिलता है ! यह शीतवीर्य, स्निग्ध व पौष्टिक है ! अम्लपित्त रोग में यह विशेष लाभकारी है !!

*मात्रा व अनुपान : -* १० से २० ग्राम, दिन में दो बार दूध या पानी के साथ !!

          *!! बाहुशाल गुड़ !!*

*गुण व उपयोग : -* बाहुशाल गुड़ के सेवन से बवासीर, गुल्म, पीनस, पांडु, हलीमक, उदर रोग, मन्दाग्नि, ग्रहणी, क्षय, आमवात, संग्रहणी, प्रमेह प्रतिश्याय आदि रोगों में उत्तम लाभ मिलता है ! यह बल, मेधा व कान्तिवर्द्धक है !!

*मात्रा व अनुपान : -* १०- १० ग्राम, दिन में दो बार, दूध या पानी के साथ !!

          *!! बादाम पाक !!*

*गुण व उपयोग : -* बादाम पाक बल, वीर्य व औज की वृद्धि करता है ! यह रस- रक्तादि धातुओं को बढ़ाकर शरीर को कान्तियुक्त बना देता है ! ध्वजभंग, नंपुसकता, स्नायु दौर्बल्य में बहुत लाभदायक है ! मस्तिष्क, हृदय की कमजोरी व शुक्र- क्षय, पित्त-विकार, नेत्र और शिरोरोग में लाभकारी है ! इसके सेवन से शरीर पुष्ट होता है ! यह सर्दियों में सेवन करने योग्य उत्तम पुष्टर्इ है ! दिमागी काम करने वाले व सिर दर्द वाले को इस पाक का सेवन अवश्य करना चाहिए !!

*मात्रा व अनुपान : -* १० से २० ग्राम, गाय के दूध या पानी के साथ !!

         *!! धात्री रसायन !!*

*गुण व उपयोग : -* धात्री रसायन कास, श्वास, क्षय, दुर्बलता, फेफड़ों की दुर्बलता, खाँसी, स्नायविक दुर्बलता आदि में उत्तम लाभ करता है ! यह पौष्टिक, वीर्यवर्द्धक रसायन व उत्तम बाजीकरण है ! यह आमाशय, मस्तिष्क, हृदय व आँतों को बलवान बनाता है ! एवं जठराग्नि को प्रदीप्त करता है !!

*मात्रा व अनुपान : -* ४ से ६ ग्राम, सुबह भोजन से ३ घण्टा पूर्व गाय के दूध के साथ, रात्रि को सोने से आधा घण्टा पहले !!

          *!! दाड़िमावलेह !!*

*गुण व उपयोग : -* दाड़िमावलेह पित्त, क्षय, रक्तपित्त, प्यास, अतिसार, संगहणी, दुर्बलता, नेत्ररोग, शिरोरोग, दाह, अम्लपित्त, धातुस्राव, अरूचि आदि रोगों में लाभदायक है ! इसके सेवन से हृदय व मस्तिष्क को ताकत मिलती है !!

*मात्रा व अनुपान : -* ६ से १० ग्राम, दिन में दो से तीन बार !!

            *!! जीवन कल्प !!*

*गुण व उपयोग : -* जीवन कल्प के सेवन से रक्ताल्पता, आल्स्य, कामला, श्वास, कास, शारीरिक क्षीणता आदि विकार नष्ट हो कर शरीर हृष्ट-पुष्ट व बलवान बनता है ! शीतकाल में इसका सेवन विशेष लाभकारी होता है !!

*मात्रा व अनुपान : -* ६ से १० ग्राम, आवश्यकतानुसार दूध के साथ !!

          *!! जीरकादि अवलेह !!*

*गुण व उपयोग : -* जीरकादि अवलेह प्रमेह, प्रदर, ज्वर, दुर्बलता, मन्द-मन्द ज्वरांश बना रहना, भूख कम या बिल्कुल न लगना, अरूचि, श्वास, तृषा, दाह व यक्ष्मा आदि रोगों में लाभदायक है !!

*मात्रा व अनुपान : -* १० ग्राम, दिन में दो बार ठण्डे पानी या दूध के साथ !!

          *!! छुहारा पाक !!*

*गुण व उपयोग : -* छुहारा पाक शरीर को बल देने वाला है ! इसके सेवन से रति शक्ति में वृद्धि होती है ! व स्वप्नदोषादि रोग नष्ट होते हैं ! इससे शुक्रक्षीणता के कारण पुरूष की व रजोदोष के कारण स्त्री की कमजोरी दूर होती है !!

*मात्रा व अनुपान : -* १० से २० ग्राम, दूध या पानी के साथ !!

*!! आयुर्वेदिक अर्क भाग २ !!*

         *!! गिलोय अर्क !!*

*गुण व उपयोग : -* इसके सेवन से आमवात, वातरक्त, प्रमेह, रक्तपित्त, जीर्णज्वर, पित्तज्वर, रक्त की गर्मी के विकार, मधुमेह आदि रोगों में उत्तम लाभ मिलता है ! मधुमेह के रोगियों को पानी पीने के दौरान २० ग्राम गिलोय अर्क को मिलाकर सेवन करने से कुछ समय में पेशाब में चीनी की मात्रा कम हो जाती है !!

*मात्रा व अनुपान : -*
    २० से ४० ग्राम, दिन में दो बार पानी के साथ !!

        *!! अजवायन अर्क !!*

*गुण व उपयोग : -* यह मन्दाग्नि, उदरशूल, अजीर्ण, गुल्म, आमदोश, अरूचि, वायु व कफ विकार आदि में उत्तम लाभ प्रदान करता है !!

*मात्रा व अनुपान : -* १० से ५० ग्राम, दिन में २-३  बार !!

        *!! गोखमुण्डी अर्क !!*

*गुण व उपयोग : -* यह फोड़े-फुंसी, खाज-खुजली, दाद, चकत्ते निकलना, विसर्प, कुष्ठ आदि में लाभकारी है ! चेहरे के काले दाद, झार्इ आदि में इसका सेवन किया जाता है ! यह खून साफ करता है ! सप्त धातुओं में प्रविष्ट हुए विष को नष्ट करता है !!

*मात्रा व अनुपान : -* २० से ५० ग्राम, दिन-रात में चार बार अकेले या बराबर मात्रा में पानी मिलाकर पिलाएं !!

         *!! चन्दन अर्क !!*

*गुण व उपयोग : -* यह कुछ अधिक शीतवीर्य है ! इसके सेवन से पेशाब में जलन हो, पेशाब रूक-रूक कष्ट के साथ आता हो, पेशाब के साथ रक्त आता हो या नाक से खून आता हो तो इस अर्क में ५ ग्राम मिश्री मिलाकर पिलाने से पेशाब बिना किसी दर्द से साफ हाने लगता है ! तथा रक्त का आना भी बन्द हो जाता है !!

*मात्रा व अनुपान : -* २० से ४० ग्राम, दिन में दो बार !!

             *!! ब्राह्मी अर्क !!*

*गुण व उपयोग : -* इसके सेवन से याददाशत, कमजोरी, अपस्मार, उन्माद, मूच्र्छा, हिस्टीरिया, स्मरणशक्ति की कमी, दिमाग में थकावट या खुश्की रहना, नींद कम आना, मानसिक अशान्ति व भ्रम बना रहना, चक्कर आना आदि में विशेष लाभ मिलता है ! याददाश्त बढ़ाने में यह गुणकारी है ! आँखों के आगे अंधेरा-सा मालूम पड़ना या चक्कत आदि रोगों में इस अर्क को दूध के साथ मिलाकर या अन्य औषधीयों के साथ अनुपान रूप में लेने से शीघ्र एवं उत्तम लाभ होता है !!

*मात्रा व अनुपान : -* २० से ४० ग्राम, दिन-रात में दो से चार बार या औषधीयों के अनुपान रूप में प्रयोग करें !!

        *!! पुनर्नवा अर्क !!*

*गुण व उपयोग : -* इसके सेवन से कामला, पांडु, हलीमक, उदर रोग, मूत्र कृच्छ, प्रमेह, शोथ, रक्तपित्त, वृक्क विकार, यकृत शोथ, गर्भाशय शोथ आदि रोगों में विशेष लाभमिलता है ! गर्भाशय शोथ में इसके साथ बराबर मात्रा में दशमूल अर्क मिलाकर देने से उत्तम लाभ होता है !!

*मात्रा व अनुपान : -* २० से ५० ग्राम, दिन में दो से तीन बार !!

         *!! त्रिफला अर्क !!*

*गुण व उपयोग : -* इसके सेवन से प्रमेह, कामला, पेट फूला हुआ रहना, मधुमेह, स्वप्नदोष, आमवात, मेदावृद्धि, शरीर से पसीना निकलना तथा पसीने से दुगन्ध आना, पांडुरोग, वातरोग, वातरक्त, खाज-खुजली, पामा, कुष्ठ, कब्ज आदि रोगों में विशेष लाभ मिलता है !!

*मात्रा व अनुपान : -* २० से ८० ग्राम, दिन-रात में ३ से ४ बार आवश्यकतानुसार दें !!

              *!! दशामूल अर्क !!*

*गुण व उपयोग : -* इसके सेवन से प्रसूत विकारों, हृदय रोग, दिमागी कमजोरी, शोथ रोग, गुल्म, उदर रोग, मानसिक अशान्ति, अनिद्रा, हृदय की कमजोरी आदि में उत्तम लाभ मिलता है ! किन्ही कारणों से हृदय में लगने वाले झटकों में व मंद-मंद दर्द में यह विशेष लाभकारी है ! ऐसी स्थिती में अर्जुन की छाल के चूर्ण के साथ इसका सेवन करने से शीघ्र लाभ होता है !!

*मात्रा व अनुपान : -* १० ग्राम से १०० ग्राम, दिन में चार बार अकेले ही या वातनाशक औषधीयों के अनुसार रूप में दें !!