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Saturday, November 25, 2017

सूर्य को जल देने के लाभ

सूर्य नव ग्रहो के स्वामी हैं। ये पंचदेवों में एक हैं।
जीवन को व्यवस्था सूर्य से ही
मिलती है। पुराणों में सूर्य की उपासना को
सभी रोगों को दूर करने वाला बताया गया है।
हिंदू संस्कृति में अर्घ्य दान यानी जल देना सामने वाले
के प्रति श्रद्धा और आस्था दिखाने का प्रतीक है।
लिहाजा स्नान के बाद सूर्य को अर्घ्य देने का अर्थ है
जीवन में संतुलन को आमांत्रित करना।अघर्य देते समय
सूर्य के नामों का उच्चारण करने का विघान है।
शास्त्रों के मुताबिक प्रातःकाल पूर्व दिशा की ओर मुख
करके और शाम के वक्त पश्चिम की ओर मुख करके
सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए। मान्यता है कि सूर्य को अर्घ्य देते
समय गिरने वाले जलकण वज्र बनकर रोग रूपी राक्षसों
का विनाश करते हैं।
जल चिकित्सा और आयुर्वेद के अनुसार प्रातःकालीन
सूर्य को सिर के ऊपर पानी का बर्तन ले जाकर जल
अर्पित करना चाहिए। ऐसा करते समय अपनी दृष्टि
जलधारा के बीच में रखें ताकि जल से छनकर सूर्य
की किरणें दोनों आंखों के मध्य में पड़ें। इससे आंखों
की रौशनी और बौद्धिक क्षमता
बढ़ती है।
जल से छनकर जब सूर्य की किरणें शरीर
पर पड़ती हैं तो शरीर में ऊर्जा का संचार
होता है। इससे शरीर में रोग से लड़ने की
शक्ति बढ़ती है साथ ही आस-पास
सकारात्मक उर्जा का संचार होता है जो जीवन में आगे
बढ़ने की प्रेरणा देता है।
ज्योतिषशास्त्र में कहा जाता है कि कुण्डली में सूर्य
कमज़ोर स्थिति में होने पर उगते सूर्य को जल देना चाहिए। सूर्य के
मजबूत होने से शरीर स्वस्थ और उर्जावान रहता है।
इससे सफलता के रास्ते में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।

Wednesday, April 27, 2016

हिंदुत्व परंपरा का महत्व

चप्पल बाहर क्यों उतारते हैं
मंदिर में प्रवेश नंगे पैर ही करना पड़ता है, यह नियम दुनिया के हर हिंदू मंदिर में है। इसके पीछे वैज्ञानिक कारण यह है कि मंदिर की फर्शों का निर्माण पुराने समय से अब तक इस प्रकार किया जाता है कि ये इलेक्ट्रिक और मैग्नैटिक तरंगों का सबसे बड़ा स्त्रोत होती हैं। जब इन पर नंगे पैर चला जाता है तो अधिकतम ऊर्जा पैरों के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर जाती है।

दीपक के ऊपर हाथ घुमाने का वैज्ञानिक कारण
आरती के बाद सभी लोग दिए पर या कपूर के ऊपर हाथ रखते हैं और उसके बाद सिर से लगाते हैं और आंखों पर स्पर्श करते हैं। ऐसा करने से हल्के गर्म हाथों से दृष्टि इंद्री सक्रिय हो जाती है और बेहतर महसूस होता है।

मंदिर में घंटा लगाने का कारण
जब भी मंदिर में प्रवेश किया जाता है तो दरवाजे पर घंटा टंगा होता है जिसे बजाना होता है। मुख्य मंदिर (जहां भगवान की मूर्ति होती है) में भी प्रवेश करते समय घंटा या घंटी बजानी होती है, इसके पीछे कारण यह है कि इसे बजाने से निकलने वाली आवाज से सात सेकंड तक गूंज बनी रहती है जो शरीर के सात हीलिंग सेंटर्स को सक्रिय कर देती है।
 
भगवान की मूर्ति
मंदिर में भगवान की मूर्ति को गर्भ गृह के बिल्कुल बीच में रखा जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस जगह पर सबसे अधिक ऊर्जा होती है जहां सकारात्मक सोच से खड़े होने पर शरीर में सकारात्मक ऊर्जा पहुंचती है और नकारात्मकता दूर भाग जाती है।
 
परिक्रमा करने के पीछे वैज्ञानिक कारण
हर मुख्य मंदिर में दर्शन करने और पूजा करने के बाद परिक्रमा करनी होती है। परिक्रमा 8 से 9 बार करनी होती है। जब मंदिर में परिक्रमा की जाती है तो सारी सकारात्मक ऊर्जा, शरीर में प्रवेश कर जाती है और मन को शांति मिलती है।
 
मूर्ति पर फूल चढ़ाने के कारण
भगवान की मूर्ति पर फूल चढ़ाना भी एक परंपरा है। ऐसा करने से मंदिर परिसर में अच्छी और भीनी-भीनी सी खुश्बू आती है। अगरबत्ती, कपूर और फूलों की खुश्बू से सूंघने की शक्ति बढ़ती है और मन प्रसन्न हो जाता है।