Sunday, April 15, 2018

वजन बढ़ाना

*वजन बढ़ाने के लिए सरल घरेलू इलाज*---
  *केला*  एक नग
  *चीनी*  दो चम्मच
   *दूध*   एक कप
    *किशमिश*  दो बड़ा चम्मच
*विधी*--केला पीसकर उसमें चीनी, दूध और किशमिश मिला दें। सुबह नाश्ते के थोड़ी देर बाद इसे पीएं ।वजन बढ़ाने के लिए इसको एक महिने तक लगातार लें । एक सप्ताह में ही फर्क महसूस होने लगेगा ।
                  

बाल तोड़

थोड़े तुलसी के पत्ते और उतनी ही मात्रा में पीपल की कोपल ले और उन्हें पीस कर चटनी बना कर लगा ले और सूखने दे बस इसका असर इतना तीव्र है की अगर बालतोड़ पक भी गया हो बस फूटा न हो तो 24 घंटे में आप ये प्रयोग 4 बार दोहरा दे तो वहाँ आपको निशान तक नही मिलेगा सिर्फ 24 घंटे में ही

कमर दर्द की परेशानी

कमर दर्द की आजकल काफी लोगों को शिकायत रहती है
महिलाओं को श्वेत प्रदर या मासिक धर्म की गडबडी के कारण तथा पुरुषों मे अधिक परिश्रम करने या वायुप्रकोप या ढंग उठना बैठना और सोने से ये रोग होता है

उपचार
1:- सुबह खाली पेट अखरोट खाने से आराम मिलता है

2:- गौखरू और सोंठ को 1/2, 1/2 चम्मच मात्रा में मिलाकर काढा बनाये उसमे मिश्री मिलाकर पीये

3:- तारपीन के तेल से मालिश करने से भी आराम मिलता है

4:- सरसों के तेल में सोंठ डालकर गर्म करें फिर मालिश करें

5:- सौंठ +हरड़ +गिलोय को बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बना से ले सुबह श्याम आधा चम्मच ले

6:- अरंड के पत्तों पर जरा सा सरसों का तेल लगाकर हल्का गर्म करें और कमर पर बाधे
ये सबसे कारगार उपाय है

7:- मुंडी +सौंठ+काली मिर्च +भूनी हुई हल्दी+रासना
को बराबर मात्रा में ले चूर्ण बनाये और एक चम्मच चूर्ण गरम पानी से लें

8:- सौंठ +शैधा नमक +काली मिर्च +बायबिडंग
सबको बराबर मात्रा में मिला कर चूर्ण बनाये गर्म पानी से सुबह सैवन करे

9:- सफेद जीरा और काला जीरा १० -१० ग्राम ले घी में भूनकर चूर्ण बना लें फिर इसमें थोड़ा सा हिंग और थ ओर थौडा सा सैधा नमक मिलाकर सुबह खाली पेट सहद क् साथ चाट ल्
10:- 100ग्राम हरड़ +100ग्राम अजमौद तथा 25 ग्राम सौंठ
सबको मिलकर बारिक चूर्ण बनाये सुबह श्याम 1-1 चम्मच गर्म पानी से सेवन करे

11:- पीपल की छाल का काढा बनाकर पीये

12:- 10 ग्राम सौंठ +20 ग्राम अश्वगंधा +30 ग्राम मिश्री
तीनो को मिलाकर चूर्ण बनाये और 1-1 चम्मच गर्म पानी से लें

13:- बबूल की गोंद को पिसकर चूर्ण बनाये और आधा चम्मच गर्म पानी के साथ ले

14:- सरसों के तेल में थौडा कपूर डालकर धूप में गर्म करें और इससे कमर की मालिश करें

15:- और नियमित प्रणायाम करें

कमर दर्द के घरेलू नुस्खे

कमर दर्द (Back pain in Hindi) किसी भी उम्र के व्यक्ति को परेशान कर सकता है फिर वह महिला हो या पुरुष.हम में से लगभग प्रत्येक व्यक्ति एक या अधिक बार कमर दर्द का शिकार होता ही है. कमर के निचले, मध्य और ऊपर की तरफ दर्द के साथ साइटिका का दर्द भी एक आम बिमारी है. मेरुदंड में गड़बड़ी, कमजोर मांसपेशियां, गलत पोजीशन में सोने या पोषण में कमी की वजह से कमर दर्द हो सकता है, इसके अलावा अधिक तनाव में रहने और चिंता करने से भी यह समस्या दिखाई देती है.

कभी भी बहुत भारी सामान या कोई भरी भरकम वस्तु उठाने के पहले सावधान रहे. ज़रूरत से ज्यादा वजन उठाना कमर दर्द का कारण बन सकता है और अधिकांशतः यह देखा जा सकता है. जब कुछ भरी चीज उठायें तो घुटनों को मोड़ कर बैठने की मुद्रा बना लें. अपने हाथ और कोहनी तक का सहारा लेते हुए भरी चीज को उठायें.

मालिश (Massage)

अगर कमर दर्द हो तो मालिश या मसाज एक बहुत अच्छा घरेलू इलाज है. प्रभावित हिस्से में हलकी मसाज लें. किसी हर्बल ऑइल की मदद से मसाज लेनी चाहिए लेकिन हमेशा ध्यान रखें कि मसाज में दबाव नहीं होना चाहिए.

गेंहू के द्वारा उपचार  (Wheat treatment)

एक कप गेंहू में रात भर के लिए पानी में भिगो कर रख दें.दुसरे दिन इस भीगे हुए गेंहूं को  धनिये और खस (Cuscus grass) के साथ मिलाकर पीस लें. एक कप दूध के साथ इस मिश्रण को उबाल लें और कुछ नमिनट तक उबालने पर जब यह गाढ़ा हो जाये तो इसे दिन में दो बार सेवन करें.

अदरक (Ginger)

अदरक में दर्दनाशक और जलनरोधी गुण पाया जाता है. कमर दर्द में इसके सेवन से बहुत लाभ मिलता है. अदरक के टुकड़े को पीस कर पेस्ट बना लें और प्रभावित हिस्से में इs पेस्ट को लगा कर रखें. इसके अलावा अदरक का प्रयोग खाने के साथ या चाय आदि में भी कियता जा सकता है.
बर्फ (Ice pack)

कमर दर्द में सेंक का प्रभाव बहुत आराम प्रदान करने वाला होता है. कमर दर्द और सूजन को कम करने के लिए बर्फ की सेंक ली जा सकती है. इसे घर में तैयार करने के लिए बर्फ के टुकड़ों को एक प्लास्टिक बैग में भरें और एक तौलिये में लपेट कर इसे सेंक के रूप में लें.

बलूत का गोंद (Oak tree gum)

ओक ट्री गम या बलूत के पेड़ से निकलने वाले गोंद का प्रयोग कमर दर्द में बेहतरीन होता है इसके फायदों को देखते हुए आज बाज़ार में यह पाउडर के रूप में भी पाया जाता है. सुबह खाली पेट में एक चम्मच ओक ट्री गम का सेवन करने से दर्द में लाभ होता है.

बैठने की मुद्रा (Sitting position)

बैठने की गलत मुद्रा भी कमर दर्द का कारण होती है. अगर आप गलत तरीके से बैठते हैं तो इसका असर कमर और स्पाइन पर पड़ता है. लगातार एक ही स्थिति में बैठे रहने से भी कमर की तकलीफ हो सकती है. अगर आपको काम के दौअर्न अधिक देर बैठे रहने की ज़रूरत पड़ती है तो थोड़े थोड़े अन्तराल में उठकर चलना फिरना करें, इसके अलावा इस दौरान हलकी एक्सरसाइज भी की जा सकती है.

तुलसी (Basil leaves)

तुलसी में दर्दनिवारक गुण पाए जाते हैं जो कमर दर्द में राहत देता है. रोजाना 8 से 10 तुलसी के पत्तों को एक कप पानी में उबाल लें, जब पानी आधा रह जाये तो इसे ठंडा कर लें. इसमें एक चुटकी नमक मिलाकर दिन में दो बार पीने से कमर का दर्द कम होता है.

खसखस (Poppy seeds)

खसखस कमर दर्द का घरेलू उपाय है जो दर्द को कम करता है. खसखस को मिश्री के साथ मिलाकर पीस लें. अब इसे दिन में दो चम्मच सुबह शाम लें. इससे कमर का दर्द कम होता है.

कब्ज के लिये औषधि

कब्ज के लिए औषधि :-

सामग्री -----     (1) हरड 50 gm (2) सूखा आवला 50 gm (3) बहेड़ा 50 gm (4) काली हरड 100 gm (5) एरंड तेल 50 gm (6) मुलहठी 50 gm

निर्माण विधि    (1) केवल काली हरड को एरंड तेल में हलकी आंच पर ठीक से भूनकर पीस लें
                      (2) अब बाकी बचे हरड, सूखा आवंला, बहेड़ा, मुलहठी को अलग से पीस लें और इसमें भूनी हुई काली हरड का पाउडर मिला कर कांच के बर्तन में रख ले

सेवन विधि       (1) वयस्क 1 छोटा चम्मच चम्मच रात को सोते समय दूध से ले। ऐसे लोग जिन्हें दूध मना हो वो गुनगुने पानी से लें. अत्यंत वृद्ध व्यक्ति भी ले सकते हैं
                      (2) 5 वर्ष से ऊपर के बच्चों को चौथाई से आधा छोटा चम्मच तक अवस्थानुसार दे सकते हैं...5 वर्ष से कम आयु के बच्चों को न दें

लाभ -- यह औषधि कब्ज में तो लाभ करेगी ही यह एक रसायन भी है नियमित रूप से लेने से .आँखों की रौशनी भी अच्छी रहती है असमय सफेद होने वाले बालों से छुटकारा मिलता है.

यह औषधि निरापद है यदि लगातार लिया जाए तो भी कोई हानि नही है इसकी आदत नहीं पड़ती है

बाजार में उपलब्ध पेट साफ़ करने वाले चूर्ण गोलियों आदि में सनाय होने के कारण पेट में मरोड़ होती है आँतों की स्वाभाविक गतिविधियों पर असर होता है जो दीर्घकाल में हानिप्रद सिद्ध होता है

Monday, April 9, 2018

त्रिकाल संध्या

*त्रिकाल संध्या*

   👉🏻बर्लिन ( जर्मन ) विश्वविद्यालय में अनुसंधान से सिद्ध हुआ कि – २७ घन फीट प्रति सेकंड वायुशक्ति से शंख बजाने से २२०० घन फीट वायु के हानिकारक जीवाणु नष्ट हो जाते हैं और उससे आगे की ४०० घन फीट वायु के हानिकारक जीवाणु मुर्च्छित हो जाते हैं | तो शंखनाद, धूप-दीप और भगवान का जप-ध्यान संध्या की वेला में करना चाहिए | इससे अनर्थ से बचकर सार्थक जीवन, सार्थक शक्ति और सार्थक मति – गति प्राप्त होती है | 

🙏🏻त्रिकाल संध्या की महता बताते हुए पूज्य बापूजी कहते हैं : “ जीवन को यदि तेजस्वी, सफल और उन्नत बनाना हो तो मनुष्य को त्रिकाल संध्या जरुर करनी चाहिए |

🙏🏻प्रात:काल सूर्योदय से दस मिनट पहले से दस मिनट बाद तक, दोपहर को १२ बजे के दस मिनट पहले से दस मिनट बाद तक तथा सायंकाल को सूर्यास्त के दस मिनट पहले से दस मिनट बाद तक – ये समय संधि के होते हैं | इस समय किये हुए प्राणायाम, जप और ध्यान बहुत लाभदायक होते हैं | ये सुषुम्ना के द्वार को खोलने में सहयोगी होते हैं | सुषुम्ना का द्वार खुलते ही मनुष्य की छुपी हुई शक्तियाँ जागृत होने लगती हैं |

👉🏻जैसे स्वास्थ्य के लिए हम रोज स्नान करते हैं, नींद करते हैं, ऐसे ही मानसिक, बौद्धिक स्वस्थता के लिए संध्या होती है |”

🌥संध्या के समय क्या करें ?

🙏🏻संध्यावंदन की महत्ता बताते हुए पूज्यश्री कहते हैं : “ संध्या के समय ध्यान-भजन करके अपनी सार्थक शक्ति जगानी चाहिए, सत्त्वगुण बढ़ाना चाहिए, दूसरा कोई काम नहीं करना चाहिए | अपने भाग्य की रेखाएँ बदलनी हों, अपनी ७२,००,००,००१ नाड़ियों की शुद्धि करनी हो और अपने मन-बुद्धि को मधुमय करना हो तो १० से १५ मिनट चाहे सुबह की संध्या, दोपहर की संध्या, शाम की संध्या अथवा दोनों, तीनों समय की संध्या विद्युत् का कुचालक आसन बिछाकर करें | यदि संध्या का समय बीत जाय तो भी संध्या ( ध्यान - भजन ) करनी चाहिए, वही भी हितकारी है |

👇👉🏻संध्या के समय वर्जित कार्य

👉🏻संध्या के समय निषिद्ध कर्मों से सावधान करते हुए पूज्य बापूजी कहते हैं : संध्या के समय व्यवहार में चंचल नहीं होना चाहिए, भोजन आदि खानपान नहीं करना चाहिए और संध्या के समय बड़े निर्णय नहीं लेने चाहिए | पठन – पाठन, शयन नहीं करना चाहिए तथा खराब स्थानों में घूमना नहीं चाहिए | संध्या के समय स्नान न करें | स्त्री का सहवास न करें |

🙏🏻संध्याकाल अथवा प्रदोषकाल ( सूर्यास्त का समय ) में भोजन से शरीर में व्याधियाँ तथा श्मशान आदि खराब स्थानों में घूमने से भय उत्पन्न होता है | दिन में एवं संध्या के समय शयन आयु को क्षीण करता हैं | पठन – पाठन करने से वैदिक ज्ञान और आयु का नाश होता है | 

*स्त्रोत : ऋषिप्रसाद – अगस्त 2016 से*
🏻पूज्य बापूजी त्रिकाल संध्या से होनेवाले लाभों को बताते हुए कहते हैं कि “त्रिकाल संध्या माने ह्र्द्यरुपी घर में तीन बार साफ-सफाई | इससे बहुत फायदा होता है |

👇त्रिकाल संध्या करने से –

👉🏻१] अपमृत्यु आदि से रक्षा होती है और कुल में दुष्ट आत्माएँ, माता-पिता को सतानेवाली आत्माएँ नहीं आतीं |

👉🏻२] किसीके सामने हाथ फैलाने का दिन नहीं आता | रोजी – रोटी की चिंता नहीं सताती |

३] व्यक्ति का चित्त शीघ्र निर्दोष एवं पवित्र हो जाता है | उसका तन तंदुरुस्त और मन प्रसन्न रहता है तथा उसमें मंद व तीव्र प्रारब्ध को परिवर्तित करने का सामर्थ्य आ जाता है | वह तरतीव्र प्रारब्ध के उपभोग में सम एवं प्रसन्न रहता है | उसको दुःख, शोक, ‘हाय-हाय’ या चिंता अधिक नहीं दबा सकती |

४] त्रिकाल संध्या करनेवाली पुण्यशीला बहनें और पुण्यात्मा भाई अपने कुटुम्बियों एवं बच्चों को भी तेजस्विता प्रदान कर सकते हैं |

५] त्रिकाल संध्या करनेवाले माता – पिता के बच्चे दूसरे बच्चों की अपेक्षा कुछ विशेष योग्यतावाले होने की सम्भावना अधिक होती है |

६] चित्त आसक्तियों में अधिक नहीं डूबता | उन भाग्यशालियों के संसार-बंधन ढीले पड़ने लगते हैं |

७] ईश्वर – प्रसाद पचाने का सामर्थ्य आ जाता है |

८] मन पापों की ओर उन्मुख नहीं होता तथा पुण्यपुंज बढ़ते ही जाते हैं |

९] ह्रदय और फेफड़े स्वच्छ व शुद्ध होने लगते हैं |

१०] ह्रदय में भगवन्नाम, भगवदभाव अनन्य भाव से प्रकट होता है तथा वह साधक सुलभता से अपने परमेश्वर को, सोऽहम् स्वभाव को, अपने आत्म-परमात्मरस को यही अनुभव कर लेता है |

११] जैसे आत्मज्ञानी महापुरुष का चित्त आकाशवत व्यापक होता है, वैसे ही उत्तम प्रकार से त्रिकाल संध्या और आत्मज्ञान का विचार करनेवाले साधक का चित्त विशाल होंते – होते सर्वव्यापी चिदाकाशमय होने लगता है |
ऐसे महाभाग्यशाली साधक-साधिकाओं के प्राण लोक – लोकांतर में भटकने नहीं जाते | उनके प्राण तो समष्टि प्राण में मिल जाते हैं और वे विदेहमुक्त दशा का अनुभव करते हैं |

१२] जैसे पापी मनुष्य को सर्वत्र अशांति और दुःख ही मिलता है, वैसे ही त्रिकाल संध्या करनेवाले साधक को सर्वत्र शांति, प्रसन्नता, प्रेम तथा आनंद का अनुभव होता है |

१३] जैसे सूर्य को रात्रि की मुलाकात नहीं होती, वैसे ही त्रिकाल संध्या करनेवाले में दुश्चरित्रता टिक नहीं पाती |

१४] जैसे गारुड़ मंत्र से सर्प भाग जाते हैं, वैसे ही गुरुमंत्र से पाप भाग जाते हैं और त्रिकाल संध्या करनेवाले शिष्य के जन्म-जन्मान्तर के कल्मष, पाप – ताप जलकर भस्म हो जाते हैं |
आज के युग में हाथ में जल लेकर सूर्यनारायण को अर्घ्य देने से भी अच्छा साधन मानसिक संध्या करना है | इसलिए जहाँ भी रहें, तीनों समय थोड़े – से जल से आचमन करके त्रिबंध प्राणायाम करते हुए संध्या आरम्भ कर देनी चाहिए तथा प्राणायाम के दौरान अपने इष्टमंत्र, गुरुमंत्र का जप करना चाहिए |

१५] त्रिकाल संध्या व त्रिकाल प्राणायाम करने से थोड़े ही सप्ताह में अंत:करण शुद्ध हो जाता है | प्राणायाम, जप, ध्यान से जिनका अंत:करण शुद्ध हो जाता है उन्हीं को  ब्रह्मज्ञान का रंग जल्दी लगता है|

🌹 *स्रोत – ऋषिप्रसाद – सितम्बर 2016 से* 🌹

Friday, April 6, 2018

वास्तु टिप्स

तुलसी का पौधा उपहार मे कभी न ले ।
● ताँबे और लोहे का छल्ला एक साथ न पहने ।
● घर के सभी लोग एक साथ बाहर न निकले ।● घर खाली हाथ वापस न आये ।
● पूजा का दीपक रोजाना दो लौग डालकर ही जलाये ।
● पूजा के बाद घंटा + शंख अवश्य बजाए ।
● नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने, वास्तु दोष के प्रभाव को कम करने और आर्थिक उन्नति हेतु, एक नन्हा सा तुलसी का पौधा अपने हाथो से लगाये ।
● पक्षीयो के पीने के लिए जल की व्यवस्था करे
● घर के सभी Mirror हमेशा ढककर रखे ।
● बाथरूम का दरवाजा हमेशा बंद रखे ।
● सोते समय मस्तक दक्षिण या पूर्व की दिशा मे रखे ।
● घर की गृहणी स्नानादि के बाद ही रसोई मे प्रवेश करे ।
● गृहणी सुबह-सुबह उठकर मुख्य द्वारपर जल का छिड़काव करे ।
● भोजन हमेशा पूर्व दिशा की ओर बैठकर ही करे ।
● झाडू हमेंशा दरवाजे के पीछे दक्षिण -पश्चिम की दिशा मे रखे ।
● घर मे टूटी-फूटी चीजै यह किसी भी तरह के कबाड़ को न रखे ।
● शुक्रवार को खीर जरूर खाये ।

Sunday, April 1, 2018

दालचीनी की फायदे

💃  *दालचीनी* 💃

*दूध तो हम में से कई लोग पीते है फिर भी लोगो को शिकायत रहती है कि उन्हें दूध पचता नही है और ना ही शरीर को लगता है।*
*आज हम आपको एक ऐसी चीज बतायेंगे जिसे दूध में डालकर पीने से आपका शरीर फौलाद की तरह बन जायेगा। आप बीमारियों से कोसों दूर हो जाएंगे और एक स्वस्थ-निरोगी काया पाएंगे।*

ये चीज है *दालचीनी* जिसे हम दैनिक जीवन मे बहुतायत से उपयोग करते है पर इसके कई फायदों से अनजान हैं। दालचीनी को इसके अनोखे गुणों के कारण वंडर स्पाइस भी कहते है। दालचीनी को दूध के साथ मिलाकर पीने से इसके लाभ कई गुना बढ़ जाते है, ये ना केवल आपके शरीर को मजबूत करती है बल्कि सुंदरता भी बढ़ाती है।

दालचीनी वाला दूध बनाने के लिए आपको एक ग्लास गर्म दूध में आधा चम्मच दालचीनी अच्छी तरह मिला देना है और इसका गर्म ही सेवन करना है। इस दूध को पीने से आपको कई फायदे होंगे जैसे-

◆आपका ब्लड सुगर लेवल रेगुलेट रहेगा यानि डाइबिटिज के मरीजो के लिए दालचीनी वाला दूध बहुत बहुत फायदेमंद है।

◆ये स्किन और बालों से सम्बंधित हर समस्या को दूर करता है। इसमें एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते है जो बालों और स्किन से जुड़ी रोगाणुओं को नष्ट कर देते हैं।

◆दालचीनी वाले दूध का सेवन करने से गठिया और हड्डियों से जुड़ी समस्याएं होती ही नही हैं। और जिन लोगो को अर्थराइटिस से सम्बंधित समस्या है उन्हें इससे आराम मिलेगा।

◆पढ़ाई करने वाले छात्रों को दालचीनी वाला दूध देने से उनकी एकाग्रता और मेमोरी पावर बढ़ता है।

◆यदि आपको नींद ना आने की समस्या है तो रोज रात को ये दूध पीने से आपकी ये समस्या धीरे धीरे चली जायेगी।

◆यदि आप वजन कम करने के लिए परेशान हो रहे है तो रोज रात को दालचीनी वाला दूध पीने से आप महीने में 3 से 4 किलो वजन घटा सकते है।

◆दालचीनी वाले दूध का सेवन करने से आपको जीवन मे कभी भी दिल की बीमारी या हार्ट स्ट्रोक का सामना नही करना पड़ेगा।

यह मैसेज अगर आपको अच्छा लगे या समझ में आये कि यह किसी के लिया रामबाण की तरह काम आएगा तो आप से 🙏निवेदन है कि इस मैसेज को अपने *परिचित /मित्र/ या आपके व्हाट्स एप्प ग्रुप फ्रेंड्स* तक भेज दे ।

आपका यह कदम *स्वस्थ भारत के निर्माण* मैं योगदान के रूप में होगा

दुआ मैं बड़ी ताकत होती है।