Thursday, March 29, 2018

बवासीर, फिसर और मस्सा के इलाज

*बवासीर , फिसर , मस्सा*

👆🏽 बहुत ही आम लेकिन गंभीर समस्या जो की कई लोगों को है

तो भक्तों आइये हम बताते हैं आपको इससे निजात पाने का बेहद सरल उपाय जो की आप स्वयं यानी रोगी को स्वयं ही करना होता है यदी रोगी असक्षम है तो कोई और भी कर सकता है

👉🏽 मंत्र 👇🏽

*ऊँ छाई छुई छलक छलाई आहुम आहुम क्लं क्लां क्लीं हुं फट्*

👆🏽 इस मंत्र से पानी के लोटे को  सात बार  मंत्र बोलें और सात बार  ही पानी पर फूंक मारने से पानी अभिमंत्रित हो जाएगा फिर ऐसा  करके उस पानी से ही बवासीर को धोयें

पहले दिन से ही आराम मिलेगा

आप भी करें व जिन्हें बवासीर की तकलीफ़ हो उनको बताने की कृपा करें 👈🏽 ऐसा करने से आपको तकलीफ में आराम महसूस होगा और दूसरे को बताने से उसकी दुआऐं भी मिलेंगी ।।

हमारे द्वारा अनूभूत है ।। इसी मंत्र से करीब सात सौ से आठ सौ रोगीयों को आराम दिलवा चुके है ।।  तो आप भी करें आराम जरूर मिलेगा ।।

और वेसे भी बवासीर के इस मंत्र के बारे में बुजुर्गों के द्वारा कहा गया है कि यदी आप बवासीर का यह मंत्र जानते हैं और यदि किसी को बवासीर की तकलीफ़ है और आप उसे नहीं बताते हैं तो पाप के भागी बनते हैं । चाहे आपका दुश्मन ही क्यों ना हो उसे भी बताना जरुर चाहिए । अतः आप ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने की कोशिश करें और उनके आशीर्वाद प्राप्त करें व अपनी समस्या से निजात पायें ।।

जय महामांईं की भक्तों

Monday, March 12, 2018

रामायण कथा

मित्रों,,,

आज आपको एक ऐसे कथा के बारे में बताने जा रहा हूँ,,

जिसका विवरण संसार के किसी भी पुस्तक में आपको नही मिलेगा,,
और ये कथा सत प्रतिशत सत्य कथा है,,

जय श्री राम, जय श्री राम,,

कथा का आरंभ तब का है ,,

जब बाली को ब्रम्हा जी से ये वरदान प्राप्त हुआ,,
की जो भी उससे युद्ध करने उसके सामने आएगा,,
उसकी आधी ताक़त बाली के शरीर मे चली जायेगी,,

और इससे बाली हर युद्ध मे अजेय रहेगा,,

सुग्रीव, बाली दोनों ब्रम्हा के औरस ( वरदान द्वारा प्राप्त ) पुत्र हैं,,

और ब्रम्हा जी की कृपा बाली पर सदैव बनी रहती है,,

बाली को अपने बल पर बड़ा घमंड था,,
उसका घमंड तब ओर भी बढ़ गया,,
जब उसने करीब करीब तीनों लोकों पर विजय पाए हुए रावण से युद्ध किया और रावण को अपनी पूँछ से बांध कर छह महीने तक पूरी दुनिया घूमी,,

रावण जैसे योद्धा को इस प्रकार हरा कर बाली के घमंड का कोई सीमा न रहा,,

अब वो अपने आपको संसार का सबसे बड़ा योद्धा समझने लगा था,,

और यही उसकी सबसे बड़ी भूल हुई,,

अपने ताकत के मद में चूर एक दिन एक जंगल मे पेड़ पौधों को तिनके के समान उखाड़ फेंक रहा था,,

हरे भरे वृक्षों को तहस नहस कर दे रहा था,,

अमृत समान जल के सरोवरों को मिट्टी से मिला कर कीचड़ कर दे रहा था,,

एक तरह से अपने ताक़त के नशे में बाली पूरे जंगल को उजाड़ कर रख देना चाहता था,,

और बार बार अपने से युद्ध करने की चेतावनी दे रहा था- है कोई जो बाली से युद्ध करने की हिम्मत रखता हो,,
है कोई जो अपने माँ का दूध पिया हो,,
जो बाली से युद्ध करके बाली को हरा दे,,

इस तरह की गर्जना करते हुए बाली उस जंगल को तहस नहस कर रहा था,,

संयोग वश उसी जंगल के बीच मे हनुमान जी,, राम नाम का जाप करते हुए तपस्या में बैठे थे,,

बाली की इस हरकत से हनुमान जी को राम नाम का जप करने में विघ्न लगा,,

और हनुमान जी बाली के सामने जाकर बोले- हे वीरों के वीर,, हे ब्रम्ह अंश,, हे राजकुमार बाली,,
( तब बाली किष्किंधा के युवराज थे) क्यों इस शांत जंगल को अपने बल की बलि दे रहे हो,,

हरे भरे पेड़ों को उखाड़ फेंक रहे हो,
फलों से लदे वृक्षों को मसल दे रहे हो,,
अमृत समान सरोवरों को दूषित मलिन मिट्टी से मिला कर उन्हें नष्ट कर रहे हो,,
इससे तुम्हे क्या मिलेगा,,

तुम्हारे औरस पिता ब्रम्हा के वरदान स्वरूप कोई तुहे युद्ध मे नही हरा सकता,,

क्योंकि जो कोई तुमसे युद्ध करने आएगा,,
उसकी आधी शक्ति तुममे समाहित हो जाएगी,,

इसलिए हे कपि राजकुमार अपने बल के घमंड को शांत कर,,

और राम नाम का जाप कर,,
इससे तेरे मन में अपने बल का भान नही होगा,,
और राम नाम का जाप करने से ये लोक और परलोक दोनों ही सुधर जाएंगे,,

इतना सुनते ही बाली अपने बल के मद चूर हनुमान जी से बोला- ए तुच्छ वानर,, तू हमें शिक्षा दे रहा है, राजकुमार बाली को,,
जिसने विश्व के सभी योद्धाओं को धूल चटाई है,,

और जिसके एक हुंकार से बड़े से बड़ा पर्वत भी खंड खंड हो जाता है,,

जा तुच्छ वानर, जा और तू ही भक्ति कर अपने राम वाम के,,

और जिस राम की तू बात कर रहा है,
वो है कौन,

और केवल तू ही जानता है राम के बारे में,

मैंने आजतक किसी के मुँह से ये नाम नही सुना,

और तू मुझे राम नाम जपने की शिक्षा दे रहा है,,

हनुमान जी ने कहा- प्रभु श्री राम, तीनो लोकों के स्वामी है,,
उनकी महिमा अपरंपार है,
ये वो सागर है जिसकी एक बूंद भी जिसे मिले वो भवसागर को पार कर जाए,,

बाली- इतना ही महान है राम तो बुला ज़रा,,
मैं भी तो देखूं कितना बल है उसकी भुजाओं में,,

बाली को भगवान राम के विरुद्ध ऐसे कटु वचन हनुमान जो को क्रोध दिलाने के लिए पर्याप्त थे,,

हनुमान- ए बल के मद में चूर बाली,,
तू क्या प्रभु राम को युद्ध मे हराएगा,,
पहले उनके इस तुच्छ सेवक को युद्ध में हरा कर दिखा,,

बाली-  तब ठीक है कल     के कल नगर के बीचों बीच तेरा और मेरा युद्ध होगा,,

हनुमान जी ने बाली की बात मान ली,,

बाली ने नगर में जाकर घोषणा करवा दिया कि कल नगर के बीच हनुमान और बाली का युद्ध होगा,,

अगले दिन तय समय पर जब हनुमान जी बाली से युद्ध करने अपने घर से निकलने वाले थे,,
तभी उनके सामने ब्रम्हा जी प्रकट हुए,,

हनुमान जी ने ब्रम्हा जी को प्रणाम किया और बोले- हे जगत पिता आज मुझ जैसे एक वानर के घर आपका पधारने का कारण अवश्य ही कुछ विशेष होगा,,

ब्रम्हा जी बोले- हे अंजनीसुत, हे शिवांश, हे पवनपुत्र, हे राम भक्त हनुमान,,
मेरे पुत्र बाली को उसकी उद्दंडता के लिए क्षमा कर दो,,

और युद्ध के लिए न जाओ,

हनुमान जी ने कहा- हे प्रभु,,
बाली ने मेरे बारे में कहा होता तो मैं उसे क्षमा कर देता,,
परन्तु उसने मेरे आराध्य श्री राम के बारे में कहा है जिसे मैं सहन नही कर सकता,,
और मुझे युद्ध के लिए चुनौती दिया है,,
जिसे मुझे स्वीकार करना ही होगा,,
अन्यथा सारी विश्व मे ये बात कही जाएगी कि हनुमान कायर है जो ललकारने पर युद्ध करने इसलिए नही जाता है क्योंकि एक बलवान योद्धा उसे ललकार रहा है,,

तब कुछ सोंच कर ब्रम्हा जी ने कहा- ठीक है हनुमान जी,,
पर आप अपने साथ अपनी समस्त सक्तियों को साथ न लेकर जाएं,,
केवल दसवां भाग का बल लेकर जाएं,,
बाकी बल को योग द्वारा अपने आराध्य के चरणों में रख दे,,
युद्ध से आने के उपरांत फिर से उन्हें ग्रहण कर लें,,

हनुमान जी ने ब्रम्हा जी का मान रखते हुए वैसे ही किया और बाली से युद्ध करने घर से निकले,,

उधर बाली नगर के बीच मे एक जगह को अखाड़े में बदल दिया था,,

और हनुमान जी से युद्ध करने को व्याकुल होकर बार बार हनुमान जी को ललकार रहा था,,

पूरा नगर इस अदभुत और दो महायोद्धाओं के युद्ध को देखने के लिए जमा था,,

हनुमान जी जैसे ही युद्ध स्थल पर पहुँचे,,
बाली ने हनुमान को अखाड़े में आने के लिए ललकारा,,

ललकार सुन कर जैसे ही हनुमान जी ने एक पावँ अखाड़े में रखा,,

उनकी आधी शक्ति बाली में चली गई,,

बाली में जैसे ही हनुमान जी की आधी शक्ति समाई,,

बाली के शरीर मे बदलाव आने लगे,
उसके शरीर मे ताकत का सैलाब आ गया,
बाली का शरीर बल के प्रभाव में फूलने लगा,,
उसके शरीर फट कर खून निकलने लगा,,

बाली को कुछ समझ नही आ रहा था,,

तभी ब्रम्हा जी बाली के पास प्रकट हुए और बाली को कहा- पुत्र जितना जल्दी हो सके यहां से दूर अति दूर चले जाओ,

बाली को इस समय कुछ समझ नही आ रहा रहा,,
वो सिर्फ ब्रम्हा जी की बात को सुना और सरपट दौड़ लगा दिया,,

सौ मील से ज्यादा दौड़ने के बाद बाली थक कर गिर गया,,

कुछ देर बाद जब होश आया तो अपने सामने ब्रम्हा जी को देख कर बोला- ये सब क्या है,

हनुमान से युद्ध करने से पहले मेरा शरीर का फटने की हद तक फूलना,,
फिर आपका वहां अचानक आना और ये कहना कि वहां से जितना दूर हो सके चले जाओ,

मुझे कुछ समझ नही आया,,

ब्रम्हा जी बोले-, पुत्र जब तुम्हारे सामने हनुमान जी आये, तो उनका आधा बल तममे समा गया, तब तुम्हे कैसा लगा,,

बाली- मुझे ऐसा लग जैसे मेरे शरीर में शक्ति की सागर लहरें ले रही है,,
ऐसे लगा जैसे इस समस्त संसार मे मेरे तेज़ का सामना कोई नही कर सकता,,
पर साथ ही साथ ऐसा लग रहा था जैसे मेरा शरीर अभी फट पड़ेगा,,,

ब्रम्हा जो बोले- हे बाली,

मैंने हनुमान जी को उनके बल का केवल दसवां भाग ही लेकर तुमसे युद्ध करने को कहा,,
पर तुम तो उनके दसवें भाग के आधे बल को भी नही संभाल सके,,

सोचो, यदि हनुमान जी अपने समस्त बल के साथ तुमसे युद्ध करने आते तो उनके आधे बल से तुम उसी समय फट जाते जब वो तुमसे युद्ध करने को घर से निकलते,,

इतना सुन कर बाली पसीना पसीना हो गया,,

और कुछ देर सोच कर बोला- प्रभु, यदि हनुमान जी के पास इतनी शक्तियां है तो वो इसका उपयोग कहाँ करेंगे,,

ब्रम्हा- हनुमान जी कभी भी अपने पूरे बल का प्रयोग नही कर पाएंगे,,
क्योंकि ये पूरी सृष्टि भी उनके बल के दसवें भाग को नही सह सकती,,

ये सुन कर बाली ने वही हनुमान जी को दंडवत प्रणाम किया और बोला,, जो हनुमान जी जिनके पास अथाह बल होते हुए भी शांत और रामभजन गाते रहते है और एक मैं हूँ जो उनके एक बाल के बराबर भी नही हूँ और उनको ललकार रहा था,,
मुझे क्षमा करें,,

और आत्मग्लानि से भर कर बाली ने राम भगवान का तप किया और अपने मोक्ष का मार्ग उन्ही से प्राप्त किया,,

तो बोलो,
पवनपुत्र हनुमान की जय,
जय श्री राम जय श्री राम,,

( कथा विशेष- श्री श्रीधर महाजन, सारंगढ़)

कृपया ये कथा जन जन तक पहुचाएं,
और पुण्य के भागी बने,,
जय श्री राम जय हनुमान,
🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻

पापमोचनी एकादशी

*🌹13 मार्च पापमोचनी एकादशी*🌹

🌹महाराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से चैत्र (गुजरात महाराष्ट्र के अनुसार फाल्गुन ) मास के कृष्णपक्ष की एकादशी के बारे में जानने की इच्छा प्रकट की तो वे बोले : ‘राजेन्द्र ! मैं तुम्हें इस विषय में एक पापनाशक उपाख्यान सुनाऊँगा, जिसे चक्रवर्ती नरेश मान्धाता के पूछने पर महर्षि लोमश ने कहा था ।’

*🌹मान्धाता ने पूछा* : भगवन् ! मैं लोगों के हित की इच्छा से यह सुनना चाहता हूँ कि चैत्र मास के कृष्णपक्ष में किस नाम की एकादशी होती है, उसकी क्या विधि है तथा उससे किस फल की प्राप्ति होती है? कृपया ये सब बातें मुझे बताइये ।

*🌹लोमशजी ने कहा* : नृपश्रेष्ठ ! पूर्वकाल की बात है । अप्सराओं से सेवित चैत्ररथ नामक वन में, जहाँ गन्धर्वों की कन्याएँ अपने किंकरो के साथ बाजे बजाती हुई विहार करती हैं, मंजुघोषा नामक अप्सरा मुनिवर मेघावी को मोहित करने के लिए गयी । वे महर्षि चैत्ररथ वन में रहकर ब्रह्मचर्य का पालन करते थे । मंजुघोषा मुनि के भय से आश्रम से एक कोस दूर ही ठहर गयी और सुन्दर ढंग से वीणा बजाती हुई मधुर गीत गाने लगी । मुनिश्रेष्ठ मेघावी घूमते हुए उधर जा निकले और उस सुन्दर अप्सरा को इस प्रकार गान करते देख बरबस ही मोह के वशीभूत हो गये । मुनि की ऐसी अवस्था देख मंजुघोषा उनके समीप आयी और वीणा नीचे रखकर उनका आलिंगन करने लगी । मेघावी भी उसके साथ रमण करने लगे । रात और दिन का भी उन्हें भान न रहा । इस प्रकार उन्हें बहुत दिन व्यतीत हो गये । मंजुघोषा देवलोक में जाने को तैयार हुई । जाते समय उसने मुनिश्रेष्ठ मेघावी से कहा: ‘ब्रह्मन् ! अब मुझे अपने देश जाने की आज्ञा दीजिये ।’

*🌹मेघावी बोले* : देवी ! जब तक सवेरे की संध्या न हो जाय तब तक मेरे ही पास ठहरो ।

*🌹अप्सरा ने कहा* : विप्रवर ! अब तक न जाने कितनी ही संध्याँए चली गयीं ! मुझ पर कृपा करके बीते हुए समय का विचार तो कीजिये !

*🌹लोमशजी ने कहा* राजन् ! अप्सरा की बात सुनकर मेघावी चकित हो उठे । उस समय उन्होंने बीते हुए समय का हिसाब लगाया तो मालूम हुआ कि उसके साथ रहते हुए उन्हें सत्तावन वर्ष हो गये । उसे अपनी तपस्या का विनाश करनेवाली जानकर मुनि को उस पर बड़ा क्रोध आया । उन्होंने शाप देते हुए कहा: ‘पापिनी ! तू पिशाची हो जा ।’ मुनि के शाप से दग्ध होकर वह विनय से नतमस्तक हो बोली : ‘विप्रवर ! मेरे शाप का उद्धार कीजिये । सात वाक्य बोलने या सात पद साथ साथ चलनेमात्र से ही सत्पुरुषों के साथ मैत्री हो जाती है । ब्रह्मन् ! मैं तो आपके साथ अनेक वर्ष व्यतीत किये हैं, अत: स्वामिन् ! मुझ पर कृपा कीजिये ।’

*🌹मुनि बोले* : भद्रे ! क्या करुँ ? तुमने मेरी बहुत बड़ी तपस्या नष्ट कर डाली है । फिर भी सुनो । चैत्र कृष्णपक्ष में जो एकादशी आती है उसका नाम है ‘पापमोचनी ।’ वह शाप से उद्धार करनेवाली तथा सब पापों का क्षय करनेवाली है । सुन्दरी ! उसीका व्रत करने पर तुम्हारी पिशाचता दूर होगी ।

ऐसा कहकर मेघावी अपने पिता मुनिवर च्यवन के आश्रम पर गये । उन्हें आया देख च्यवन ने पूछा : ‘बेटा ! यह क्या किया ? तुमने तो अपने पुण्य का नाश कर डाला !’

*🌹मेघावी बोले* : पिताजी ! मैंने अप्सरा के साथ रमण करने का पातक किया है । अब आप ही कोई ऐसा प्रायश्चित बताइये, जिससे पातक का नाश हो जाय ।

*🌹च्यवन ने कहा* : बेटा ! चैत्र कृष्णपक्ष में जो ‘पापमोचनी एकादशी’ आती है, उसका व्रत करने पर पापराशि का विनाश हो जायेगा ।

🌹पिता का यह कथन सुनकर मेघावी ने उस व्रत का अनुष्ठान किया । इससे उनका पाप नष्ट हो गया और वे पुन: तपस्या से परिपूर्ण हो गये । इसी प्रकार मंजुघोषा ने भी इस उत्तम व्रत का पालन किया । ‘पापमोचनी’ का व्रत करने के कारण वह पिशाचयोनि से मुक्त हुई और दिव्य रुपधारिणी श्रेष्ठ अप्सरा होकर स्वर्गलोक में चली गयी ।

*🌹भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं* राजन् ! जो श्रेष्ठ मनुष्य ‘पापमोचनी एकादशी’ का व्रत करते हैं उनके सारे पाप नष्ट हो जाते हैं । इसको पढ़ने और सुनने से सहस्र गौदान का फल मिलता है । ब्रह्महत्या, सुवर्ण की चोरी, सुरापान और गुरुपत्नीगमन करनेवाले महापातकी भी इस व्रत को करने से पापमुक्त हो जाते हैं । यह व्रत बहुत पुण्यमय है ।

*🌹व्रत खोलने की विधि* :   द्वादशी को सेवापूजा की जगह पर बैठकर भुने हुए सात चनों के चौदह टुकड़े करके अपने सिर के पीछे फेंकना चाहिए । ‘मेरे सात जन्मों के शारीरिक, वाचिक और मानसिक पाप नष्ट हुए’ - यह भावना करके सात अंजलि जल पीना और चने के सात दाने खाकर व्रत खोलना चाहिए ।

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Saturday, March 10, 2018

लहसुन को दूध में उबालकर पीने के फायदे

लहसुन को दूध में उबालकर पीने से जो हुआ वो बेहद चौंकाने वाला था

लहसुन सिर्फ खाने के स्वाद को ही नहीं बढ़ाता बल्कि शरीर के लिए एक औषद्यि की तरह मन गया है। इसमें विटामिन, खनिज, लवण और फॉस्फोरस, आयरन व विटामिन ए,बी व सी भी पाए जाते हैं। लहसुन शरीर की रोग प्रतिरोधी क्षमता को बढ़ाता है। भोजन में लहसुन का किसी भी तरह से इस्तेमाल शरीर के लिए बेहद फायदेमंद होता है। दूध हमारी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है। इसे पीने से कई तरह की बीमारियां दूर होती है और हड्डियां मजबूत बनती है। लेकिन अगर हम दूध में लहसुन मिलाकर पीते है तो इसके फायदे कई गुना तक बढ़ जाते हैं।
आजकल लोगों के जीने का उपाय पहले की अपेक्षा बहुत बदल गया है। आज के समय में खान-पान में लापरवाही के कारण कमजोरी के साथ-साथ स्वास्थ्य सम्बन्धी व भी कई सारी समस्याएँ आने लगती है, आज हम आपको दूध के साथ लहसुन के सेवन से होने वाले 10 बड़े फ़ायदों के बारे में बताएँगे। आजकल ज़्यादातर लोगो के घुटनों में दर्द,  सियाटिका की समस्या रहती है, कभी कभी तो ये दर्द इतना बढ़ जाता है की चलने फिरने में दिक्कत आने लगती है, कभी कभी तो इस दर्द के कारण घुटनो में सूजन की समस्या भी हो जाती है। पर आज हम आपको लहसुन और दूध का ऐसा तरीका बताने जा रहे है जिनके प्रयोग से घुटने का दर्द, सियाटिका अच्छा हो जाता है, यही नही इस उपाय से कोलेस्ट्रॉल, कब्ज, कमर दर्द निवारक, कैंसर, अपच, मुंहासों, हृदय धमनियों की ब्लॉकेज, और माइग्रेन आदि जैसी समस्याओं से ही निजात मिलती है।
लहसुन वाला दूध बनाने की विधि
इसके लिए आपको एक गिलास दूध में थोड़ा सा पानी और लहसुन पीसकर डाल देना है और रात को खाने के बाद सोने से पहले इस दूध को पीना है। इसे पीने से कौन-कौन से रोग ठीक होते हैं आइए जानते हैं।
दूध और लहसुन के 10 फायदे :
सियाटिका का दर्द : 4 लहसुन की कलियाँ और 200 ml दूध, सबसे पहले लहसुन को काट कर दूध में डाल दें। दूध को कुछ मिनट तक उबालें। उबालने के बाद इसे मीठा करने के लिए थोडा शहद मिला लें | इस दूध का रोजाना सेवन करें जब तक दर्द खत्म न हो जाये |
कोलेस्ट्रॉल : दूध और लहसुन का मिश्रण आपकी हृदय धमनियों की रूकावट यानि उसमें जमे हुए कोलेस्ट्रॉल को खत्म करने में मदद करता है और हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या दूर होती है।
कब्ज : आयुर्वेद के अनुसार यह प्राकृतिक पेय  दूध और लहसुन का मिश्रण आंतों को सक्रिय कर कब्ज की समस्या को दूर करता है और गुदा मार्ग को भी नर्म बनाता है।
अपच : दूध और लहसुन का यह मिश्रण पाचक रसों के निर्माण में अहम भूमिका निभाता है जिससे एसिडिटी और अपच जैसी समस्याओं में लाभ होता है।
जोड़ों का दर्द : इस दूध में शोथरोधी तत्व होते हैं, जिसके कारण यह जोड़ों के दर्द में विशेष रूप से फायदेमंद साबित होता है। अगर आपके घुटनों में दर्द की समस्या रहती है तो इसके लिए नियमित रूप से 1 गिलास दूध में 3-4 लहसून की कलियां डालकर उबाल कर पिए। इसे पीने से दर्द को राहत मिलती है।
माइग्रेन : माइग्रेन के मरीजों के लिए दूध और लहसुन का यह सम्म‍िश्रण बेहद लाभदायक है। यह सामान्य सिरदर्द से भी निजात दिलाने में मददगार है।
मुंहासों : मुंहासों की समस्या होने पर लहसुन वाला दूध पीना बहुत फायदेमंद होता है। रोज एक गिलास लहसुन वाला दूध पीने से मुंहासे पूरी तरह से ठीक हो जाते हैं।
हृदय धमनियों की ब्लॉकेज : दूध और लहसुन का यह मिश्रण हृदय धमनियों की रूकावट यानि उसमें जमे हुए ब्लॉकेज को खत्म कर देता है और हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या दूर करता है।
कमर दर्द निवारक : जिन लोगों को कमर दर्द की समस्या है उनके लिए लहसुन वाला दूध फायदेमंद होता है। लहसुन दर्द से राहत दिलाने में मदद करता है।
कैंसर : भविष्य में कैंसर ना हो उसके लिए दूध और लहसुन का यह मिश्रण बहुत फायदेमंद है। यह सामान्य त्वचा विकार भी तुरंत ठीक कर देता है।

मुँह सूखने के घरेलू नुस्खे

मुंह सूखने के घरेलू नुस्खे

मुंह का सूखना एक ऐसी समस्या है जिससे काफी लोग उनकी जानकारी के बिना ही ग्रस्त रहते हैं। जैसा कि नाम से ही पता चलता है, इस स्थिति के अंतर्गत मुंह सूख जाता है एवं इसे चिकित्सकीय भाषा में ज़ेरोस्टोमिया (xerostomia) कहा जाता है। मुंह का सूखापन थूक लार का उत्पादन कम होने या खराब गुणवत्ता की लार के उत्पादित होने की वजह से होता है, जिसकी वजह से मुंह में पर्याप्त लुब्रिकेशन (lubrication) नहीं मिल पाता। मुंह में लार का उत्पादन बिल्कुल बंद हो जाना इस समस्या का काफी गंभीर चरण होता है, जिसमें आपको त्वरित चिकित्सकीय सहायता की आवश्यकता पड़ती है। हालांकि यदि यह स्थिति ज़्यादा गंभीर नहीं है तो लक्षणों के दिखते ही घरेलू नुस्खों का इस्तेमाल ही अच्छा रहता है।

नीचे कुछ प्रभावी घरेलू नुस्खों के बारे में बताया जा रहा है जो मुंह के सूखेपन की समस्या को दूर करने में काफी कारगर साबित होते हैं।

मुंह का सूखापन दूर करने के लिए अदरक (Ginger can help in treating dry mouth)

मुंह के छाले कम करने के लिए उत्तम घरेलू उपचार

अदरक मुंह का सूखापन दूर करने के प्रभावी नुस्खों में से एक साबित हो सकता है।  अदरक लार ग्रंथि को कार्यशील बनाने में सहायता करता है एवं साँसों की बदबू, जो मुंह के सूखेपन से जुड़ी एक आम समस्या है, को भी दूर करता है।

नियमित अंतराल में अदरक के छोटे टुकड़े को चबाते रहें।  आप किसे हुए अदरक में थोड़ा सा नमक एवं नींबू मिलाकर एवं इन्हें सूरज की रोशनी में सुखाकर स्वादिष्ट सूखे अदरक के टुकड़े बना सकते हैं। मुंह का सूखापन दूर करने के अलावा यह आपकी भूख बढ़ाने में भी सहायता करता है।

मुंह का सूखापन दूर करने के लिए सौंफ
[07/03 9:42 pm] ‪+91 99889 91397‬: सौंफ अपने मीठे स्वाद एवं सुगंध के लिए जाना जाता है। दिन में 4-5 बार सौंफ चबाने या केवल इसे अपने मुंह में रखने भर से लार के उत्पादन एवं मुंह के सूखेपन के लक्षणों से लड़ने में सहायता मिलती है।

मुंह के सूखेपन के लिए अंगूर के बीज का तेल (Grape seed oil for dry mouth)

अंगूर के बीज का तेल भी मुंह के सूखेपन की समस्या से लड़ने में काफी प्रभावी साबित होता है। रात को अपने दांत एवं मुंह साफ़ करने के बाद अपनी उँगलियों पर यह तेल थोड़ा सा लें एवं अपनी जीभ तथा गाल के अंदरूनी हिस्से पर लगाएं। अतिरिक्त लार को थूककर बाहर निकाल दें पर मुंह ना धोएं। अगली सुबह अपने दांतों एवं मुंह को अच्छे से साफ़ कर लें।

मुंह के सूखेपन के लिए एलो वेरा (Aloe vera helps in treating dry mouth)

एलो वेरा एक और सामान्य घरेलू नुस्खा है जिसकी मदद से आप मुंह के सूखेपन की समस्या को दूर कर सकते है।  इसके लिए दिन में 3-4 बार अपने मुंह को एलो वेरा के रस से कुल्ला करें। आप अपनी जीभ एवं मुंह पर एलो वेरा का रस भी लगा सकते हैं तथा इसे एक घंटे के लिए छोड़कर पानी से धो सकते हैं।  रोज़ाना दिन में दो से तीन बार एलो वेरा का रस पीना भी काफी फायदेमंद होता है।

लार के उत्पादन के लिए दालचीनी (Cinnamon can increase saliva secretion)

दालचीनी में लार का उत्पादन बढ़ाने की काबिलियत होती है, जिसके फलस्वरूप आपके मुंह के सूखेपन की समस्या दूर होती है।  दालचीनी का स्वाद साँसों की बदबू से लड़ने में सहायता करता है।  दालचीनी के टुकड़े चबाने से लार का उत्पादन बढ़ता है एवं मुंह का सूखापन दूर होता है।
मुंह के सूखेपन के लिए तुलसी के पत्ते (Tulsi leaves for dry mouth)

तुलसी के पत्तों में काफी मात्रा में औषधीय गुण होते हैं तथा यह मुंह के सूखेपन के लक्षणों को ठीक करने में भी काफी मददगार साबित होते हैं।  तुलसी के कुछ पत्ते लें एवं इन्हें धोकर चबाएं। एक बार में अधिक पत्तियां ना चबाएं।  लार का उत्पादन बनाये रखने के लिए नियमित अंतराल में तुलसी की