Monday, November 6, 2017

मौसमी खाँसी के लिये सेंधा नमक

*मौसमी खाँसी के लिये सेंधा नमक*
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सेंधे नमक की लगभग एक सौ ग्राम डली को चिमटे से पकड़कर आग पर , गैस पर या तवे पर अच्छी तरह गर्म कर लें . जब लाल होने लगे तब गर्म डली को तुरंत आधा कप पानी में डुबोकर निकाल लें और नमकीन गर्म पानी को एक ही बार में पी जाएँ . ऐसा नमकीन पानी सोते समय लगातार दो - तीन दिन पीने से खाँसी , विशेषकर बलगमी खाँसी से आराम मिलता है . नमक की डली को सुखाकर रख लें एक ही डली का बार बार प्रयोग किया जा सकता है .

आंवले के फायदे

आंवले –
   आंवले को आयुर्वेद में गुणों की खान माना गया है। यह कई बीमारियों को दूर करता है। इसका अपना पौष्टिक महत्व भी है। संतरे से बीस गुना ज्यादा विटामिन सी इसमें पाया जाता हैं। आंवले को गूजबेरी के नाम से भी जाना जाता हैं। आंवले का सबसे बड़ा गुण यह है कि इसे पकाने के बाद भी इसमें मौजूद विटामिन सी खत्म नहीं होता।आज हम आपको बताने जा रहे हैं आंवले के कुछ ऐसे ही पौष्टिक गुणों के बारे में......

-आंवला मोतियाबिंद की परेशानी में फायदेमंद रहता है।

- सुबह नाश्ते में आंवले का मुरब्बा खाने से आप स्वस्थ बने रह सकते हैं।

- आंवला हमारी आंखों के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है।

- आंवला हमारे पाचन तन्त्र और हमारी किडनी को स्वस्थ रखता है।

- आंवला अर्थराइटिस के दर्द को कम करने में भी सहायक होता है।

- आंवला खाने से सर्दी, खांसी, जुकाम जैसी बीमारियों से बचा जा सकता है।

- दिल को सेहतमंद रखने के लिए रोजा आंवला खाने की आदत डालें। इससे आपके दिल की मांसपेशियां मजबूत होंगी।

- आंवला बालों को मजबूत बनाता है, इनकी जड़ों को मजबूत करता है और बालों का झडऩा भी काफी हद तक रोकता है।

- आंवला खाने से कब्ज दूर होती है। यह डायरिया जैसी परेशानियों को दूर करने में बहुत फायदेमंद है।

- एसीडिटी की समस्या है, तो एक ग्राम आंवला पाउडर और थोड़ी-सी चीनी को एक गिलास पानी या दूध में मिलाकर लें।

- आंवला खाने को अच्छी तरह पचाने में मदद करता है, जिससे आपको खाने के तमाम न्यूट्रिएंट्स मिलते हैं

अरुचि के लिये मुनक्का, हरड़ और चीनी

*अरुचि के लिये मुनक्का हरड़ और चीनी*
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भूख न लगती हो तो बराबर मात्रा में मुनक्का ( बीज निकाल दें ) , हरड़ और चीनी को पीसकर चटनी बना लें . इसे पाँच छह ग्राम की मात्रा में ( एक छोटा चम्मच ) , थोड़ा शहद मिला कर खाने से पहले दिन में दो बार चाटें .

Friday, November 3, 2017

खांसी जुकाम का प्रयोग

🌺🙏🏻🌺 *!! खांसी जुकाम का प्रयोग !!* 🌺🙏🏻🌺

......एक ख़ास दवा, जब कभी जुकाम हो जाए या खांसी हो जाए कैसी भी तो आप थोडा सा अदरक देशी घी में सुन्हेरा होने तक भूने और आंच से उतार कर घी अलग कर ले फिर अदरक में बहुत थोडा सा गुड हाथ से मसल कर डाले और जितना गरम खा सकते है खा ले और एक घंटे तक पानी ना पिए. दो बार में ही हमेशा के लिए जुकाम और खांसी ठीक हो जाएगी. यह नुस्खा बहुत बार अपनाया हुआ है और १००% खरा उतरा है.!!

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मोटापा नाशक चूर्ण

आयुर्वेदिक मोटापनाशक चूर्ण

पोदीना पंचाग 100 ग्राम
दारू हल्दी 80 ग्राम
मेथी 50 ग्राम
करंजी 20 ग्राम
आवला 100 ग्राम
गिलोय 20 ग्राम
कुटकी 50 ग्राम
बहेड़ा 30 ग्राम
कालीजीरी 50 ग्राम
चिरायता 20 ग्राम
भूमि आवला 50 ग्राम
हरड़ 150 ग्राम
शुद्ध गुगुल 10 ग्राम
बाकुची 10 ग्राम
जीरा 50 ग्राम
शुद्ध शिलाजीत 10 ग्राम
दालचीनी 30 ग्राम
सोंफ 50 ग्राम
धनिया  50 ग्राम
काली मिर्च 20 ग्राम
जीरा 50 ग्राम

सभी को कूट पीस कर चूर्ण बना ले और सुबह शाम एक एक चमच्च गुनगुने पानी से ले
5 से 10 किलो वजनकम हो जाएगा 30 दिन से 40 दिन में । इसको काढ़ा बनाकर भी लिया जा सकता है जिससे इसका और भी बेहतर रिजल्ट आयेगा ।

Tuesday, October 31, 2017

पुष्टिवर्धक लड्डू (पाक) और बर्फी

पुष्टिवर्धक लड्डू (पाक)

विधि : उड़द, गेहूँ, जौ व चने का 500-500 ग्राम आटा घी में भून लें । 2 किलो शक्कर की चाशनी में भूने हुए आटे को डाल के छोटे-छोटे लड्डू बना लें । आवश्यकतानुसार पिस्ता, बादाम, इलायची डाल दें । सुबह-शाम 1-1 लड्डू अथवा अपनी पाचनशक्ति के अनुकूल मात्रा में खूब चबा-चबाकर खायें । ऊपर से एक गिलास मीठा दूध पी लें ।

लाभ : यह शक्ति, बल व वीर्य वर्धक, चुस्ती-फुर्ती देनेवाला और शरीर को सुडौल बनानेवाला है । सेवनकाल में आसन-व्यायाम नित्य करें । अधिक मसालेदार, तले व खट्टे पदार्थों (विशेषरूप से इमली एवं अमचूर) से परहेज रखें ।

  

पौष्टिक गुणों से युक्त तिल की बर्फी

1-1 कटोरी तिल व मूँगफली अलग-अलग सेंक लें व एक सूखा नारियल-गोला किस लें । 500 ग्राम गुड़ की दो तार की चाशनी बनाकर इन सबकी बर्फी जमा लें । स्वादिष्ट व पौष्टिक गुणों से युक्त यह बर्फी शीत ऋतु में बहुत लाभकारी है ।

Friday, October 27, 2017

आयुर्वेदिक पाक/अवलेह भाग

*!! आयुर्वेदिक पाक/ अवलेह भाग १ !!*

           *!! हरिद्रा खण्ड !!*

*गुण व उपयोग : -* हरिद्रा खण्ड शीतपित्त, उदर्द, चकते, कण्डु, खुजली, ‌‌‌एग्जिमा-छाजन, जीर्णज्वर, कृमि, पांडुरोग, शाथ आदि रोगों में उत्तम लाभ करता है ! यह मृदु विरेचक भी है !!

*मात्रा व अनुपान : -*
६ से १० ग्राम, पानी के साथ !!

          *!! हरीतकी खण्ड !!*

*गुण व उपयोग : -* हरीतकी खण्ड अम्लपित्तजन्य दर्द व अम्लपित्त, अर्श, काष्ठगत विकार, वातरोग, कटिशूल में उत्तम लाभ करता है ! यह उत्तम विरेचक भी है !!

*मात्रा व अनुपान : -*
    ६ से १० ग्राम, बलानुसार गर्म दूध या पानी के साथ !!

          *!! सौभग्य शुण्ठीपाक !!*

*गुण व उपयोग : -* सौभग्य शुण्ठीपाक बल एवं आयु की वृद्धि करता है ! पुरूषों के लिए भी बल-वर्द्धक है ! स्त्रियों के लिए अमृत-तुल्य लाभकारी है ! इसके सेवन से योनिविकार, प्रदर, कष्टार्तव आदि रोग नष्ट होते हैं ! प्रसूता स्त्रियों के लिए विशेष लाभप्रद है !!

*मात्रा व अनुपान : -* ६ से २० ग्राम, दिन में दो बार !!

           *!! सुपारी पाक !!*

*गुण व उपयोग : -* सुपारी पाक के सेवन से स्त्रियों की योनि से होने वाले विभिन्न प्रकार के स्राव (प्रदर) नष्ट होते हैं ! बन्ध्यत्व दोष को नष्ट करके उन्हे सन्तानोपत्ति योग्य बना देता है ! पुरूषों के शीघ्रपतन व शुक्रपतन एवं शुक्रमेह रोग में अत्यन्त गुणकारी है ! गर्भाशय को शक्ति देता है व योनि को संकुचित करता है !!
       विशेषतय: प्रसूता स्त्रियों के लिए अतिशय गुणकारी है ! इसके सेवन से प्रौढ़ा स्त्री भी कान्तियुक्त हो जाती है ! प्रदर रोग के कारण होने वाले कमर दर्द, सिर दर्द रहना, कमजोरी आदि में उत्तम लाभ करता है ! स्त्रियों में अमृततुल्य लाभ करता है !!

*मात्रा व अनुपान : -* १० से २० ग्राम, सुबह-शाम, गाय के दूध के साथ !!

         *!! व्याघ्री हरीतकी !!*

*गुण व उपयोग : -* व्याघ्री हरीतकी खाँसी, श्वास रोग, बद्धकोष्ठ, गले की खराबी आदि में उत्तम लाभकारी है ! कफ व वात प्रधान रोगों में इससे विशेष लाभ होता है ! कास व श्वास रोगी के लिए यह अमृत के समान लाभ प्रदान करता है !!
*मात्रा व अनुपान : -* ६ से १० ग्राम, दिन में दो बार, पानी या दूध के साथ !!

         *!! वासाहरीतकी अवलेह !!*

*गुण व उपयोग : -* वासाहरीतकी अवलेह खाँसी, क्षय, श्वास, रक्तपित्त, प्रतिश्याय, रक्तस्राव, रक्त मिश्रित दस्त, बवासीर, रक्तप्रदर, हृदय की कमजोरी, कब्ज आदि में लाभदायक है ! यह विशेष रूप से श्वास नलिका, खाँसी, कफ रोग आदि में लाभ करता है !!

*मात्रा व अनुपान : -* ६ से १० ग्राम अवलेह चटाकर ऊपर से गाय का गर्म दूध पीना चाहिए !!

            *!! वासावलेह !!*

*गुण व उपयोग : -* वासावलेह के सेवन से खाँसी, श्वास, रक्तप्रदर, रक्तपित्त, खूनी बवासीर, रक्तमिश्रित दस्त, पुरानी कफज खाँसी, श्वास-नलिका की सूजन, न्यूमोनिया, प्लूरिसी, इन्फ्लुएन्जा के बाद की खाँसी आदि में लाभ मिलता है !!

*मात्रा व अनुपान : -* ६ से १० ग्राम, दिन में दो बार शहद या रोगानुसार अनुपान के साथ !!

        *!! लऊक सपिस्ताँ !!*

*गुण व उपयोग : -* लऊक सपिस्ताँ के सेवन से कठिन से कठिन नजला, जुकाम आदि रोग शीघ्र नष्ट होते हैं ! कास-श्वास रोग में भी उत्तम ‌‌‌लाभकारी है !!

*मात्रा व अनुपान : -* ६ से १० ग्राम, ‌‌‌प्रात: शाम चाटकर ऊपर से सुखोष्ण पानी पी लें !!

          *!! मूसली पाक !!*

*गुण व उपयोग : -* मूसली पाक अत्यन्त पौष्टिक, बल-वीर्य व कामशक्ति-वर्द्धक और नंपुसकता- नाशक है ! इसके सेवन से धातु- दौर्बल्य नष्ट होकर शरीर स्वस्थ, कान्तियुक्त व बलशाली बनता है ! स्त्रियों के प्रदर रोग व पुरूषों के वीर्य दोष को नष्ट करने में यह अतिउत्तम है !!

*मात्रा व अनुपान : -* ६ से १० ग्राम, दूध या पानी के साथ !!

        *!! माजनू फलासफा !!*

*गुण व उपयोग : -* माजनू फलासफा दिल, दिमाग, वातनाड़ियों व स्नायु मण्डल की कमजोरी में उत्तम लाभ प्रदान करता है ! इसके सेवन से वातरोगों में विशेष लाभ मिलता है !!

*मात्रा व अनुपान : -* ५ से ६ ग्राम !!

           *!! मदनानन्द मोदक !!*

*गुण व उपयोग : -* मदनानन्द मोदक के उपयोग से बल- वीर्य की वृद्धि, रति- शक्ति की वृद्धि व स्तम्भन शक्ति प्राप्त होती है ! यह अपस्मार, ज्वर, उन्माद क्षय, वातव्याधि, कासव्याधि, कासश्वास, शोथ, भगन्दर, अर्श, ग्रहणी, बहुमूत्र, प्रमेह, शिरोरोग, अरूचि व वातिक- पैतिज और कफज रोग आदि में लाभ प्रदान करता है ! यह संग्रहणी व मन्दाग्नि की उत्तम दवा है ! इसका सेवन वैद्य की देखेरख में ही करना चाहिए !!

*मात्रा व अनुपान : -* ३ से ६ ग्राम, दूध या पानी के साथ !!

             *!! भार्गी गुड़ !!*

*गुण व उपयोग : -* भार्गी गुड़ पुराने कास- श्वास वाले रोगी के लिए अमृत के समान लाभ करता है, क्योंकि इसका प्रभाव वातवाहिनी व कफवाहिनी नाड़ियों पर विशेष होता है !!

*मात्रा व अनुपान : -* १० से २० ग्राम, दिन में दो बार !!

        *!! ब्राह्मी रसायन !!*

*गुण व उपयोग : -* ब्राह्मी रसायन खाँसी, दमा, क्षय, कब्जियत आदि में लाभ करती है ! इसके सेवन से शरीर व दिमाग की कमजोरी दूर हो कर आयु, बल, कान्ति व स्मरण शक्ति की वृद्धि होती है !!

*मात्रा व अनुपान : -* १० ग्राम, गाय के दूध या पानी के साथ !!

         *!! नारिकेल खण्ड पाक !!*

*गुण व उपयोग : -* नारिकेल खझउ पाक के सेवन से पुरूषत्व निद्रा व बल की वद्धि होती है ! और यह अम्लपित्त, परिणामशूल, शुक्र-क्षयादि, अपचन, उदरशूल, खट्टी डकारें व क्षय आदि रोगों मे विशेष लाभकारी है ! इसके सेवन से पौरूष की बढ़ोत्तरी हो कर शरीर को बल मिलता है ! यह शीतवीर्य, स्निग्ध व पौष्टिक है ! अम्लपित्त रोग में यह विशेष लाभकारी है !!

*मात्रा व अनुपान : -* १० से २० ग्राम, दिन में दो बार दूध या पानी के साथ !!

          *!! बाहुशाल गुड़ !!*

*गुण व उपयोग : -* बाहुशाल गुड़ के सेवन से बवासीर, गुल्म, पीनस, पांडु, हलीमक, उदर रोग, मन्दाग्नि, ग्रहणी, क्षय, आमवात, संग्रहणी, प्रमेह प्रतिश्याय आदि रोगों में उत्तम लाभ मिलता है ! यह बल, मेधा व कान्तिवर्द्धक है !!

*मात्रा व अनुपान : -* १०- १० ग्राम, दिन में दो बार, दूध या पानी के साथ !!

          *!! बादाम पाक !!*

*गुण व उपयोग : -* बादाम पाक बल, वीर्य व औज की वृद्धि करता है ! यह रस- रक्तादि धातुओं को बढ़ाकर शरीर को कान्तियुक्त बना देता है ! ध्वजभंग, नंपुसकता, स्नायु दौर्बल्य में बहुत लाभदायक है ! मस्तिष्क, हृदय की कमजोरी व शुक्र- क्षय, पित्त-विकार, नेत्र और शिरोरोग में लाभकारी है ! इसके सेवन से शरीर पुष्ट होता है ! यह सर्दियों में सेवन करने योग्य उत्तम पुष्टर्इ है ! दिमागी काम करने वाले व सिर दर्द वाले को इस पाक का सेवन अवश्य करना चाहिए !!

*मात्रा व अनुपान : -* १० से २० ग्राम, गाय के दूध या पानी के साथ !!

         *!! धात्री रसायन !!*

*गुण व उपयोग : -* धात्री रसायन कास, श्वास, क्षय, दुर्बलता, फेफड़ों की दुर्बलता, खाँसी, स्नायविक दुर्बलता आदि में उत्तम लाभ करता है ! यह पौष्टिक, वीर्यवर्द्धक रसायन व उत्तम बाजीकरण है ! यह आमाशय, मस्तिष्क, हृदय व आँतों को बलवान बनाता है ! एवं जठराग्नि को प्रदीप्त करता है !!

*मात्रा व अनुपान : -* ४ से ६ ग्राम, सुबह भोजन से ३ घण्टा पूर्व गाय के दूध के साथ, रात्रि को सोने से आधा घण्टा पहले !!

          *!! दाड़िमावलेह !!*

*गुण व उपयोग : -* दाड़िमावलेह पित्त, क्षय, रक्तपित्त, प्यास, अतिसार, संगहणी, दुर्बलता, नेत्ररोग, शिरोरोग, दाह, अम्लपित्त, धातुस्राव, अरूचि आदि रोगों में लाभदायक है ! इसके सेवन से हृदय व मस्तिष्क को ताकत मिलती है !!

*मात्रा व अनुपान : -* ६ से १० ग्राम, दिन में दो से तीन बार !!

            *!! जीवन कल्प !!*

*गुण व उपयोग : -* जीवन कल्प के सेवन से रक्ताल्पता, आल्स्य, कामला, श्वास, कास, शारीरिक क्षीणता आदि विकार नष्ट हो कर शरीर हृष्ट-पुष्ट व बलवान बनता है ! शीतकाल में इसका सेवन विशेष लाभकारी होता है !!

*मात्रा व अनुपान : -* ६ से १० ग्राम, आवश्यकतानुसार दूध के साथ !!

          *!! जीरकादि अवलेह !!*

*गुण व उपयोग : -* जीरकादि अवलेह प्रमेह, प्रदर, ज्वर, दुर्बलता, मन्द-मन्द ज्वरांश बना रहना, भूख कम या बिल्कुल न लगना, अरूचि, श्वास, तृषा, दाह व यक्ष्मा आदि रोगों में लाभदायक है !!

*मात्रा व अनुपान : -* १० ग्राम, दिन में दो बार ठण्डे पानी या दूध के साथ !!

          *!! छुहारा पाक !!*

*गुण व उपयोग : -* छुहारा पाक शरीर को बल देने वाला है ! इसके सेवन से रति शक्ति में वृद्धि होती है ! व स्वप्नदोषादि रोग नष्ट होते हैं ! इससे शुक्रक्षीणता के कारण पुरूष की व रजोदोष के कारण स्त्री की कमजोरी दूर होती है !!

*मात्रा व अनुपान : -* १० से २० ग्राम, दूध या पानी के साथ !!

*!! आयुर्वेदिक अर्क भाग २ !!*

         *!! गिलोय अर्क !!*

*गुण व उपयोग : -* इसके सेवन से आमवात, वातरक्त, प्रमेह, रक्तपित्त, जीर्णज्वर, पित्तज्वर, रक्त की गर्मी के विकार, मधुमेह आदि रोगों में उत्तम लाभ मिलता है ! मधुमेह के रोगियों को पानी पीने के दौरान २० ग्राम गिलोय अर्क को मिलाकर सेवन करने से कुछ समय में पेशाब में चीनी की मात्रा कम हो जाती है !!

*मात्रा व अनुपान : -*
    २० से ४० ग्राम, दिन में दो बार पानी के साथ !!

        *!! अजवायन अर्क !!*

*गुण व उपयोग : -* यह मन्दाग्नि, उदरशूल, अजीर्ण, गुल्म, आमदोश, अरूचि, वायु व कफ विकार आदि में उत्तम लाभ प्रदान करता है !!

*मात्रा व अनुपान : -* १० से ५० ग्राम, दिन में २-३  बार !!

        *!! गोखमुण्डी अर्क !!*

*गुण व उपयोग : -* यह फोड़े-फुंसी, खाज-खुजली, दाद, चकत्ते निकलना, विसर्प, कुष्ठ आदि में लाभकारी है ! चेहरे के काले दाद, झार्इ आदि में इसका सेवन किया जाता है ! यह खून साफ करता है ! सप्त धातुओं में प्रविष्ट हुए विष को नष्ट करता है !!

*मात्रा व अनुपान : -* २० से ५० ग्राम, दिन-रात में चार बार अकेले या बराबर मात्रा में पानी मिलाकर पिलाएं !!

         *!! चन्दन अर्क !!*

*गुण व उपयोग : -* यह कुछ अधिक शीतवीर्य है ! इसके सेवन से पेशाब में जलन हो, पेशाब रूक-रूक कष्ट के साथ आता हो, पेशाब के साथ रक्त आता हो या नाक से खून आता हो तो इस अर्क में ५ ग्राम मिश्री मिलाकर पिलाने से पेशाब बिना किसी दर्द से साफ हाने लगता है ! तथा रक्त का आना भी बन्द हो जाता है !!

*मात्रा व अनुपान : -* २० से ४० ग्राम, दिन में दो बार !!

             *!! ब्राह्मी अर्क !!*

*गुण व उपयोग : -* इसके सेवन से याददाशत, कमजोरी, अपस्मार, उन्माद, मूच्र्छा, हिस्टीरिया, स्मरणशक्ति की कमी, दिमाग में थकावट या खुश्की रहना, नींद कम आना, मानसिक अशान्ति व भ्रम बना रहना, चक्कर आना आदि में विशेष लाभ मिलता है ! याददाश्त बढ़ाने में यह गुणकारी है ! आँखों के आगे अंधेरा-सा मालूम पड़ना या चक्कत आदि रोगों में इस अर्क को दूध के साथ मिलाकर या अन्य औषधीयों के साथ अनुपान रूप में लेने से शीघ्र एवं उत्तम लाभ होता है !!

*मात्रा व अनुपान : -* २० से ४० ग्राम, दिन-रात में दो से चार बार या औषधीयों के अनुपान रूप में प्रयोग करें !!

        *!! पुनर्नवा अर्क !!*

*गुण व उपयोग : -* इसके सेवन से कामला, पांडु, हलीमक, उदर रोग, मूत्र कृच्छ, प्रमेह, शोथ, रक्तपित्त, वृक्क विकार, यकृत शोथ, गर्भाशय शोथ आदि रोगों में विशेष लाभमिलता है ! गर्भाशय शोथ में इसके साथ बराबर मात्रा में दशमूल अर्क मिलाकर देने से उत्तम लाभ होता है !!

*मात्रा व अनुपान : -* २० से ५० ग्राम, दिन में दो से तीन बार !!

         *!! त्रिफला अर्क !!*

*गुण व उपयोग : -* इसके सेवन से प्रमेह, कामला, पेट फूला हुआ रहना, मधुमेह, स्वप्नदोष, आमवात, मेदावृद्धि, शरीर से पसीना निकलना तथा पसीने से दुगन्ध आना, पांडुरोग, वातरोग, वातरक्त, खाज-खुजली, पामा, कुष्ठ, कब्ज आदि रोगों में विशेष लाभ मिलता है !!

*मात्रा व अनुपान : -* २० से ८० ग्राम, दिन-रात में ३ से ४ बार आवश्यकतानुसार दें !!

              *!! दशामूल अर्क !!*

*गुण व उपयोग : -* इसके सेवन से प्रसूत विकारों, हृदय रोग, दिमागी कमजोरी, शोथ रोग, गुल्म, उदर रोग, मानसिक अशान्ति, अनिद्रा, हृदय की कमजोरी आदि में उत्तम लाभ मिलता है ! किन्ही कारणों से हृदय में लगने वाले झटकों में व मंद-मंद दर्द में यह विशेष लाभकारी है ! ऐसी स्थिती में अर्जुन की छाल के चूर्ण के साथ इसका सेवन करने से शीघ्र लाभ होता है !!

*मात्रा व अनुपान : -* १० ग्राम से १०० ग्राम, दिन में चार बार अकेले ही या वातनाशक औषधीयों के अनुसार रूप में दें !!