Three Gorges Dam Facts : चीन का थ्री गोर्जेस डैम –
– दुनिया का सबसे बड़ा हाइड्रोइलेक्ट्रिक पॉवर प्लांट चाइना में बना हुआ थ्री गोर्जेस डैम है. यह बांध 37 बिलियन डॉलर (करीब 2,38,335 लाख करोड़ रूपए) की लागत से बनकर तैयार हुआ है.
– Yangtze नदी पर बना हुआ थ्री गोर्जेस डैम चीन के Hubei प्रान्त में स्थित है. इस बांध की ऊंचाई 181 मीटर, लम्बाई 2.33 किलोमीटर, चौड़ाई 115 मीटर है. इस बांध को बनाने का मुख्य उद्देश्य बाढ़ की रोकथाम, बिजली पैदा करना है.
– Three Gorges Dam बनाने में 5,10,000 टन स्टील प्रयोग हुआ है. इतने स्टील से 60 एफिल टावर का निर्माण किया जा सकता है. इस बांध के बनने से बिजली बनाने में प्रयोग होने वाले 31 मिलियन टन कोयले की बचत होगी, जिससे ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी होगी.
इस बांध में इकठ्ठा किया गया 42 बिलियन टन पानी 175 मीटर की ऊँचाई तक भरा हुआ है. पानी के इतने बड़े भारी जलाशय की वजह से पृथ्वी का जड़त्वाघूर्ण (Moment of Inertia) प्रभावित हो गया है. इसकी वजह से पृथ्वी के घूमने की कुछ गति धीमी हो गयी है.
इस बांध में इकठ्ठा किया गया 42 बिलियन टन पानी 175 मीटर की ऊँचाई तक भरा हुआ है. पानी के इतने बड़े भारी जलाशय की वजह से पृथ्वी का जड़त्वाघूर्ण (Moment of Inertia) प्रभावित हो गया है. इसकी वजह से पृथ्वी के घूमने की कुछ गति धीमी हो गयी है.
– पृथ्वी के घूमने की गति धीमी होने से दिन के समय अन्तराल में 0.06 माइक्रोसेकंड्स की वृद्धि हो गयी है मतलब दिन थोड़ा लम्बा हो गया है.
– थ्री गोर्जेस डैम बनने की वजह से उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव अपनी जगह से 2-2 सेंटीमीटर खिसक गए हैं. इसके अतिरिक्त ध्रुवों पर पृथ्वी थोड़ा सा चपटी भी हो गयी है.
– भारत में जिस प्रकार टिहरी बांध बनने से लोगों को विस्थापित करना पड़ा, उसी प्रकार थ्री गोर्जेस डैम बनने से भी कई लोगों को विस्थापित होना पड़ा. थ्री गोर्जेस डैम बनने से 13 शहर, 140 कस्बे और 1600 से अधिक गांव बांध के जलाशय में समा गए. इसकी वजह से करीब 13,00,000 लोगों को पुनर्वासित किया गया.
– चीन का थ्री गोर्जेस डैम अमेरिका के महान हूवर डैम से 11 गुना अधिक बिजली पैदा करता है.
– चीन के इस डैम से निकले 45 बिलियन क्यूबिक मीटर पानी को छोटे बांधों, सुरंगों, नहरों, पम्पिंग स्टेशन से मदद से 1600 किलोमीटर अपस्ट्रीम के क्षेत्र में प्रवाहित किया जायेगा.
– भारत के लिए थ्री गोर्जेस डैम चिंता का विषय बन सकता है. भारत को आशंका है कि इस बांध के बन जाने से ब्रह्मपुत्र नदी का जलस्तर काफी नीचे गिर जायेगा और पानी में नमक स्तर बढेगा.
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