Wednesday, April 27, 2016

रामयण कोई कहानी नहीं

अमेरिकी वैज्ञानिकों ने किया दावा- सच में थे श्री राम, हनुमान और रावण
कुछ लोग मानते हैं कि रामायण और महाभारत की कथाओं जैसा कुछ नहीं था। वो केवल एक कल्पना थी और कुछ नहीं। पर अब कोई ऐसा नहीं कह पाएगा। क्योंकि अब इसका सबूत मिला है। अमेरिका के वैज्ञानिकों ने उस स्थान को खोज निकाला है जिसका जिक्र रामायण में पाताल लोक के रूप में किया गया है
कहा जाता है कि हनुमानजी ने प्रभु भगवान राम और लक्ष्मण को पातालपुरी के राजा अहिरावण के चंगुल से छुड़ाया था। राम-रावण युद्ध के दौरान अहिरावण ने राम-लक्ष्मण को अगवा कर बंधक बना कर रखा था। भगवान राम व लक्ष्मण को छुड़ाने के लिए बजरंगबली को पातालपुरी के रक्षक मकरध्वज को परास्त करना पड़ा था। मकरध्वज बजरंगबली के ही पुत्र थे, लिहाजा उनका स्वरूप बजरगंबली जैसा ही था।
ये जगह जहां उस काल से जुड़े प्रमाण मिलते हैं वो मध्य अमेरिकी महाद्वीप में पूर्वोत्तर होंडुरास के जंगलों के नीचे दफन है। अमेरिकी वैज्ञानिकों ने लाइडर तकनीकी से इसका 3-डी नक्शा तैयार किया है, जिसमें जमीन की गहराइयों में गदा जैसा हथियार लिए वानर देवता की मूर्ति होने की पुष्टि हुई है।
होंडुरास के जंगल की खुदाई पर प्रतिबंध के कारण इसकी ठीकठाक स्थिति का पता लगाना मुश्किल है। लेकिन इस की पुख्ता जानकारी के लिए होंडुरास सरकार ने आदेश जारी किये हैं। अमेरिकी इतिहासकार भी मानते हैं कि पूर्वोत्तर होंडुरास के घने जंगलों के बीच मस्कीटिया नाम के इलाके में हजारों साल पहले एक गुप्त शहर सियूदाद ब्लांका का वजूद था। वहां के लोग एक विशालकाय वानर मूर्ति की पूजा करते थे।
स्कूल ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज के निदेशक और वैदिक विज्ञान केन्द्र के प्रभारी प्रो. भरत राज सिंह ने बताया है कि पहले विश्व युद्ध के बाद एक अमेरिकी पायलट ने होंडुरास के जंगलों में कुछ अवशेष देखे थे। अमेरिकी पत्रिका 'डेली टाइम्स गज़ट' के मुताबिक इस शहर की पहली जानकारी अमेरिकी खोजकर्ता थिंयोडोर मोर्ड ने 1940 में दी थी। एक अमेरिकी पत्रिका में उसने उस प्राचीन शहर में वानर देवता की पूजा होने की बात भी लिखी थी, लेकिन उसने जगह का खुलासा नहीं किया था। बाद में रहस्यमय तरीके से थियोडोर की मौत हो गई और जगह का रहस्य बरकरार रहा।
करीब 70 साल बाद अमेरिका की ह्यूस्टन यूनिवर्सिटी व नेशनल सेंटर फार एयरबोर्न लेजर मैपिंग के वैज्ञानिकों ने होंडुरास के घने जंगलों में मस्कीटिया नामक स्थान पर लाइडर नामक तकनीक से जमीन के नीचे 3-डी मैपिंग की, जिसमें प्राचीन शहर का पता चला। इसमें जंगल के ऊपर से विमान से अरबों लेजर तरंगें जमीन पर फेंकी गईं। इससे 3-डी डिजिटल नक्शा तैयार हो गया। 3-डी नक्शे में जमीन के नीचे गहराइयों में मानव निर्मित कई वस्तुएं दिखाई दीं। इसमें हाथ में गदा जैसा हथियार लिए घुटनों के बल बैठी हुई है वानर मूर्ति भी दिखी है। अहिरावण के वध के बाद भगवान राम ने मकरध्वज को ही पातालपुरी का राजा बना दिया था।

No comments:

Post a Comment

Thanks for your valuable comment...