*🌺☘थैलेसिमिया की बीमारी का उपचार - thalassemia ki bimari ka ilaj🌺☘*
🌺थैलेसिमिया की बीमारी माता – पिता से बच्चों को हो जाती है | यह एक संक्रमित व वंशानुगत रोग है जो पीड़ी दर पीड़ी पूर्वजों से बच्चों में फैलता जाता है | यह रोग अधिकतर अरब और एशिया के लोगो में पाई जाती है | इस बीमारी से बचने के लिए सावधानी बहुत जरूरी है जैसे विवाह से पूर्व पति और पति दोनों का टेस्ट करवा लिया जाये . ऐसा करने से उनकी संतान को ये बीमारी होने से बचाया जा सकता है , इस बीमारी शरीर के अंदर शुद्ध रक्त का निर्माण नहीं हो पाता और अशुद्ध रक्त का निदान भी नहीं हो पाता जिसके कारण सिस्टम गड़बड़ में आ जाता है, हिन्दू धर्म में अपने गौत्र को छोड़ कर शादी करने की परम्परा यहाँ पर वैज्ञानिक प्रमाणित होती है, ऐसा करने से वंशानुगत बीमारी होने की संभावना 80 % तक कम हो जाती है. 8 मई को पूरे विश्व में थैलेसिमिया दिवस मनाया जाता है
*☘थैलेसिमिया के लक्षण -*
🌺इस बीमारी में रोगी का सरीर पीला पड़ जाता है,
🌺रोगी के शरीर में शुद्ध खून बनना बंद हो जाता है,
🌺हड्डियों का विकास रूप जाता है,
🌺सोचने विचारने की क्षमता कम हो जाती है,
🌺बच्चों में सरीर के विकास की दर कम हो जाती है,
🌺बड़ो में थकावट अधिक होने लगती है,
थोड़ी बहुत मेहनत के बाद चक्कर आने लगते है,
*☘इस बीमारी की रोकथाम हम आयुर्वेदिक तरीके से कर सकते है | जो इस प्रकार से है |*
☘सर्वकल्प क्वाथ (sarvkalp kawath) :- ३०० ग्राम
*☘बनाने की विधि :-* एक बर्तन में लगभग ४०० मिलीलीटर पानी लें | इस पानी में एक चम्मच सर्वकल्प क्वाथ की मिलाकर इसे मन्द अग्नि पर पकाएं | थोड़ी देर पकने के बाद जब इसका पानी १०० मिलीलीटर रह जाए तो पानी को छानकर सुबह के समय और शाम के समय खाली पेट पीये |
☘सामग्री : -
➖कुमारकल्याण रस (kumar kalyan rasa) :- १- २ ग्राम
➖प्रवाल पिष्टी (praval pisti) :- ५ ग्राम
➖कहरवा पिष्टी (kaharva pisti) :- ५ ग्राम
➖मुक्ता पिष्टी (mukta pisti) :- ५ ग्राम
➖गिलोय सत (giloy sat) :- १० ग्राम
➖प्रवाल पंचामृत (praval panchamrit) :- ५ ग्राम
☘इन सभी आयुर्वेदिक औषधियों को आपस में मिलाकर एक मिश्रण बनाए | अब इस मिश्रण की बराबर मात्रा में ६० पुड़ियाँ बना लें और किसी डिब्बे में बंद करके रख दें | रोजाना एक – एक पुड़ियाँ और शाम के समय खाना खाने से आधा घंटा पहले ताज़े पानी के साथ या शहद के साथ खाएं |
🌺सामग्री : -
➖कैशोर गुगुल (Kaishor guggal ) :- ४० ग्राम
➖आरोग्यवर्धिनी वटी(aarogaya vardhini vati):- २० ग्राम
🌺इन दोनों औषधीयों की एक – एक गोली रोजाना सुबह और शाम के खाना खाने के बाद लें | इस औषधि को हल्के गर्म पानी के साथ लें |
☘सामग्री : -
➖धृतकुमारी स्वरस(Dhritkumari Savrasa) : - १० मिलीलीटर
➖गिलोय स्वरस (giloye Savrasa) :- १० मिलीलीटर
🌺इन दोनों औषधियों में से किसी एक रस में गेहूँ के ज्वारे का रस मिलाकर पीये | इस उपचार को रोजाना सुबह और शाम खाली पेट पीये | बहुत लाभ मिलेगा |
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