Sunday, April 15, 2018

कब्ज के लिये औषधि

कब्ज के लिए औषधि :-

सामग्री -----     (1) हरड 50 gm (2) सूखा आवला 50 gm (3) बहेड़ा 50 gm (4) काली हरड 100 gm (5) एरंड तेल 50 gm (6) मुलहठी 50 gm

निर्माण विधि    (1) केवल काली हरड को एरंड तेल में हलकी आंच पर ठीक से भूनकर पीस लें
                      (2) अब बाकी बचे हरड, सूखा आवंला, बहेड़ा, मुलहठी को अलग से पीस लें और इसमें भूनी हुई काली हरड का पाउडर मिला कर कांच के बर्तन में रख ले

सेवन विधि       (1) वयस्क 1 छोटा चम्मच चम्मच रात को सोते समय दूध से ले। ऐसे लोग जिन्हें दूध मना हो वो गुनगुने पानी से लें. अत्यंत वृद्ध व्यक्ति भी ले सकते हैं
                      (2) 5 वर्ष से ऊपर के बच्चों को चौथाई से आधा छोटा चम्मच तक अवस्थानुसार दे सकते हैं...5 वर्ष से कम आयु के बच्चों को न दें

लाभ -- यह औषधि कब्ज में तो लाभ करेगी ही यह एक रसायन भी है नियमित रूप से लेने से .आँखों की रौशनी भी अच्छी रहती है असमय सफेद होने वाले बालों से छुटकारा मिलता है.

यह औषधि निरापद है यदि लगातार लिया जाए तो भी कोई हानि नही है इसकी आदत नहीं पड़ती है

बाजार में उपलब्ध पेट साफ़ करने वाले चूर्ण गोलियों आदि में सनाय होने के कारण पेट में मरोड़ होती है आँतों की स्वाभाविक गतिविधियों पर असर होता है जो दीर्घकाल में हानिप्रद सिद्ध होता है

Monday, April 9, 2018

त्रिकाल संध्या

*त्रिकाल संध्या*

   👉🏻बर्लिन ( जर्मन ) विश्वविद्यालय में अनुसंधान से सिद्ध हुआ कि – २७ घन फीट प्रति सेकंड वायुशक्ति से शंख बजाने से २२०० घन फीट वायु के हानिकारक जीवाणु नष्ट हो जाते हैं और उससे आगे की ४०० घन फीट वायु के हानिकारक जीवाणु मुर्च्छित हो जाते हैं | तो शंखनाद, धूप-दीप और भगवान का जप-ध्यान संध्या की वेला में करना चाहिए | इससे अनर्थ से बचकर सार्थक जीवन, सार्थक शक्ति और सार्थक मति – गति प्राप्त होती है | 

🙏🏻त्रिकाल संध्या की महता बताते हुए पूज्य बापूजी कहते हैं : “ जीवन को यदि तेजस्वी, सफल और उन्नत बनाना हो तो मनुष्य को त्रिकाल संध्या जरुर करनी चाहिए |

🙏🏻प्रात:काल सूर्योदय से दस मिनट पहले से दस मिनट बाद तक, दोपहर को १२ बजे के दस मिनट पहले से दस मिनट बाद तक तथा सायंकाल को सूर्यास्त के दस मिनट पहले से दस मिनट बाद तक – ये समय संधि के होते हैं | इस समय किये हुए प्राणायाम, जप और ध्यान बहुत लाभदायक होते हैं | ये सुषुम्ना के द्वार को खोलने में सहयोगी होते हैं | सुषुम्ना का द्वार खुलते ही मनुष्य की छुपी हुई शक्तियाँ जागृत होने लगती हैं |

👉🏻जैसे स्वास्थ्य के लिए हम रोज स्नान करते हैं, नींद करते हैं, ऐसे ही मानसिक, बौद्धिक स्वस्थता के लिए संध्या होती है |”

🌥संध्या के समय क्या करें ?

🙏🏻संध्यावंदन की महत्ता बताते हुए पूज्यश्री कहते हैं : “ संध्या के समय ध्यान-भजन करके अपनी सार्थक शक्ति जगानी चाहिए, सत्त्वगुण बढ़ाना चाहिए, दूसरा कोई काम नहीं करना चाहिए | अपने भाग्य की रेखाएँ बदलनी हों, अपनी ७२,००,००,००१ नाड़ियों की शुद्धि करनी हो और अपने मन-बुद्धि को मधुमय करना हो तो १० से १५ मिनट चाहे सुबह की संध्या, दोपहर की संध्या, शाम की संध्या अथवा दोनों, तीनों समय की संध्या विद्युत् का कुचालक आसन बिछाकर करें | यदि संध्या का समय बीत जाय तो भी संध्या ( ध्यान - भजन ) करनी चाहिए, वही भी हितकारी है |

👇👉🏻संध्या के समय वर्जित कार्य

👉🏻संध्या के समय निषिद्ध कर्मों से सावधान करते हुए पूज्य बापूजी कहते हैं : संध्या के समय व्यवहार में चंचल नहीं होना चाहिए, भोजन आदि खानपान नहीं करना चाहिए और संध्या के समय बड़े निर्णय नहीं लेने चाहिए | पठन – पाठन, शयन नहीं करना चाहिए तथा खराब स्थानों में घूमना नहीं चाहिए | संध्या के समय स्नान न करें | स्त्री का सहवास न करें |

🙏🏻संध्याकाल अथवा प्रदोषकाल ( सूर्यास्त का समय ) में भोजन से शरीर में व्याधियाँ तथा श्मशान आदि खराब स्थानों में घूमने से भय उत्पन्न होता है | दिन में एवं संध्या के समय शयन आयु को क्षीण करता हैं | पठन – पाठन करने से वैदिक ज्ञान और आयु का नाश होता है | 

*स्त्रोत : ऋषिप्रसाद – अगस्त 2016 से*
🏻पूज्य बापूजी त्रिकाल संध्या से होनेवाले लाभों को बताते हुए कहते हैं कि “त्रिकाल संध्या माने ह्र्द्यरुपी घर में तीन बार साफ-सफाई | इससे बहुत फायदा होता है |

👇त्रिकाल संध्या करने से –

👉🏻१] अपमृत्यु आदि से रक्षा होती है और कुल में दुष्ट आत्माएँ, माता-पिता को सतानेवाली आत्माएँ नहीं आतीं |

👉🏻२] किसीके सामने हाथ फैलाने का दिन नहीं आता | रोजी – रोटी की चिंता नहीं सताती |

३] व्यक्ति का चित्त शीघ्र निर्दोष एवं पवित्र हो जाता है | उसका तन तंदुरुस्त और मन प्रसन्न रहता है तथा उसमें मंद व तीव्र प्रारब्ध को परिवर्तित करने का सामर्थ्य आ जाता है | वह तरतीव्र प्रारब्ध के उपभोग में सम एवं प्रसन्न रहता है | उसको दुःख, शोक, ‘हाय-हाय’ या चिंता अधिक नहीं दबा सकती |

४] त्रिकाल संध्या करनेवाली पुण्यशीला बहनें और पुण्यात्मा भाई अपने कुटुम्बियों एवं बच्चों को भी तेजस्विता प्रदान कर सकते हैं |

५] त्रिकाल संध्या करनेवाले माता – पिता के बच्चे दूसरे बच्चों की अपेक्षा कुछ विशेष योग्यतावाले होने की सम्भावना अधिक होती है |

६] चित्त आसक्तियों में अधिक नहीं डूबता | उन भाग्यशालियों के संसार-बंधन ढीले पड़ने लगते हैं |

७] ईश्वर – प्रसाद पचाने का सामर्थ्य आ जाता है |

८] मन पापों की ओर उन्मुख नहीं होता तथा पुण्यपुंज बढ़ते ही जाते हैं |

९] ह्रदय और फेफड़े स्वच्छ व शुद्ध होने लगते हैं |

१०] ह्रदय में भगवन्नाम, भगवदभाव अनन्य भाव से प्रकट होता है तथा वह साधक सुलभता से अपने परमेश्वर को, सोऽहम् स्वभाव को, अपने आत्म-परमात्मरस को यही अनुभव कर लेता है |

११] जैसे आत्मज्ञानी महापुरुष का चित्त आकाशवत व्यापक होता है, वैसे ही उत्तम प्रकार से त्रिकाल संध्या और आत्मज्ञान का विचार करनेवाले साधक का चित्त विशाल होंते – होते सर्वव्यापी चिदाकाशमय होने लगता है |
ऐसे महाभाग्यशाली साधक-साधिकाओं के प्राण लोक – लोकांतर में भटकने नहीं जाते | उनके प्राण तो समष्टि प्राण में मिल जाते हैं और वे विदेहमुक्त दशा का अनुभव करते हैं |

१२] जैसे पापी मनुष्य को सर्वत्र अशांति और दुःख ही मिलता है, वैसे ही त्रिकाल संध्या करनेवाले साधक को सर्वत्र शांति, प्रसन्नता, प्रेम तथा आनंद का अनुभव होता है |

१३] जैसे सूर्य को रात्रि की मुलाकात नहीं होती, वैसे ही त्रिकाल संध्या करनेवाले में दुश्चरित्रता टिक नहीं पाती |

१४] जैसे गारुड़ मंत्र से सर्प भाग जाते हैं, वैसे ही गुरुमंत्र से पाप भाग जाते हैं और त्रिकाल संध्या करनेवाले शिष्य के जन्म-जन्मान्तर के कल्मष, पाप – ताप जलकर भस्म हो जाते हैं |
आज के युग में हाथ में जल लेकर सूर्यनारायण को अर्घ्य देने से भी अच्छा साधन मानसिक संध्या करना है | इसलिए जहाँ भी रहें, तीनों समय थोड़े – से जल से आचमन करके त्रिबंध प्राणायाम करते हुए संध्या आरम्भ कर देनी चाहिए तथा प्राणायाम के दौरान अपने इष्टमंत्र, गुरुमंत्र का जप करना चाहिए |

१५] त्रिकाल संध्या व त्रिकाल प्राणायाम करने से थोड़े ही सप्ताह में अंत:करण शुद्ध हो जाता है | प्राणायाम, जप, ध्यान से जिनका अंत:करण शुद्ध हो जाता है उन्हीं को  ब्रह्मज्ञान का रंग जल्दी लगता है|

🌹 *स्रोत – ऋषिप्रसाद – सितम्बर 2016 से* 🌹

Friday, April 6, 2018

वास्तु टिप्स

तुलसी का पौधा उपहार मे कभी न ले ।
● ताँबे और लोहे का छल्ला एक साथ न पहने ।
● घर के सभी लोग एक साथ बाहर न निकले ।● घर खाली हाथ वापस न आये ।
● पूजा का दीपक रोजाना दो लौग डालकर ही जलाये ।
● पूजा के बाद घंटा + शंख अवश्य बजाए ।
● नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने, वास्तु दोष के प्रभाव को कम करने और आर्थिक उन्नति हेतु, एक नन्हा सा तुलसी का पौधा अपने हाथो से लगाये ।
● पक्षीयो के पीने के लिए जल की व्यवस्था करे
● घर के सभी Mirror हमेशा ढककर रखे ।
● बाथरूम का दरवाजा हमेशा बंद रखे ।
● सोते समय मस्तक दक्षिण या पूर्व की दिशा मे रखे ।
● घर की गृहणी स्नानादि के बाद ही रसोई मे प्रवेश करे ।
● गृहणी सुबह-सुबह उठकर मुख्य द्वारपर जल का छिड़काव करे ।
● भोजन हमेशा पूर्व दिशा की ओर बैठकर ही करे ।
● झाडू हमेंशा दरवाजे के पीछे दक्षिण -पश्चिम की दिशा मे रखे ।
● घर मे टूटी-फूटी चीजै यह किसी भी तरह के कबाड़ को न रखे ।
● शुक्रवार को खीर जरूर खाये ।

Sunday, April 1, 2018

दालचीनी की फायदे

💃  *दालचीनी* 💃

*दूध तो हम में से कई लोग पीते है फिर भी लोगो को शिकायत रहती है कि उन्हें दूध पचता नही है और ना ही शरीर को लगता है।*
*आज हम आपको एक ऐसी चीज बतायेंगे जिसे दूध में डालकर पीने से आपका शरीर फौलाद की तरह बन जायेगा। आप बीमारियों से कोसों दूर हो जाएंगे और एक स्वस्थ-निरोगी काया पाएंगे।*

ये चीज है *दालचीनी* जिसे हम दैनिक जीवन मे बहुतायत से उपयोग करते है पर इसके कई फायदों से अनजान हैं। दालचीनी को इसके अनोखे गुणों के कारण वंडर स्पाइस भी कहते है। दालचीनी को दूध के साथ मिलाकर पीने से इसके लाभ कई गुना बढ़ जाते है, ये ना केवल आपके शरीर को मजबूत करती है बल्कि सुंदरता भी बढ़ाती है।

दालचीनी वाला दूध बनाने के लिए आपको एक ग्लास गर्म दूध में आधा चम्मच दालचीनी अच्छी तरह मिला देना है और इसका गर्म ही सेवन करना है। इस दूध को पीने से आपको कई फायदे होंगे जैसे-

◆आपका ब्लड सुगर लेवल रेगुलेट रहेगा यानि डाइबिटिज के मरीजो के लिए दालचीनी वाला दूध बहुत बहुत फायदेमंद है।

◆ये स्किन और बालों से सम्बंधित हर समस्या को दूर करता है। इसमें एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते है जो बालों और स्किन से जुड़ी रोगाणुओं को नष्ट कर देते हैं।

◆दालचीनी वाले दूध का सेवन करने से गठिया और हड्डियों से जुड़ी समस्याएं होती ही नही हैं। और जिन लोगो को अर्थराइटिस से सम्बंधित समस्या है उन्हें इससे आराम मिलेगा।

◆पढ़ाई करने वाले छात्रों को दालचीनी वाला दूध देने से उनकी एकाग्रता और मेमोरी पावर बढ़ता है।

◆यदि आपको नींद ना आने की समस्या है तो रोज रात को ये दूध पीने से आपकी ये समस्या धीरे धीरे चली जायेगी।

◆यदि आप वजन कम करने के लिए परेशान हो रहे है तो रोज रात को दालचीनी वाला दूध पीने से आप महीने में 3 से 4 किलो वजन घटा सकते है।

◆दालचीनी वाले दूध का सेवन करने से आपको जीवन मे कभी भी दिल की बीमारी या हार्ट स्ट्रोक का सामना नही करना पड़ेगा।

यह मैसेज अगर आपको अच्छा लगे या समझ में आये कि यह किसी के लिया रामबाण की तरह काम आएगा तो आप से 🙏निवेदन है कि इस मैसेज को अपने *परिचित /मित्र/ या आपके व्हाट्स एप्प ग्रुप फ्रेंड्स* तक भेज दे ।

आपका यह कदम *स्वस्थ भारत के निर्माण* मैं योगदान के रूप में होगा

दुआ मैं बड़ी ताकत होती है।

Thursday, March 29, 2018

बच्चो के विकास के लिये

*बच्चों के विकास के लिए*

*बॉर्न्विटा हॉर्लिक्स वगैरह बच्चों के इम्यून सिस्टम को बिगाड़ देते हैं, इन्हें कभी प्रयोग नही करना चाहिए।*

मखाना  50 ग्राम
छुहारा   50  ग्राम
किश्मिस् 50 ग्राम
मुनक्का  50  ग्राम
अखरोट  50 ग्राम
बादाम   50 ग्राम
छोटी इलायची 10 ग्राम
सौंफ     50 ग्राम
अश्वगंधा पाउडर 50 ग्राम
मिश्री   200 ग्राम

सबको कूट पीस कर रख लें, 1 चम्मच ये पाउडर दूध में मिला कर दें,

*बुद्धि और शरीर के विकास के लिए उत्तम है।*

दस्त और पेट की समस्या

दस्त और पेट से जुड़ी ज्यादातर बीमारियां उन लोगों को होती हैं जाक बाहर खाना खाते हैं लेकिन इस बात की गारंटी नहीं ली जा सकती है कि जो लोग घर पर खाना खाते हैं उनका पेट हमेशा ठीक ही रहेगा.

पेट में इंफेक्शन होने के कई कारण हो सकते हैं. कई बार गलत खानपान की वजह से तो कई बार सफाई से नहीं रहने की वजह ये पेट से जुड़ी समस्याएं हो जाती हैं. इंफेक्शन हो जाने से बार-बार मोशन होना, कमजोरी होना, उल्टी होना और कभी-कभी बुखार होने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं.

अगर आपका पेट खराब हो गया है और आप दवाई खाने से बचना चाहते हैं या फिर दवा का आप पर असर नहीं हो रहा है तो एकबार डाक्टर के परामर्श से इन घरेलू उपायों को भी आजमाकर देखें.

1. ज्यादा से ज्यादा करें पानी पिएं 
पेट खराब होने पर शरीर में पानी की कमी हो जाती है. ऐसे में कोशिश करें कि ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं. आप फलोें का जूस और सब्जियों का रस भी ले सकते हैं. बेहतर होगा अगर पानी में लवण मिला हो. आप चाहें तो नींबू पानी, नमक-चीनी का घोल या फिर नारियल पानी ले सकते हैं. गाजर का जूस भी ऐसे समय में काफी फायदेमंद होता है.

2. अदरक भी करेगा फायदा 
अपसेट पेट में अदरक का इस्तेमाल काफी कारगर होता है. इसमें एंटीफंगल और एंटी-बैक्टीरियल तत्व पाए जाते हैं, जो पेट दर्द में राहत देता है. एक चम्मच अदरक पाउडर को दूध में मिलाकर पीने से आराम मिलता है.

3. दही है फायदेमंद 
पेट दर्द में दही का इस्तेमाल काफी फायदेमंद रहता है. दही में मौजूद बैक्टीरिया संतुलन बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. जिससे पेट जल्दी ठीक होता है. साथ ही ये पेट को ठंडा भी रखता है.

4. केला खाना भी रहेगा सही 
अगर आप बार-बार हो रहे मोशन से परेशान हो चुके हैं तो केले का इस्तेमाल आपको राहत देगा. इसमें मौजूद पेक्टिन पेट को बांधने का काम करता है. इसमें मौजूद पोटै‍शियम की उच्च मात्रा भी शरीर के लिए फायदेमंद होती है.

5. जीरा को अनदेखा नहीं कर सकते 
अगर आपको लगातार दस्त हो रहे हों तो एक चम्मच जीरा चबा लें. अमूमन सभी घरों में मिलने वाला ये मसाला दस्त में काफी फायदेमंद है. जीरा चबाकर पानी पी लेने से दस्त बहुत जल्दी रुक जाते हैं. 

मातृ दुग्ध वर्धक

  माताओं के दूध बढ़ाने हेतु
   
  मातृ-दुग्ध वर्धक :-  सफ़ेद जीरा , मिश्री और सौंफ समान मात्रा में मिलाकर रख लें । एक चम्मच की मात्रा मे दिन में तीन बार दूध के साथ लेने से माँ का दूध खूब बढ़ता है ।

सहायक उपचार :- माँ को यदि खून की कमी है तो दूध कम बनेगा इसके लिए डाल से टूटा हुआ एक पका पपीता 21 दिन रोजाना खाएं ।

- अंगूर या मुनक्का (१०-१२ नग ) :- प्रसव काल में अधिक रक्त बह गया हो तो अंगूर का सेवन तेजी से खून बढाता है यदि किसी कारण अंगूर ना मिल पाए तो मुनक्के के 10-12 नग दूध में उबालकर सेवन करें ।

- गाजर का रस और भोजन में कच्चा प्याज भी दूध को बढ़ाता है ।

-  स्तनों पर दो तीन बार एरंड के तेल की मालिश करते रहने से दूध बढ़ता है ।

-  शतावरी का चूर्ण 1 चम्मच दूध में देने से , माताओं के दूध में वृद्धि होती है । इसके अलावा दाल का पानी , दूध और कैल्शियम देने से कब्ज नाशक ,  सुपाच्य आहार लेने से अधिकतर शाक-सब्जी लेने से यह समस्या दूर हो जाती है ।

- प्रतिदिन गुड और अजवाइन के काढ़े से भी दूध उतरने लगता है ।

- कभी कभी प्रसव के बाद बच्चे के दूध ना पीने से या उपरी बाधाओं के कारण भी माताओं का दूध सूख जाता है ऐसी स्थति में दवा और दुआ दोनों की आवश्यकता होती है ।

भुना जीरा आधा चम्मच तथा देशी खांड़ दो चम्मच – दोनों को पीसकर दूध के साथ सेवन करें| शीघ्र ही स्तनों में अधिक दूध उतरने लगेगा|

250 ग्राम धुले तिल को कूट-पीसकर रख लें| इसमें से दो चम्मच सुबह तथा दो चम्मच शाम को दूध के साथ लें| इससे दूध की वृद्धि अवश्य होगी|

नीम की थोड़ी-सी छाल को पानी में उबालकर एक सप्ताह तक पिएं| स्तनों में दूध की वृद्धि अवश्य होगी|

नियमित रूप से चुकन्दर खाने से माता को अधिक मात्रा में दूध उतरने लगता है|