Thursday, February 1, 2018

नाभि में छुपा सेहत राज

गणेश चतुर्थी

राशि के लिये मंत्र

|| मूल मन्त्र ||

कुछ लोग अपनी राशि के अनुसार भी मंत्र का जाप करते हैं. राशि के अनुसार मंत्र जाप यदि आप करना चाह्ते हैं तो मंत्र इस प्रकार हैं :

मेष : ऊँ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीनारायण नम:

वृषभ : ऊँ गौपालायै उत्तर ध्वजाय नम:

मिथुन : ऊँ क्लीं कृष्णायै नम:

कर्क : ऊँ हिरण्यगर्भायै अव्यक्त रूपिणे नम:

सिंह : ऊँ क्लीं ब्रह्मणे जगदाधारायै नम:

कन्या : ऊँ नमो प्रीं पीताम्बरायै नम:

तुला : ऊँ तत्व निरंजनाय तारक रामायै नम:

वृश्चिक : ऊँ नारायणाय सुरसिंहायै नम:

धनु : ऊँ श्रीं देवकीकृष्णाय ऊर्ध्वषंतायै नम:

मकर : ऊँ श्रीं वत्सलायै नम:

कुंभ : श्रीं उपेन्द्रायै अच्युताय नम:

मीन : ऊँ क्लीं उद्‍धृताय उद्धारिणे नम:
|| ॐ श्री विघ्नेश्वराय नमः ||

Saturday, November 25, 2017

सूर्य को जल देने के लाभ

सूर्य नव ग्रहो के स्वामी हैं। ये पंचदेवों में एक हैं।
जीवन को व्यवस्था सूर्य से ही
मिलती है। पुराणों में सूर्य की उपासना को
सभी रोगों को दूर करने वाला बताया गया है।
हिंदू संस्कृति में अर्घ्य दान यानी जल देना सामने वाले
के प्रति श्रद्धा और आस्था दिखाने का प्रतीक है।
लिहाजा स्नान के बाद सूर्य को अर्घ्य देने का अर्थ है
जीवन में संतुलन को आमांत्रित करना।अघर्य देते समय
सूर्य के नामों का उच्चारण करने का विघान है।
शास्त्रों के मुताबिक प्रातःकाल पूर्व दिशा की ओर मुख
करके और शाम के वक्त पश्चिम की ओर मुख करके
सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए। मान्यता है कि सूर्य को अर्घ्य देते
समय गिरने वाले जलकण वज्र बनकर रोग रूपी राक्षसों
का विनाश करते हैं।
जल चिकित्सा और आयुर्वेद के अनुसार प्रातःकालीन
सूर्य को सिर के ऊपर पानी का बर्तन ले जाकर जल
अर्पित करना चाहिए। ऐसा करते समय अपनी दृष्टि
जलधारा के बीच में रखें ताकि जल से छनकर सूर्य
की किरणें दोनों आंखों के मध्य में पड़ें। इससे आंखों
की रौशनी और बौद्धिक क्षमता
बढ़ती है।
जल से छनकर जब सूर्य की किरणें शरीर
पर पड़ती हैं तो शरीर में ऊर्जा का संचार
होता है। इससे शरीर में रोग से लड़ने की
शक्ति बढ़ती है साथ ही आस-पास
सकारात्मक उर्जा का संचार होता है जो जीवन में आगे
बढ़ने की प्रेरणा देता है।
ज्योतिषशास्त्र में कहा जाता है कि कुण्डली में सूर्य
कमज़ोर स्थिति में होने पर उगते सूर्य को जल देना चाहिए। सूर्य के
मजबूत होने से शरीर स्वस्थ और उर्जावान रहता है।
इससे सफलता के रास्ते में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।

Thursday, November 16, 2017

अस्थमा रोग के कारण और निवारण

*अस्थमा रोग.. कारण और निवारण..*

– मिलावटी खान पान और ग़लत आदतें..
– तनाव, क्रोध या डर
– ब्लड में संक्रमण
– पालतू जानवरों से एलर्जी
– मद्यपान या मादक पदार्थों का सेवन
– खांसी, जुकाम और नज़ला
– मिर्च मसालेदार चीज़ें खाना
– फेफड़े और आंतों की कमज़ोरी
– सांस की नली में धूल जाना या ठंड लगना
– मोटापा
– अनुवांशिकता; परिवार में पहले किसी को दमा रोग हो
– दवाइयों के प्रयोग से कफ़ सूख जाना
– प्रदूषण
– महिलाओं के हार्मोंस का बदलाव

*अस्थमा रोग के लक्षण..*

– सांस लेने में अत्यधिक परेशानी
– बीमारी के चलते सूखी खांसी
– सख़्त और बदबूदार कफ़
– सांस लेते समय ज़ोर लगाने पर चेहरा लाल होना
– छाती में जकड़न महसूस होना
– ज़ोर ज़ोर सांस लेने के बाद थक जाना और पसीना आना

*अस्थमा रोग में खान-पान..*

– हल्का और जल्दी पचने वाला भोजन खाएँ
– लौकी, तरोई, टिंडे, मेथी, अदरक और लहसुन को खाने में प्रयोग करें
– मोटे पिसे आटे की बनी रोटियाँ और दलियाँ खाएँ
– मुन्नका और खजूर खाएँ
– गुनगुना पानी पिएँ

*अस्थमा रोग का घरेलू उपचार*

अस्थमा रोग में घरेलू उपचार से होने वाली तकलीफ़ों को कम किया जा सकता है। संभवत: कंट्रोल किया जा सकता है..

– दमा के ट्रीटमेंट में लहसुन का प्रयोग बहुत फ़ायदेमंद है। 30 मिली दूध में लहसुन की 5 छिली कलियाँ उबालकर रोज़ सेवन कीजिए.. चाहें तो अदरक वाली चाय में लहसुन की कलियाँ पीसकर डालें और इस चाय का सेवन करें..

– 1 चम्मच अदरक का रस, एक कप मेथी का काढ़ा और थोड़ा शहद मिलाकर मिश्रण तैयार करें। अस्थमा के उपचार में इसका सेवन लाभकारी है..

– 5 लौंग की कलियाँ आधा गिलास पानी में 5 मिनट उबालें.. फिर इसे छानकर इसमें थोड़ा शहद मिलाकर गरमागरम पिएँ। दिन में तीन बार नियमित रूप से सेवन करने से दमा कंट्रोल में आ जाता है..

– 2 चम्मच शहद में 2 चम्मच हल्दी मिलाकर चाटने से दमा रोग कम हो जाता है..

– तुरंत राहत पाने के लिए आप हॉट काफ़ी पी सकते हैं। इससे श्वसन नलिका साफ़ हो जाती है और सांस लेने में कोई परेशानी नहीं होती है..

– दमा रोग का देशी इलाज करने के लिए छांव में सूखे पीपल के पत्तों को जलाकर बचे हुए चूरे को सूती कपड़े से छान लीजिए..
इस राख को शहद के साथ मिलाकर नियमित 2 महीने तक दिन में 3 बार चाटने से काफ़ी आराम मिलेगा..

– सरसों के तेल में थोड़ी कपूर डालकर अच्छे से गरम कर लें और थोड़ा ठंडा होने के बाद छाती और कमर पर मालिश करें.. रोज़ इसकी मालिश से अस्थमा ठीक हो सकता है..

– तुलसी के पत्ते पानी के साथ पीसकर 2 चम्मच शहद मिलाकर खाने से दमा रोग क़ाफ़ूर हो जाता है..

– 1 गिलास दूध में 1 चम्मच हल्दी डालकर पीने से अस्थमा कंट्रोल में रहता है और एलर्जी भी नहीं होती है..

– दमा के घरेलू उपचार में इलायची बहुत लाभकारी है। बड़ी इलायची के सेवन से हिचकी और अस्थमा दोनों में आराम मिलता है..
अंगूर, बड़ी इलायची और खजूर को बराबर मात्रा में लेकर पीस लें, अब इस मिश्रण को शहद के साथ चाटने से खांसी और दमा दूर होता है..

*दमा का आयुर्वेदिक उपचार*

आयुर्वेदिक दवाओं से इलाज करने के सबसे बड़ा फ़ायदा ये है कि इनके साइड इफ़ेक्ट नहीं होते हैं, और बीमारी का जड़ से इलाज होता है..

– 2 चम्मच आंवले का पाउडर किसी कप में डालकर इसमें 1 चम्मच शहद अच्छे से मिक्स करें। हर दिन सुबह इसे खाने से अस्थमा कंट्रोल में रहता है..

– दो तिहाई हिस्सा गाजर जूस और एक तिहाई हिस्सा पालक जूस, एक गिलास जूस पिएँ..

– जौं, बथुआ, अदरक और लहसुन का सेवन अस्थमा के रोगी के लिए फायदेमंद है..

*नैचुरोपैथी से अस्थमा का इलाज*

– फलों का जूस पिएँ, इससे शरीर को पोषक तत्व मिलेंगे और टॉक्सिंस बाहर निकल जाएंगे। जूस और पानी को समान मात्रा में मिलाकर सेवन करना चाहिए..

– कफ और बलगम बनाने वाली चीज़ें खाने से बचें, जैसे चावल, शक्कर, दही और तिल..

– पेट भरकर भोजन नहीं करना चाहिए और भोजन को धीरे धीरे चबाकर खाएँ..

– खाना खाते समय पानी न पिएँ बल्कि पूरे दिन में 10 से 12 गिलास पानी पी जाएँ..

– मौसमी बदलाव के समय एलर्ट रहें..

*योग द्वारा अस्थमा का इलाज*

अस्थमा का उपचार करने के लिए नैचुरल होम रेमेडीज़ के प्रयोग के साथ अगर योग किया जाए तो आप को अच्छे रिज़ल्ट मिल सकते हैं..
योग की शुरुआत आप अनुलोम-विलोम से कर सकते हैं..
आप अगर कपाल भारती और भस्त्रिकासन करने की सोच रहे हैं, तो योगा टीचर की निगरानी में करें...!

हृदय की बीमारी

*हृदय की बीमारी*

*आयुर्वेदिक इलाज !!*

हमारे देश भारत मे 3000 साल पहले एक बहुत बड़े ऋषि हुये थे

उनका नाम था *महाऋषि वागवट जी !!*

उन्होने एक पुस्तक लिखी थी

जिसका नाम है *अष्टांग हृदयम!!*

*(Astang  hrudayam)*

और इस पुस्तक मे उन्होने ने
बीमारियो को ठीक करने के लिए *7000* सूत्र लिखे थे !

यह उनमे से ही एक सूत्र है !!

वागवट जी लिखते है कि कभी भी हृदय को घात हो रहा है !

मतलब दिल की नलियों मे blockage होना शुरू हो रहा है !

तो इसका मतलब है कि रकत (blood) मे acidity(अम्लता ) बढ़ी हुई है !

अम्लता आप समझते है !

जिसको अँग्रेजी मे कहते है acidity !!

*अम्लता दो तरह की होती है !*

एक होती है *पेट कि अम्लता !*

*और एक होती है रक्त (blood) की अम्लता !!*

आपके पेट मे अम्लता जब बढ़ती है !

तो आप कहेंगे पेट मे जलन सी हो रही है !!

खट्टी खट्टी डकार आ रही है !

मुंह से पानी निकाल रहा है !

और अगर ये अम्लता (acidity)और बढ़ जाये !

तो hyperacidity होगी !

और यही पेट की अम्लता बढ़ते-बढ़ते जब रक्त मे आती है तो रक्त अम्लता  (blood acidity) होती !!

और जब blood मे acidity बढ़ती है तो ये अम्लीय रक्त  (blood) दिल की नलियो मे से निकल नहीं पाता !

और नलिया मे blockage कर देता है !

तभी heart attack होता है !! इसके बिना heart attack नहीं होता !!

और ये आयुर्वेद का सबसे बढ़ा सच है जिसको कोई डाक्टर आपको बताता नहीं !

क्योंकि इसका इलाज सबसे सरल है !!

इलाज क्या है ??

वागबट जी लिखते है कि जब रक्त (blood) मे अम्लता (acidity) बढ़ गई है !

तो आप ऐसी चीजों का उपयोग करो जो क्षारीय है !

आप जानते है दो तरह की चीजे होती है !

*अम्लीय और क्षारीय !!*

*acidic and alkaline*

अब अम्ल और क्षार को मिला दो तो क्या होता है ! ?????

*acid and alkaline को मिला दो तो क्या होता है )?????*

*neutral*

होता है सब जानते है !!

तो वागबट जी लिखते है !

*कि रक्त की अम्लता बढ़ी हुई है तो क्षारीय(alkaline) चीजे खाओ !*

तो रक्त की अम्लता (acidity) neutral हो जाएगी !!!

और रक्त मे अम्लता neutral हो गई !

तो heart attack की जिंदगी मे कभी संभावना ही नहीं !!

ये है सारी कहानी !!

अब आप पूछोगे जी ऐसे कौन सी चीजे है जो क्षारीय है और हम खाये ?????

आपके रसोई घर मे ऐसी बहुत सी चीजे है जो क्षारीय है !

जिनहे आप खाये तो कभी heart attack न आए !

और अगर आ गया है !

तो दुबारा न आए !!

सबसे ज्यादा आपके घर मे क्षारीय चीज है वह है लौकी !!

जिसे दुधी भी कहते है !!

English मे इसे कहते है bottle gourd !!!

जिसे आप सब्जी के रूप मे खाते है !

इससे ज्यादा कोई क्षारीय चीज ही नहीं है !

तो आप रोज लौकी का रस निकाल-निकाल कर पियो !!

या कच्ची लौकी खायो !!
वागवतट जी कहते है रक्त  की अम्लता कम करने की सबसे  ज्यादा ताकत लौकी मे ही है !

तो आप लौकी के रस का सेवन करे !!

कितना सेवन करे ?????????

रोज 200 से 300 मिलीग्राम पियो !!

कब पिये ??

सुबह खाली पेट (toilet जाने के बाद ) पी सकते है !!

या नाश्ते के आधे घंटे के बाद पी सकते है !!

इस लौकी के रस को आप और ज्यादा क्षारीय बना सकते है !

इसमे 7 से 10 पत्ते के तुलसी के डाल लो

*तुलसी बहुत क्षारीय है !!*

इसके साथ आप पुदीने से 7 से 10 पत्ते मिला सकते है !

*पुदीना बहुत क्षारीय है !*

इसके साथ आप काला नमक या सेंधा नमक जरूर डाले !

ये भी बहुत क्षारीय है !!

लेकिन याद रखे नमक काला या सेंधा ही डाले !

वो दूसरा आयोडीन युक्त नमक कभी न डाले !!

ये आओडीन युक्त नमक अम्लीय है !!!!

तो मित्रों आप इस लौकी के जूस का सेवन जरूर करे !!

2 से 3 महीने आपकी सारी heart की blockage ठीक कर देगा !!

21 वे दिन ही आपको बहुत ज्यादा असर दिखना शुरू हो जाएगा !!!

कोई आपरेशन की आपको जरूरत नहीं पड़ेगी !!

घर मे ही हमारे भारत के आयुर्वेद से इसका इलाज हो जाएगा !!

और आपका अनमोल शरीर और लाखो रुपए आपरेशन के बच जाएँगे !!

और पैसे बच जाये ! तो किसी गौशाला मे दान कर दे !

डाक्टर को देने से अच्छा है !किसी गौशाला दान दे !!

हमारी गौ माता बचेगी तो भारत बचेगा !!

आपने पूरी पोस्ट पढ़ी आपका बहुत बहुत धन्यवाद !!

- यदि आपको लगता है कि मेने ठीक कहा है तो आप ये जानकारी सभी तक पहुचाए

*ॐ नमो भगवते वासुदेवाय*

Monday, November 6, 2017

महिलाओं के लिए सफेद पानी और लाल पानी की परेशानी से मुक्ति के लिए

महिलाओं के लिए सफेद पानी व लाल पानी की परेसानी से मुक्ती के लिए

हमने हमारे गुरुदेव का बताया नुस्खा आजमाया है कइ बार और सफलता मिली है

*अशोक वृक्ष की छाल ली करीब ढाई तीन किलो जितनी । फिर उसको कूट कर करीब पांच छः लीटर पानी में डालकर अच्छी तरह से उबाला । जब तक की पानी आधा नहीं हो गया तब तक उबाला । फिर कपड़े से छान लीया  और फिर प्रतीदिन मरीज को आधा गिलास पानी में आधा गिलास दूसरा पानी मिलाकर पीने की सलाह दी गई.
इस प्रयोग से कुछ ही दिनों में उन महिलाओं को आराम हो जाता है लाल व सफेद पानी की परेसानी से निजात मिल जाएगी