Friday, October 27, 2017

आयुर्वेदिक पाक/अवलेह भाग

*!! आयुर्वेदिक पाक/ अवलेह भाग १ !!*

           *!! हरिद्रा खण्ड !!*

*गुण व उपयोग : -* हरिद्रा खण्ड शीतपित्त, उदर्द, चकते, कण्डु, खुजली, ‌‌‌एग्जिमा-छाजन, जीर्णज्वर, कृमि, पांडुरोग, शाथ आदि रोगों में उत्तम लाभ करता है ! यह मृदु विरेचक भी है !!

*मात्रा व अनुपान : -*
६ से १० ग्राम, पानी के साथ !!

          *!! हरीतकी खण्ड !!*

*गुण व उपयोग : -* हरीतकी खण्ड अम्लपित्तजन्य दर्द व अम्लपित्त, अर्श, काष्ठगत विकार, वातरोग, कटिशूल में उत्तम लाभ करता है ! यह उत्तम विरेचक भी है !!

*मात्रा व अनुपान : -*
    ६ से १० ग्राम, बलानुसार गर्म दूध या पानी के साथ !!

          *!! सौभग्य शुण्ठीपाक !!*

*गुण व उपयोग : -* सौभग्य शुण्ठीपाक बल एवं आयु की वृद्धि करता है ! पुरूषों के लिए भी बल-वर्द्धक है ! स्त्रियों के लिए अमृत-तुल्य लाभकारी है ! इसके सेवन से योनिविकार, प्रदर, कष्टार्तव आदि रोग नष्ट होते हैं ! प्रसूता स्त्रियों के लिए विशेष लाभप्रद है !!

*मात्रा व अनुपान : -* ६ से २० ग्राम, दिन में दो बार !!

           *!! सुपारी पाक !!*

*गुण व उपयोग : -* सुपारी पाक के सेवन से स्त्रियों की योनि से होने वाले विभिन्न प्रकार के स्राव (प्रदर) नष्ट होते हैं ! बन्ध्यत्व दोष को नष्ट करके उन्हे सन्तानोपत्ति योग्य बना देता है ! पुरूषों के शीघ्रपतन व शुक्रपतन एवं शुक्रमेह रोग में अत्यन्त गुणकारी है ! गर्भाशय को शक्ति देता है व योनि को संकुचित करता है !!
       विशेषतय: प्रसूता स्त्रियों के लिए अतिशय गुणकारी है ! इसके सेवन से प्रौढ़ा स्त्री भी कान्तियुक्त हो जाती है ! प्रदर रोग के कारण होने वाले कमर दर्द, सिर दर्द रहना, कमजोरी आदि में उत्तम लाभ करता है ! स्त्रियों में अमृततुल्य लाभ करता है !!

*मात्रा व अनुपान : -* १० से २० ग्राम, सुबह-शाम, गाय के दूध के साथ !!

         *!! व्याघ्री हरीतकी !!*

*गुण व उपयोग : -* व्याघ्री हरीतकी खाँसी, श्वास रोग, बद्धकोष्ठ, गले की खराबी आदि में उत्तम लाभकारी है ! कफ व वात प्रधान रोगों में इससे विशेष लाभ होता है ! कास व श्वास रोगी के लिए यह अमृत के समान लाभ प्रदान करता है !!
*मात्रा व अनुपान : -* ६ से १० ग्राम, दिन में दो बार, पानी या दूध के साथ !!

         *!! वासाहरीतकी अवलेह !!*

*गुण व उपयोग : -* वासाहरीतकी अवलेह खाँसी, क्षय, श्वास, रक्तपित्त, प्रतिश्याय, रक्तस्राव, रक्त मिश्रित दस्त, बवासीर, रक्तप्रदर, हृदय की कमजोरी, कब्ज आदि में लाभदायक है ! यह विशेष रूप से श्वास नलिका, खाँसी, कफ रोग आदि में लाभ करता है !!

*मात्रा व अनुपान : -* ६ से १० ग्राम अवलेह चटाकर ऊपर से गाय का गर्म दूध पीना चाहिए !!

            *!! वासावलेह !!*

*गुण व उपयोग : -* वासावलेह के सेवन से खाँसी, श्वास, रक्तप्रदर, रक्तपित्त, खूनी बवासीर, रक्तमिश्रित दस्त, पुरानी कफज खाँसी, श्वास-नलिका की सूजन, न्यूमोनिया, प्लूरिसी, इन्फ्लुएन्जा के बाद की खाँसी आदि में लाभ मिलता है !!

*मात्रा व अनुपान : -* ६ से १० ग्राम, दिन में दो बार शहद या रोगानुसार अनुपान के साथ !!

        *!! लऊक सपिस्ताँ !!*

*गुण व उपयोग : -* लऊक सपिस्ताँ के सेवन से कठिन से कठिन नजला, जुकाम आदि रोग शीघ्र नष्ट होते हैं ! कास-श्वास रोग में भी उत्तम ‌‌‌लाभकारी है !!

*मात्रा व अनुपान : -* ६ से १० ग्राम, ‌‌‌प्रात: शाम चाटकर ऊपर से सुखोष्ण पानी पी लें !!

          *!! मूसली पाक !!*

*गुण व उपयोग : -* मूसली पाक अत्यन्त पौष्टिक, बल-वीर्य व कामशक्ति-वर्द्धक और नंपुसकता- नाशक है ! इसके सेवन से धातु- दौर्बल्य नष्ट होकर शरीर स्वस्थ, कान्तियुक्त व बलशाली बनता है ! स्त्रियों के प्रदर रोग व पुरूषों के वीर्य दोष को नष्ट करने में यह अतिउत्तम है !!

*मात्रा व अनुपान : -* ६ से १० ग्राम, दूध या पानी के साथ !!

        *!! माजनू फलासफा !!*

*गुण व उपयोग : -* माजनू फलासफा दिल, दिमाग, वातनाड़ियों व स्नायु मण्डल की कमजोरी में उत्तम लाभ प्रदान करता है ! इसके सेवन से वातरोगों में विशेष लाभ मिलता है !!

*मात्रा व अनुपान : -* ५ से ६ ग्राम !!

           *!! मदनानन्द मोदक !!*

*गुण व उपयोग : -* मदनानन्द मोदक के उपयोग से बल- वीर्य की वृद्धि, रति- शक्ति की वृद्धि व स्तम्भन शक्ति प्राप्त होती है ! यह अपस्मार, ज्वर, उन्माद क्षय, वातव्याधि, कासव्याधि, कासश्वास, शोथ, भगन्दर, अर्श, ग्रहणी, बहुमूत्र, प्रमेह, शिरोरोग, अरूचि व वातिक- पैतिज और कफज रोग आदि में लाभ प्रदान करता है ! यह संग्रहणी व मन्दाग्नि की उत्तम दवा है ! इसका सेवन वैद्य की देखेरख में ही करना चाहिए !!

*मात्रा व अनुपान : -* ३ से ६ ग्राम, दूध या पानी के साथ !!

             *!! भार्गी गुड़ !!*

*गुण व उपयोग : -* भार्गी गुड़ पुराने कास- श्वास वाले रोगी के लिए अमृत के समान लाभ करता है, क्योंकि इसका प्रभाव वातवाहिनी व कफवाहिनी नाड़ियों पर विशेष होता है !!

*मात्रा व अनुपान : -* १० से २० ग्राम, दिन में दो बार !!

        *!! ब्राह्मी रसायन !!*

*गुण व उपयोग : -* ब्राह्मी रसायन खाँसी, दमा, क्षय, कब्जियत आदि में लाभ करती है ! इसके सेवन से शरीर व दिमाग की कमजोरी दूर हो कर आयु, बल, कान्ति व स्मरण शक्ति की वृद्धि होती है !!

*मात्रा व अनुपान : -* १० ग्राम, गाय के दूध या पानी के साथ !!

         *!! नारिकेल खण्ड पाक !!*

*गुण व उपयोग : -* नारिकेल खझउ पाक के सेवन से पुरूषत्व निद्रा व बल की वद्धि होती है ! और यह अम्लपित्त, परिणामशूल, शुक्र-क्षयादि, अपचन, उदरशूल, खट्टी डकारें व क्षय आदि रोगों मे विशेष लाभकारी है ! इसके सेवन से पौरूष की बढ़ोत्तरी हो कर शरीर को बल मिलता है ! यह शीतवीर्य, स्निग्ध व पौष्टिक है ! अम्लपित्त रोग में यह विशेष लाभकारी है !!

*मात्रा व अनुपान : -* १० से २० ग्राम, दिन में दो बार दूध या पानी के साथ !!

          *!! बाहुशाल गुड़ !!*

*गुण व उपयोग : -* बाहुशाल गुड़ के सेवन से बवासीर, गुल्म, पीनस, पांडु, हलीमक, उदर रोग, मन्दाग्नि, ग्रहणी, क्षय, आमवात, संग्रहणी, प्रमेह प्रतिश्याय आदि रोगों में उत्तम लाभ मिलता है ! यह बल, मेधा व कान्तिवर्द्धक है !!

*मात्रा व अनुपान : -* १०- १० ग्राम, दिन में दो बार, दूध या पानी के साथ !!

          *!! बादाम पाक !!*

*गुण व उपयोग : -* बादाम पाक बल, वीर्य व औज की वृद्धि करता है ! यह रस- रक्तादि धातुओं को बढ़ाकर शरीर को कान्तियुक्त बना देता है ! ध्वजभंग, नंपुसकता, स्नायु दौर्बल्य में बहुत लाभदायक है ! मस्तिष्क, हृदय की कमजोरी व शुक्र- क्षय, पित्त-विकार, नेत्र और शिरोरोग में लाभकारी है ! इसके सेवन से शरीर पुष्ट होता है ! यह सर्दियों में सेवन करने योग्य उत्तम पुष्टर्इ है ! दिमागी काम करने वाले व सिर दर्द वाले को इस पाक का सेवन अवश्य करना चाहिए !!

*मात्रा व अनुपान : -* १० से २० ग्राम, गाय के दूध या पानी के साथ !!

         *!! धात्री रसायन !!*

*गुण व उपयोग : -* धात्री रसायन कास, श्वास, क्षय, दुर्बलता, फेफड़ों की दुर्बलता, खाँसी, स्नायविक दुर्बलता आदि में उत्तम लाभ करता है ! यह पौष्टिक, वीर्यवर्द्धक रसायन व उत्तम बाजीकरण है ! यह आमाशय, मस्तिष्क, हृदय व आँतों को बलवान बनाता है ! एवं जठराग्नि को प्रदीप्त करता है !!

*मात्रा व अनुपान : -* ४ से ६ ग्राम, सुबह भोजन से ३ घण्टा पूर्व गाय के दूध के साथ, रात्रि को सोने से आधा घण्टा पहले !!

          *!! दाड़िमावलेह !!*

*गुण व उपयोग : -* दाड़िमावलेह पित्त, क्षय, रक्तपित्त, प्यास, अतिसार, संगहणी, दुर्बलता, नेत्ररोग, शिरोरोग, दाह, अम्लपित्त, धातुस्राव, अरूचि आदि रोगों में लाभदायक है ! इसके सेवन से हृदय व मस्तिष्क को ताकत मिलती है !!

*मात्रा व अनुपान : -* ६ से १० ग्राम, दिन में दो से तीन बार !!

            *!! जीवन कल्प !!*

*गुण व उपयोग : -* जीवन कल्प के सेवन से रक्ताल्पता, आल्स्य, कामला, श्वास, कास, शारीरिक क्षीणता आदि विकार नष्ट हो कर शरीर हृष्ट-पुष्ट व बलवान बनता है ! शीतकाल में इसका सेवन विशेष लाभकारी होता है !!

*मात्रा व अनुपान : -* ६ से १० ग्राम, आवश्यकतानुसार दूध के साथ !!

          *!! जीरकादि अवलेह !!*

*गुण व उपयोग : -* जीरकादि अवलेह प्रमेह, प्रदर, ज्वर, दुर्बलता, मन्द-मन्द ज्वरांश बना रहना, भूख कम या बिल्कुल न लगना, अरूचि, श्वास, तृषा, दाह व यक्ष्मा आदि रोगों में लाभदायक है !!

*मात्रा व अनुपान : -* १० ग्राम, दिन में दो बार ठण्डे पानी या दूध के साथ !!

          *!! छुहारा पाक !!*

*गुण व उपयोग : -* छुहारा पाक शरीर को बल देने वाला है ! इसके सेवन से रति शक्ति में वृद्धि होती है ! व स्वप्नदोषादि रोग नष्ट होते हैं ! इससे शुक्रक्षीणता के कारण पुरूष की व रजोदोष के कारण स्त्री की कमजोरी दूर होती है !!

*मात्रा व अनुपान : -* १० से २० ग्राम, दूध या पानी के साथ !!

*!! आयुर्वेदिक अर्क भाग २ !!*

         *!! गिलोय अर्क !!*

*गुण व उपयोग : -* इसके सेवन से आमवात, वातरक्त, प्रमेह, रक्तपित्त, जीर्णज्वर, पित्तज्वर, रक्त की गर्मी के विकार, मधुमेह आदि रोगों में उत्तम लाभ मिलता है ! मधुमेह के रोगियों को पानी पीने के दौरान २० ग्राम गिलोय अर्क को मिलाकर सेवन करने से कुछ समय में पेशाब में चीनी की मात्रा कम हो जाती है !!

*मात्रा व अनुपान : -*
    २० से ४० ग्राम, दिन में दो बार पानी के साथ !!

        *!! अजवायन अर्क !!*

*गुण व उपयोग : -* यह मन्दाग्नि, उदरशूल, अजीर्ण, गुल्म, आमदोश, अरूचि, वायु व कफ विकार आदि में उत्तम लाभ प्रदान करता है !!

*मात्रा व अनुपान : -* १० से ५० ग्राम, दिन में २-३  बार !!

        *!! गोखमुण्डी अर्क !!*

*गुण व उपयोग : -* यह फोड़े-फुंसी, खाज-खुजली, दाद, चकत्ते निकलना, विसर्प, कुष्ठ आदि में लाभकारी है ! चेहरे के काले दाद, झार्इ आदि में इसका सेवन किया जाता है ! यह खून साफ करता है ! सप्त धातुओं में प्रविष्ट हुए विष को नष्ट करता है !!

*मात्रा व अनुपान : -* २० से ५० ग्राम, दिन-रात में चार बार अकेले या बराबर मात्रा में पानी मिलाकर पिलाएं !!

         *!! चन्दन अर्क !!*

*गुण व उपयोग : -* यह कुछ अधिक शीतवीर्य है ! इसके सेवन से पेशाब में जलन हो, पेशाब रूक-रूक कष्ट के साथ आता हो, पेशाब के साथ रक्त आता हो या नाक से खून आता हो तो इस अर्क में ५ ग्राम मिश्री मिलाकर पिलाने से पेशाब बिना किसी दर्द से साफ हाने लगता है ! तथा रक्त का आना भी बन्द हो जाता है !!

*मात्रा व अनुपान : -* २० से ४० ग्राम, दिन में दो बार !!

             *!! ब्राह्मी अर्क !!*

*गुण व उपयोग : -* इसके सेवन से याददाशत, कमजोरी, अपस्मार, उन्माद, मूच्र्छा, हिस्टीरिया, स्मरणशक्ति की कमी, दिमाग में थकावट या खुश्की रहना, नींद कम आना, मानसिक अशान्ति व भ्रम बना रहना, चक्कर आना आदि में विशेष लाभ मिलता है ! याददाश्त बढ़ाने में यह गुणकारी है ! आँखों के आगे अंधेरा-सा मालूम पड़ना या चक्कत आदि रोगों में इस अर्क को दूध के साथ मिलाकर या अन्य औषधीयों के साथ अनुपान रूप में लेने से शीघ्र एवं उत्तम लाभ होता है !!

*मात्रा व अनुपान : -* २० से ४० ग्राम, दिन-रात में दो से चार बार या औषधीयों के अनुपान रूप में प्रयोग करें !!

        *!! पुनर्नवा अर्क !!*

*गुण व उपयोग : -* इसके सेवन से कामला, पांडु, हलीमक, उदर रोग, मूत्र कृच्छ, प्रमेह, शोथ, रक्तपित्त, वृक्क विकार, यकृत शोथ, गर्भाशय शोथ आदि रोगों में विशेष लाभमिलता है ! गर्भाशय शोथ में इसके साथ बराबर मात्रा में दशमूल अर्क मिलाकर देने से उत्तम लाभ होता है !!

*मात्रा व अनुपान : -* २० से ५० ग्राम, दिन में दो से तीन बार !!

         *!! त्रिफला अर्क !!*

*गुण व उपयोग : -* इसके सेवन से प्रमेह, कामला, पेट फूला हुआ रहना, मधुमेह, स्वप्नदोष, आमवात, मेदावृद्धि, शरीर से पसीना निकलना तथा पसीने से दुगन्ध आना, पांडुरोग, वातरोग, वातरक्त, खाज-खुजली, पामा, कुष्ठ, कब्ज आदि रोगों में विशेष लाभ मिलता है !!

*मात्रा व अनुपान : -* २० से ८० ग्राम, दिन-रात में ३ से ४ बार आवश्यकतानुसार दें !!

              *!! दशामूल अर्क !!*

*गुण व उपयोग : -* इसके सेवन से प्रसूत विकारों, हृदय रोग, दिमागी कमजोरी, शोथ रोग, गुल्म, उदर रोग, मानसिक अशान्ति, अनिद्रा, हृदय की कमजोरी आदि में उत्तम लाभ मिलता है ! किन्ही कारणों से हृदय में लगने वाले झटकों में व मंद-मंद दर्द में यह विशेष लाभकारी है ! ऐसी स्थिती में अर्जुन की छाल के चूर्ण के साथ इसका सेवन करने से शीघ्र लाभ होता है !!

*मात्रा व अनुपान : -* १० ग्राम से १०० ग्राम, दिन में चार बार अकेले ही या वातनाशक औषधीयों के अनुसार रूप में दें !!

हाथ पैर दुखना , बुखार जैसा लगना

....मौसम परिवर्तन...
इस समय वर्षा के कारण कही ज्यादा पानी है तो कही कम पानी की वजह से मौसम काफी खराब है ! अत्यधिक गर्मी और उमस से हाथ पैर दुखना , बुखार जैसा लगना सामान्य बात है ! इस सब से बचने के लिए २१ पत्ती तुलसी की ४ दाने काली मिर्च २ लौंग और ५ ग्राम गिलोय का पाउडर ३ कप पानी में उबालकर जब वह एक कप के लगभग हो जाए तब उसे छानकर ठंडा करके सुबह खाली पेट या रात को आखिर में सोते समय हर ३ दिन में एक बार सेवन करे ! छोटी मोटी बीमारियों से बचे रहेंगे !!!

बाल घने करने के उपाय और झड़ने से रोकने के उपाय

बाल घने करने के उपाय और झड़ने से रोकने के उपाय

अब देखे की बाल कैसे घने बनाये बाल घने करने के उपाय इस प्रकार है| ऐसा अक्सर होता है की बाल झड़ते रहते है| अगर नए बाल जल्दी से न उगे तो बाल घने नहीं लगते है| बालों को उगने के लिए और गिरने से बचने के लिए यह प्रयोग करे|

बालों को उगाने का तरीका है प्याज का रस निकाल के बोतल में भर के फ्रिज में रख दे| हर रोज यह रस को बालो के जड़ो में लगा के ३० मिनट तक रहने दे और बाद में धो दे|

एक अंडा ले के एक बरतन में तोड़ दे और नारियल का तेल और निम्बू डाल के अच्छी तरह फेटे और इस को बालों के जड़ो में मसल के लगा दे और ३० मिनट तक रहने दे|

दहीं को दो तीन दिनों तक रहने दे और बिलकुल खट्टा हो जाए तब बालों में लगा के रखे तो बाल गिरने से बचेंगे और काले भी दिखेंगे| लम्बे समय तक सफ़ेद भी नहीं होंगे|

ताजा आमला का रस बालों के लिए उत्तम है|

बालों को घना करने का तरीका (balo ko ghana karne ka tarika in hindi) एक और है की आप हरे धनिये का रस निकल के बालों में लगाये|

बाल झड़ते है या तो रुसी है और ऐसे कारणों के लिए आप नीम के पत्ते को उबले और यह पानी को निम्बू के रस के साथ मिला के बालों में लगा दे| रुसी से बाल झड़ते है तो रुसी निकल जाने पर बाल नहीं झड़ेगे और घने दिखने लगेंगे| तुलसी का रस भी इस हालात में फायदेमंद है| लहसुन को कूट के अरण्डी के तेल में दाल के गरम करे और इस तेल में नीम के बीज का तेल मिला के लगाये तो रुसी और डर्मेटाइटिस मिट जाएगा और बाल नहीं झाडेंगे|

बालों के लिए आयुर्वेदिक उपाय (balo ke liye ayurvedic upay) में जटामांसी, ब्राह्मी, भृंगराज और आमला को उत्तम माना गया है| हर हप्ते एक बार तो इन सभी को मिला के इन का रस निकाल के बालों में मल देने से बाल लम्बे होंगे, घने होंगे और काले भी रहेंगे|

काली मिर्च पिसी हुई, निम्बू के बीज पिसा हुआ, यष्टिमधु चूर्ण सभी को प्याज के रस में मिला के बालों के जड़ो में मल दे तो गिरने से बचेंगे आप के बाल और लम्बे भी होने लगेंगे|

बादाम का तेल भी बालों को घाना बनाने में मददगार है|

उड़द दाल को भिगोके कूट दे और दही में मिला के बालों में लगाये|

तिल का तेल और सरसों का तेल का उपयोग बाल झड़ने से रोकने में कारगार है|

गरम पानी से कभी भी बाल न धोये|

बालों को धोने के बाद चाय का पानी लगा दे|

हप्ते में २ से ३ बार ऊपर बताये गए नुस्खे का प्रयोग करे|

बाल अगर टूटते है और बहुत ही महीन है तो अंडे का सफ़ेद भाग और घृत कुमारी (एलोवेरा) का मिश्रण लगाये|

रात को सोने से पहले बड़े नोक वाले कंघी से अच्छी तरह से बालों के जड़ो में घुमाये| चमकीले बनाने के लिए बाद में नरम रेशे वाले ब्रश से ब्रश करें | हर दूसरे या तीसरे दिन बाल लम्बे करने का तेल उपयोग करे और उँगलियों से १० मिनट तक मालिश करते रहे|

बालों के लिए बालों को लम्बा करने के घरेलु नुस्खे (balo ko lamba karne ke gharelu nuskhe in hindi), बालों को बढ़ने के उपाय (balo ko badhane ke upay in hindi) और बाल गिरने से रोकने के उपाय आप ने जान लिया| साथ में यह भी जरूरी है की पोषण होना चाहिए, भरपूर पानी पीना चाहिए और नींद भी पूरी लेनी चाहिए| तनाव मुक्त रहे, बालों को धूप से बचा के रखे|

Saturday, October 14, 2017

डेंगू

डेंगू को 48 घंटे मे समाप्त
करने की क्षमता रखने वाली
दवा ।   कृपया इस संदेश को
अधिक से अधिक लोगो तक भेजे महत्वपूर्ण सूचना :- 
यदि किसी को डेगूँ या साधारण बुखार के कारण प्लेटलेट्स कम हो गयी है तो एक होमोपेथिक दवा है।
EUPATORIUM PERFOIAM 200
liquid dilution homeopathic medicine.
इसकी 3 या 4 बूँदें प्रत्येक 2-2 घँटें में साधारण पानी में ड़ाल कर मात्र 2 दिन पिलायें । 
यदि आप पुण्यं कमाना चाहते हैं तो यह संदेश धर्म-प्रसाद मान कर सभी को प्रेषित करे
🙏🌹

Monday, September 18, 2017

यूरिन इन्फेक्शन

क्या हैं यूरिन इन्फेक्शन के सिम्पटम्स?

  • बार-बार यूरिन आना
  • यूरिन से बदबू आना
  • यूरिन में जलन होना
  • पेट में दर्द होना
  • कमर में दर्द होना

यूरिन इन्फेक्शन से बचने के लिए क्या करें?

TIP#1हफ्ते में एक बार नारियल पानी पिएं।
इससे बॉडी के टॉक्सिन्स दूर होते हैं। यूरिन इन्फेक्शन से बचाव होता है।

TIP#2 नींबू पानी में शहद मिलाकर पिएं।

इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स, अल्केलाइड्स यूरिन इन्फेक्शन से बचाते हैं।

यूरिन इन्फेक्शन से बचने के लिए और क्या करें?

नींबू, ऑरेंज, टमाटर जैसी चीजें डाइट में शामिल करें। पानी ज्यादा पिएं। रोज छाछ पिएंगे तो यूरिन इन्फेक्शन से बचाव होगा।

यूरिन इन्फेक्शन से बचने के लिए क्या बरतें सावधानी

हाइजीन का खास ख्याल रखें। पब्लिक प्लेस में यूरिन करने से पहले फ्लश जरूर करें। इस तरह यूरिन करने से इन्फेक्शन के चांस बढ़ते हैं।

यूरिन इन्फेक्शन में क्या अवॉइड करें?

देर तक यूरिन रोक कर न रखें। इससे यूरिन इन्फेक्शन हो सकता है। इसके अलावा टॉयलेट को गंदा न रहने दें। इससे यूरिन रिलेटेड प्रॉब्लम बढ़ती हैं।

यूरिन इन्फेक्शन से बचने के लिए इस बात का ध्यान रखें?

खुली जगह पर यूरिन करने से बचें। इससे यूरिन इन्फेक्शन के चांस बढ़ते हैं। ज्यादा चाय, कॉफी न पिएं। इससे यूरिन प्रॉब्लम हो सकती हैं।
आगे की 6 स्लाइड्स में जानिए यूरिन इन्फेक्शन से बचने के आसान तरीके...

Sunday, September 10, 2017

घुटनो का दर्द

*घुटनों के दर्द की दवा – मात्र 7 दिन में दर्द गायब*

    

घुटनों के दर्द की समस्या आजकल आम होती जा रही है कई बार ऐसा भी होता है कि किसी कारणवश चोट लग जाने से या बढ़ती हुई उम्र के कारण या फिर व्रद्धावस्था में हड्डियों के कमजोर हो जाने से अक्सर घुटनों में दर्द होने लगता है. इस पोस्ट में हम आपको घुटनों  के दर्द से राहत दिलाने के लिए कुछ घरेलू नुस्खे बता रहे हैं जिनका उपयोग करने पर लगभग 7 दिन में ही आपको घुटनों के दर्द से राहत मिल जाएगी.

*घुटनों के दर्द का इलाज –*

यदि आपके घुटनों में लगातार या थोड़ा-थोड़ा दर्द या तेज दर्द बना रहता है तो यहां दिए गए घरेलू नुस्खे आजमाएं और आपको 7 से लेकर 15 दिन के अंदर-अंदर इन घरेलू नुस्खों से पूरा पूरा आराम मिल जाएगा और फिर कभी आपके घुटने दर्द नहीं करेंगे. घुटनों के लिए दर्द निवारक दवा बनाने के लिए आप नीचे दिए गए कुछ नुस्खे आजमाएं.

*दर्द निवारक हल्दी का पेस्ट*

किसी चोट का दर्द हो या घुटने का दर्द आप इस दर्द निवारक हल्दी के पेस्ट को बनाकर अपनी चोट के स्थान पर या घुटनों के दर्द के स्थान पर लगाइए इससे बहुत जल्दी आराम मिलता है. दर्द निवारक हल्दी का पेस्ट कैसे बनाएं इसके लिए आप सबसे पहले एक छोटा चम्मच हल्दी पाउडर लें और एक चम्मच पिसी हुई चीनी और इसमें आप बूरा या शहद मिला लें, और एक चुटकी चूना मिला दें और थोड़ा सा पानी डाल कर इसका पेस्ट जैसा बना लें.

इस लेप को बनाने के बाद अपने चम्मच के स्थान पर यार जो घुटना का दर्द करता है उस स्थान पर स्लिप को लगा ले और ऊपर से किराए बैंडेज या कोई पुराना सूती कपड़ा बांध दें और इसको रातभर लगा रहने दें और सुबह सादा पानी से इसको धो ले इस तरह से लगभग 7:00 से लेकर 1 सप्ताह से लेकर 2 सप्ताह तक ऐसा करने से इसको लगाने से आपके घुटने की सूजन मांसपेशियों में खिंचाव अंदरुनी च** होने वाले दर्द में बहुत जल्दी आराम मिलता है और यह पृष्ठ आप के दर्द को जड़ से खत्म कर देता है.

Saturday, July 22, 2017

थैलेसिमिया

*🌺☘थैलेसिमिया की बीमारी का उपचार - thalassemia ki bimari ka ilaj🌺☘*

🌺थैलेसिमिया की बीमारी माता – पिता से बच्चों को हो जाती है | यह एक संक्रमित व वंशानुगत रोग है जो पीड़ी दर पीड़ी पूर्वजों से बच्चों में फैलता जाता है | यह रोग अधिकतर  अरब और एशिया के लोगो में पाई जाती है | इस बीमारी से बचने के लिए सावधानी बहुत जरूरी है जैसे विवाह से पूर्व पति और पति दोनों का टेस्ट करवा लिया जाये . ऐसा करने से उनकी संतान को ये बीमारी होने से बचाया जा सकता है , इस बीमारी शरीर के अंदर शुद्ध रक्त का निर्माण नहीं हो पाता और अशुद्ध रक्त का निदान भी नहीं हो पाता जिसके कारण सिस्टम गड़बड़ में आ जाता है, हिन्दू धर्म में अपने गौत्र को छोड़ कर शादी करने की परम्परा यहाँ पर वैज्ञानिक प्रमाणित होती है, ऐसा करने से वंशानुगत बीमारी होने की संभावना 80 % तक कम हो जाती है.  8 मई को पूरे विश्व में थैलेसिमिया दिवस मनाया जाता है

*☘थैलेसिमिया के लक्षण -*

🌺इस बीमारी में रोगी का सरीर पीला पड़ जाता है,
🌺रोगी के शरीर में शुद्ध खून बनना बंद हो जाता है,
🌺हड्डियों का विकास रूप जाता है,
🌺सोचने विचारने की क्षमता कम हो जाती है,
🌺बच्चों में सरीर के विकास की दर कम हो जाती है,
🌺बड़ो में थकावट अधिक होने लगती है,
थोड़ी बहुत मेहनत के बाद चक्कर आने लगते है,

*☘इस बीमारी की रोकथाम हम आयुर्वेदिक तरीके से कर सकते है | जो इस प्रकार से है |*

☘सर्वकल्प  क्वाथ  (sarvkalp kawath) :-  ३०० ग्राम

*☘बनाने की विधि :-* एक बर्तन में लगभग ४०० मिलीलीटर पानी लें | इस पानी में एक चम्मच सर्वकल्प क्वाथ की मिलाकर इसे मन्द अग्नि पर पकाएं | थोड़ी देर पकने के बाद जब इसका पानी १०० मिलीलीटर रह जाए तो पानी को छानकर सुबह के समय और शाम के समय खाली पेट पीये |

☘सामग्री : -

➖कुमारकल्याण रस (kumar kalyan rasa) :- १- २ ग्राम

➖प्रवाल पिष्टी (praval pisti) :- ५ ग्राम

➖कहरवा पिष्टी (kaharva pisti) :- ५ ग्राम

➖मुक्ता पिष्टी (mukta pisti) :- ५ ग्राम

➖गिलोय सत (giloy sat) :- १०  ग्राम

➖प्रवाल पंचामृत (praval panchamrit)  :- ५ ग्राम

☘इन सभी आयुर्वेदिक औषधियों को आपस में मिलाकर एक मिश्रण बनाए | अब इस मिश्रण की बराबर मात्रा में ६० पुड़ियाँ बना लें और किसी डिब्बे में बंद करके रख दें | रोजाना एक – एक  पुड़ियाँ  और शाम के समय खाना खाने से आधा घंटा पहले ताज़े पानी के साथ या शहद के साथ खाएं |

🌺सामग्री : -

➖कैशोर गुगुल (Kaishor guggal ) :-  ४० ग्राम
➖आरोग्यवर्धिनी वटी(aarogaya vardhini vati):- २० ग्राम

🌺इन दोनों औषधीयों की एक – एक गोली रोजाना सुबह और शाम के खाना खाने के बाद लें | इस औषधि को हल्के गर्म पानी के साथ लें |

☘सामग्री : -

➖धृतकुमारी स्वरस(Dhritkumari Savrasa) : - १० मिलीलीटर

➖गिलोय स्वरस (giloye Savrasa) :- १० मिलीलीटर

🌺इन दोनों औषधियों में से किसी एक रस में गेहूँ के ज्वारे का रस मिलाकर पीये | इस उपचार को रोजाना सुबह और शाम खाली पेट पीये | बहुत लाभ मिलेगा |
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