Wednesday, May 24, 2017

पान के फायदे (Benifit of Betel Leaf)

पान  (Betel Leaf) के पत्ते के 20 अद्भुत फायदे : 
कब्ज : पान के पत्ते चबाना कब्ज के लिए भी एक कारगर इलाज है। कब्ज की स्थिति में पान के पत्ते पर अरंडी का तेल (Castor Oil) लगाकर चबाने से कब्ज में राहत मिलती है।
खाँसी : पान के 15 पत्तो को 3 ग्लास पानी में डाल ले. इसके बाद, इसे तब तक उबाले, जब तक पानी उबल कर 1/3 ना रह जाए। इसे दिन में 3 बार पिए।
पाचन तंत्र : पान के पत्ता का वैसे माउथ फेशनर की तरह इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन इसे चबाने से हमारें लिए कापी फायदेमंद हो सकता है। जब हम इसे चबा कर खाते है तब हमारी लार ग्रंथि पर असर पड़ता है। इससे इससे सलाइव लार बनने में मदद मिलती है। जो हमारी पाचन तंत्र के लिए बहुत ही जरुरी है। अगर आपने भारी भोजन भी कर दिया है उसके बाद आप पान खा लें। इससे आपको भोजन आसानी से पच जाएगा।
ब्रोंकाइटिस : पान के 7 पत्तो को 2 कप पानी में रॉक शुगर के साथ उबाले। जब पानी एक ग्लास रह जाए तो उसे दिन में तीन बार पिए. ब्रोंकाइटिस में लाभ होगा।
शरीर की दुर्गंध : 5 पान के पत्तो को 2 कप पानी में उबाले। जब पानी एक कप रह जाए तो उस पानी को दोपहर के समय पी ले। शरीर की दुर्गंध दूर हो जाएगी।
घाव : पान के पत्ते को पीस कर जले हुए जगह पर लगाए. कुछ देर बाद इस पेस्ट को धो दे और वहा शहद लगा कर छोड़ दे। घाव जल्दी ठीक हो जाता हैं।
गैस्ट्रिक अल्सर : पान के पत्ते के रस को पीने से गैस्ट्रिक अल्सर को रोकने में काफी मदद करता है। क्योंकि इसे गैस्ट्रोप्रोटेक्टिव गतिविधि के लिए भी जाना जाता है।
नकसीर : गर्मियो के दिनों में नाक से खून आने पर पान के पत्ते को मसलकर सूँघे। इससे बहुत जल्दी आराम मिलेगा।
मुँह के छाले : मुँह में छाले हो जाने पर पान को चबाए और बाद में पानी से कुल्ला कर ले। ऐसा दिन में 2 बार करे। राहत मिलेगी। आप चाहे तो ज़्यादा कत्था लगवा कर मीठा पान खा सकते हैं।
कैंसर : पान चबाने से ओरल कैंसर से भी बचा जा सकता है बशर्ते की पान का इस्तेमाल जर्दा और तम्बाकू के बिना किया जाये। पान के पत्ते में मौजूद एब्सकोर्बिक एसिड (Abscorbic acid) और अन्य एंटीऑक्सीडेंट मुंह में बन रहे हानिकारक कैंसर फ़ैलाने वाले तत्वों को नष्ट करते हैं। इसके सेवन से मुंह की दुर्गन्ध भी जाती है।
आँखों की जलन और लाल होना : 5-6 छोटे पान के पत्तो को ले और उन्हे एक ग्लास पानी में उबाले. इस पानी से आँखो पर छींटे मारे। आँखो को काफ़ी आराम मिलेगा।
खुजली : पान के 20 पत्तो को पानी में उबाले। अच्छी तरह से उबलने के बाद इस पानी से नहा ले। खुजली की समस्या ख़त्म हो जाएगी।
मोटापा : वजन कम कर रहे लोगो के लिए पान के पत्ते चबाना बहुत ही फायदेमंद होता है। पान के सेवन शरीर का मेटाबोलिज्म आश्चर्यजनक रूप से बढता है। जिस से वजन कम करने में सहयता मिलती है। इसके सेवन से शरीर से अतिरिक्त वसा भी नष्ट होती है।
मसूड़ो से खून आना : 2 कप पानी में 4 पान के पत्ते को डाल कर उबाल ले। इस पानी से गरारे करे। मसूड़ो से खून आना बंद हो जाएगा।
पौरुष शक्ति : पान को से*क्स का सिंबल भी माना जाता है। से*क्स संबंध से पहले खाने से इस क्रिया का अधिक सुख लिया जा सकता है। इसलिए नए जोड़े को पान खिलाने की परंपरा भी काफी पुरानी है। इसलिए इसे दिया जाता है।
स्तनपान करवाने की समस्या : पान के कुछ पत्तो को ले। इन्हे धोने के बाद इन पर तेल लगा कर हल्का सा गर्म कर ले और गुनगुना होने पर इसे स्तनों (ब्रेस्ट निपल्स) के आस-पास रखे, इससे सूजन चली जाएगी और बच्चें को दूध पिलाने में आसानी होगी।
मुँह की बदबू : पान के पत्ते चबा ले या पानी में उबाल कर गरारे करे। मूह से बदबू की समस्या दूर हो जाएगी।
मुहांसे : पान के 8 पत्ते अच्छी तरह से पीस ले। इसे 2 ग्लास पानी में गाढ़ा होने तक उबाले। बाद में इसे फेसपैक की तरह इस्तेमाल करे। मुहांसे दूर हो जाएँगे।
महिलाओं में श्वेत प्रदर : पान के 11 पत्ते 2.5 लिटर पानी में उबाल ले। इस पानी से अपनी योनि को धोए। सफेद पानी आने की समस्या में आराम मिलेगा।
बालतोड़ : आयुर्वेद में पान के पत्तों का इस्तेमाल बालतोड़ के उपचार के लिए किया जाता है। बालतोड़ (Boil) हो जाने पर पान के पत्तों को हल्का गर्म कर लें और उसपर अरंडी का तेल लगाकर बालतोड़ वाले स्थान पर चिपकाएँ।

पथरी का इलाज

पथरी का केवल एक खुराक से इलाज
केवल एक दिन की खुराक वो भी केवल एक बार लेनी हे
व्यक्ती गत अनुभूत हे करीब सो लोगों की निकल चुकी हे
पॉच सात mm की तक निकल सकती हे बडी होये तो कुछ कह नही सकते
वेसे इस दवा की एक खुराक पॉच से दस ग्राम की होती हे दवा का नाम हमारे यहां का पंसारी *विष्णुकांता* के नाम से जानता हे
हम खरीद कर लाते हें व लोगों को फिरी मे देते हें
इस दवा को लेने के लिये सुबह पॉच बजे बासी मुंह लेनी होती हे पॉच सात गिलास पानी गुनगुने से लेनी होती हे
बिना मुंह धोये बिना खाये पिये रहना होता हे आठ घंटों तक
सोना नही खाना नही पीना नही कुछ ना कुछ काम करते रहें बस
यहा प्रक्रीया हे इसकी !
आठ घंटे बाद सब कुछ ले सकते हें
पेशाब के द्वारा बाहर आ जायेगी पथरी

श्वेत प्रदर (ल्यूकोरिया)

श्वेत प्रदर  (ल्यूकोरिया  )
जासु कृपा कर मिटत सब आधि,व्याधि अपार
तिह प्रभु दीन दयाल को बंदहु बारम्बार
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चूहे की मेगनी को पीसकर बराबर मिश्री मिला कर सुबह निराहार 3 माशा दुध से ले तीन दिन ले तीन दिन मे कैसी भी कितनी भी दिन का रोगी हो शर्तिया ठीक होता है.
ये अनुभूत नुक्सा है!

Friday, May 19, 2017

शुगर रोग कम और षड्यंत्र ज्यादा है

जानिए डायबिटीज का सच, ये बातें डॉक्टर आपको कभी भी नही बताएगा
आजकल शुगर के रोगी इतने ज्यादा बढ़ गए हैं कि हर गली हर मोहले और हर घर में आपको कम से कम एक रोगी तो जरुर मिल ही जाता है। लेकिन क्या आपने कभी यह सोचा है कि रोज नित नई तकनीक और दवाओं पर हो रहे रिसर्च के बावजूद शुगर रूपी यह राक्षसी रोग बढ़ता ही क्यों जा रहा है।आज का हमारा यह विशेष लेख इसी बात के ऊपर आधारित है ।आज हम इस लेख के द्वारा हमारे सभी मित्रो को डोक्टरो और बड़ी बड़ी दवा कंपनियों के षड्यंत्र के बारे में बताने जा रहे हैं ।आप से अनुरोध है कि इस पोस्ट को थोडा ध्यान से पढ़े और पढ़ने के बाद इसे शेयर करके ज्यादा से ज्यादा लोगो तक इस जानकारी को पहुचाए।Know the truth of diabetes
आइये अब हम मैन मुद्दे पर आते हैं मित्रो क्या आप जानते हैं, 1997 से पहले Fasting Diabetes की limit 140 थी।फिर दवा कंपनियों ने डॉक्टर्स के साथ मिलकर Fasting Sugar की limit 126 कर दी।इससे World Population में 14% Diabetes रोग से पीड़ित लोग बढ़ गए। उसके बाद 2003 में medical Asso. ने फिर से Fasting Sugar की limit कम करके 100 कर दी। यानि फिर से कुल जनसंख्या के करीबन 70% लोग Diabetes माने जाने लगे।डॉक्टर से पूछने पर उनका तर्क होता है कि लोगो का खान पान बदला है ये बात कुछ हद तक सच है लेकिन इतना भी नही बदला कि इतनी ज्यादा संख्या में लोग इसके मरीज हो जाएँ गावों के लोग तो आज भी लगभग वही पुरानी जीवन शैली अपनाकर जी रहें हैं फिर भी शहरों से ज्यादा गावों में शुगर के मरीज हैं
दरअसल Diabetes Ratio या limit को तय करने वाली कुछ Pharmaceutical कंपनियां थीं। जों अपना Business बढ़ाने के लिए यह सब कर रही हैं।
इतना ही नही यह मानव भक्षी कंपनियों ने सिर्फ इतना ही नहीं किया अपितु इन्होंने अपने प्रयोगशालाओं में बनने वाले उपकरणों की सेन्स्टिविटी को इतना अधिक सेट कर रखा है कि जब तक रोगी लास्ट स्टेज पर ना पहुंचे तब तक इनकी रिपोर्ट में सब कुछ नार्मल ही रहता है । क्योंकि यदि रोगी को पता चल गया कि उसे 20 % सुगर है , या 20 % हार्ट ब्लोकेज है तो वह रसोईघर में रखी औषधियों से स्वयं को ठीक हो सकता है ।लेकिन क्या आपको पता है कि
Actually Diabetes कैसे Count करनी चाहिए ?
कैसे पता चलेगा कि आप Diabetes हैं या नहीं ?
पुराने जमाने के इलाज़ के हिसाब से Diabetes Count करने का एक सरल उपाय है ।
आप की उम्र + 100 जी हाँ यही एक सच्चाई है
अगर आपकी उम्र 65 है तो आपका शुगर लेवल भोजन के बाद 165 होना चाहिए ।
अगर आपकी उम्र 75 है तो आपकी भोजन के बाद सामान्य शुगर लेवल 175 होना चाहिए ।
यह होता है उम्र के हिसाब से जैसे – जिसकी उम्र 80 वर्ष है उनकी भोजन के बाद सामान्य शुगर 180 होगी ।
उसके साथ साथ यह भी सच है कि,अगर आपका पाचन तंत्र अच्छा है।आपको कोई टेंशन नहीं है ।आप अच्छा खाना खाते हो,आप जंक फ़ूड , spicy , heavy oily food नहीं खाते ।आप प्रतिदिन योग या प्राणायाम करते हैं और आपका वजन आपकी लंबाई के अनुरूप लगभग बराबर है , तो आपको शुगर नहीं हो सकती है ।यह एक पूर्ण सत्य है। बस टेंशन न लें अच्छा खाना खाएं योग करते रहें ।

घरेलू गर्भनिरोधक उपाय

घरेलू गर्भनिरोधक उपाय आजमायें
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वैसे तो गर्भनिरोधकों के तमाम विकल्प बाजार में मौजूद हैं लेकिन अगर आप इनके केमिकल या साइड एफेक्ट से दूरी रखना चाहते हैं या फिर इन प्रचलित तरीकों में यकीन नहीं रखते हैं तो आपके लिए आयुर्वेद में कु‌छ घरेलू उपाय भी हैं यदि आप आयुर्वेद पर यकीन रखते हैं तो इन उपायों का गर्भनिरोधक(Contraceptive)के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं-
वैसे तो इनके साइड एफेक्ट नहीं है लेकिन इनका इस्तेमाल आप किसी अनुभवी आयुर्वेदिक डॉक्टर के परामर्श से करें तो प्राकृतिक और सुरक्षित तौर पर गर्भनिरोध और बेफिक्र सेक्स लाइफ आसान हो सकेगी-
घरेलू उपाय-
1- मासिक धर्म के पश्‍चात स्‍नान करने के बाद एरंड के बीज(Castor seeds) की गिरी छीलकर खाने से गर्भ नहीं ठहरता है एक गिरी निगलने पर एक वर्ष तथा दो गिरी निगलने पर दो वर्ष व तीन गिरी निगलने पर तीन वर्ष तक बच्‍चे पैदा नहीं होंगे बच्‍चे पैदा करने की इच्‍छा हो तो गिरी खाना बंद कर दें एक वर्ष बाद पुन: गर्भधारण करने की क्षमता उत्‍पन्‍न हो जाती है किसी भी हाल में एक साथ तीन से अधिक गिरी न खाएं क्युकि यह नुकसान दायक हो सकता है-
2- पीरियड के बाद लहसुन(Garlic) की दो कलियां छीलकर निगल जाएं तो गर्भ नहीं ठहरेगा-
3- पीपल, सुहागा व बायबिडंग को बराबर-बराबर लेकर पीस लें- जिस दिन पीरियड आरंभ हो उस दिन से सात दिनों तक छह ग्राम चूर्ण पानी से खाएं- एक वर्ष तक गर्म नहीं ठहरेगा-
4- तालीसपत्र व गेरू को 25 ग्राम लेकर चार दिनों तक ठंडे पानी से पीने से स्‍थाई बांझपन आ जाती है-
5- सीताफल का बीज(Pumpkin seeds) पीसकर योनी में मलने से गर्भ नहीं ठहरेगा और इससे गर्भाशय की सफाई भी हो जाती है-
6- पीरियड बंद होने के बाद एक कप तुलसी के पत्‍ते(Basil leaves)लेकर काढ़ा बनाएं और तीन दिन तक लगातार पीएं इससे गर्भ भी नहीं ठहरेगा और कोई नुकसान भी नहीं होगा-
7- हल्‍दी की गांठ(turmeric root) पीसकर उसे छान ले- छह ग्राम पाउडर पानी के साथ खाएं इसे पूरे पीरियड के दौरान खाएं तो गर्भ नहीं ठहरेगा-
8- पीरियड के पांचवें दिन करेले का रस(Bitter gourd juice) पीने से गर्भ नहीं ठहरता है-
9- संभोग के दौरान नीम के तेल(Neem oil) में रूई का फाहा भिंगोकर योनी में रखने से गर्भ ठहरने की संभावना नहीं रहती है-
10- कैस्टर यानी अरंडी के बीज को फोड़ें और इनमें मौजूद एक सफेद बीज को निकालें और सेक्स के 72 घंटे के भीतर महिलाएं इसका सेवन करें तो यह आई-पिल की तरह ही गर्भधारण रोक सकता है- महिलाएं इसका सेवन पीरियड्स के तीन दिनों तक करें तो एक महीने तक इसका प्रभाव रहेगा-
11- त‌िल के तेल में सेंधा नमक का टुकड़ा डुबोएं और सेक्स के बाद इसे महिलाएं अपने प्राइवेट पार्ट पर कम से कम दो मिनट तक रखें-इससे वीर्य गर्भाशय में पहुंचते ही नष्ट हो जाएगा- महिलाएं सेक्स के बाद प्राइवेट पार्ट को गुनगुने पानी और सेंधा नमक से भी साफ कर सकती हैं-इससे भी गर्भ नहीं ठहरेगा-
12- मासिक धर्म से शुद्ध होने पर (पांचवें दिन से) चमेली की एक कली (चमेली का फूल, जो खिला न हो) पानी के साथ रोज लगातार तीन दिन तक निगलने से एक वर्ष तक गर्भनिरोधक का काम करेगा-
13- सूखे पुदीने के पत्ते का पाउडर बनाएं और स्टोर कर लें-सेक्स के पांच मिनट के बाद एक ग्लास गुनगुने पानी के साथ एक चम्मच पाउडर का सेवन करें-महिलाओं के लिए यह नैचुरल कंट्रासेप्टिव दवा का काम करेगा-
14- गुड़हल के फूल का पेस्ट बनाएं इसमें स्टार्च मिलाएं-पीरियड्स के शुरुआती तीन दिनों तक इसका सेवन कंट्रासेप्टिव की तरह ही काम करेगा-
15- संभोग के समय प्‍याज का रस योनी में रखने पर शुक्राणु बेसर हो जाते हैं-
16- आंवला, रसनजनम और हरितकारी को समान मात्रा में लेकर इनका पाउडर बनाएं और स्टोर करें- ये औषध‌ियां क‌िसी भी आयुर्वेदिक स्टोर पर म‌िल जाएंगी- महिलाएं इनका सेवन पीरियड्स के चौथे दिन से 16वें दिन तक करें तो यह गर्भनिरोधक गोलियों की तरह ही असरदार होता है-
17- यदि आप गर्भ निरोधक प्रयोग नहीं करना चाहते या गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन नहीं करना चाहते हों तो चावल धुले पानी में चावल के पौधे की जड़ पीसकर छान लें और इसमें शहद मिलाकर पिला दें- यह हानिरहित सुरक्षित गर्भनिरोधक उपाय है
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महिला संजीवनी 
गुरुवेंद्र सिंह शाक्य
जिला -एटा , उत्तर प्रदेश
9466623519
संजीवनी परिवार 
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Tuesday, May 16, 2017

पैर छूने का भारतीय रिवाज़

हमारे पूर्वजो और प्राचीन समय के विद्वानों की सबसे बड़ी खोज यह थी की उन्होंने प्रक्रति के कई रहस्यों को आज से हजारो सालो पहले ही समझ लिया था, वो भी जब उस दौर में आजकल जैसी सुविधाएँ नहीं थी. न सिर्फ उन्होंने ने इन रहस्यों को समझा, उनके महत्त्व को पहचाना बल्कि साथ ही साथ उन्होंने इन बातों को हमारे दिनचर्या में ऐसे जोड़ा, जिस से की वो हमारे संस्कार बनते चले गए.
अपने गुरुजन बड़े बूढों और माता पिता का पैर छूना (Feet-touching) एक ऐसा ही संस्कार है. आजकल लोग इस संस्कार का महत्व नहीं समझने की वजह से इसे नहीं करते या व्यर्थ की खानापूर्ति मान लेते है.
पैर छूने के पीछे छुपा वैज्ञानिक/मानसिक कारणScientific & Psychological Reason behind touching feet :
विज्ञानं इस बात को सिद्ध कर चुका है कि हमारे शरीर के चारो तरफ एक आभामंडल (Aura) होता है. लोगों की ऊर्जा-स्तर (energy level) के अनुसार हर मनुष्य का आभा मंडल अलग ऊर्जा और अलग रंग का होता है. जैसे कुछ लोग फुर्त और कुछ आलसी होते है. यह आभा मंडल हमारे ऊर्जा, मानसिक शक्ति, इच्छा-शक्ति (will power) और विचारो के प्रकार पर निर्भर करता है. हमारे विचारो और व्यव्हार से इनमे परिवर्तन आता रहता है.जब हम किसी का पैर छूते है तो यह दिखाता है की हम अपने अहम् से परे होकर किसी की गुरुता , सम्मान और आदर की भावना से चरण स्पर्श कर रहे है. किसी के समक्ष झुकना समर्पण और विनीत भाव को को दर्शाता है. जिसका हम पैर छूते है इस क्रिया से उसपर तुरंत मनोवैज्ञानिक असर (Psychological effect)  पड़ता है, और उसके ह्रदय से प्रेम, आशीर्वाद और संवेदना, सहानुभूति की भावनाएं निकलती है जो उसकी आभामंडल (Aura) में परिवर्तन लाती है .
पैर छूने से हम उस व्यक्ति के आभामंडल से अपने आभामंडल  में इन ऊर्जाओं को ग्रहण करते है जो की हमारे मनो-मष्तिष्क पर सकारात्मक प्रभाव ( Positive effect ) डालती है और हमारे आभामंडल (Aura) को अधिक ऊर्जावान बनाती है, हमारी नकारात्मक सोच और विचारों से हमें मुक्ति दिलाती है. बड़े लोगों के दिए हुए आशीर्वाद हमारे सौभाग्य में सहायक बनती है.
सही ढंग से अच्छी भावना के साथ पैर छूना चाहिए जिस से की वह व्यक्ति आपके सम्मान और आदर को अनुभव कर सके और उसके मन में आपके प्रति प्रेम और आशीर्वाद की भावनाएं उत्पन्न हो. इसलिए हमें निःसंकोच बड़ो के पैर छूना चाहिए और उनके आशीर्वाद ( Blessings )को ग्रहण करना चाहिए.

बच्चे के पेट मे कीड़े होने पर

*✨✨ बच्चे के पेट में कीड़े होने पर✨✨*

*🅰१ केले की जड़ को सुखा कर चूर्णं बना लें। फिर २ ग्राम चूर्णं को पानी के साथ बच्चे को खिलाएं। ऐसा करने से  बच्चे के पेट में मौजूद कीड़े बाहर निकल जाएंगें।*

*💲२  बच्चे को काले जीरे (स्याह जीरा) का पाउडर शहद में मिलाकर चटाने से पेट के कीड़े मर जाते हैं।*

*♓३ सौंफ का पाउडर कपड़े से छानकर एक बटा १/४ टेबलस्पून शहद के साथ सुबह शाम चटाएं। बच्चे को आराम मिलेगा।*

*♈४ आप बच्चे को अजवायन के तीन – चार दाने के साथ बच्चे को पान खिलाएं। इससे पेट के कीड़े मरने लगते हैं।*
🅰🌿💲🌿♓🌿♈🌿♊🌿♑🌿😄🙏🏼