Monday, May 15, 2017

शरीर पर किसी भी तरह का घाव, बहुत गंभीर चोट, गैंग्रीन (अंग का सड जाना), ओस्टोमएलइटिस (अस्थिमज्जा का प्रदाह), गीला एक्जीमा, मधुमेह का घाव, एक्सीडेन्ट का घाव की चिकित्सा

शरीर पर किसी भी तरह का घाव, बहुत गंभीर चोट, गैंग्रीन (अंग का सड जाना), ओस्टोमएलइटिस (अस्थिमज्जा का प्रदाह), गीला एक्जीमा, मधुमेह का घाव, एक्सीडेन्ट का घाव की चिकित्सा

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🅰कुछ चोट लग जाती है, और कुछ छोटे बहुत गंभीर हो जाती है। जैसे कोई डाईबेटिक पेशेंट है चोट लग गयी तो उसका सारा दुनिया जहां एक ही जगह है, क्योंकि जल्दी ठीक ही नही होता है। और उसके लिए कितना भी चेष्टा करे डाक्टर हर बार उसको सफलता नही मिलता है। और अंत में वो चोट धीरे धीरे गैंग्रीन (अंग का सड जाना) में कन्वर्ट हो जाती है।

💲ऐसी परिस्थिति में एक औषधि है जो गैंग्रीन को भी ठीक करती है और ओस्टोमएलइटिस (अस्थिमज्जा का प्रदाह) को भी ठीक करती है। गैंग्रीन माने अंग का सड जाना, जहाँ पर नए कोशिका विकसित नही होते। ना तो मांसमें और ना ही हड्डी में और सब पुराने कोशिका मरते चले जाते हैं और वो ऐसा सडता है के डाक्टर कहता है की इसको काट के ही निकालना है और कोई दूसरा उपाय नही है।।
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♓ऐसे परिस्तिथि में जहां शरीर का कोई अंग काटना पड जाता हो या पडने की संभावना हो, घाव बहुत हो गया हो उसके लिए आप एक औषधि अपने घर में तैयार कर सकते है।

*♈👉🏼औषधि :*
♊देशी गाय का मूत्र (सूती कपडे के 8 परत कपडो में छान कर), हल्दी और गेंदे का फूल। गेंदे के फूल की पीला या नारंगी पंखुरियाँ निकालना है,फिर उसमे हल्दी डालकर गाय का मूत्र डालकर उसकी चटनी बनानी है। अब चोट कितना बडा है उसकी साइज के हिसाब से गेंदे के फूल की संख्या तय होगी, माने चोट छोटा है तो एक फूल, बडा है तो दो,तीन, चार अनुमान से लेना है। इसकी चटनी बनाकर इस चटनी को लगाना है जहाँ पर भी बाहर से खुली हुई चोट है जिससे खून निकल रहा है और ठीक नही हो रहा।
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♑इसको दिन में कम से कम दो बार लगाना है जैसे सुबह लगाकर उसके ऊपर रुई पट्टी बांध दीजिये ताकि उसका असर बाँडी पर रहे और शाम को जब दुबारा लगायेंगे तो पहले वाला धोना पडेगा, इसको गोमूत्र से ही धोना है डेटोल जैसो का प्रयोग मत करिए, गाय के मूत्र को डेटोल की तरह प्रयोग करे। धोने के बाद फिर से चटनी लगा दे। फिर अगले दिन सुबह कर दीजिये।
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🅰यह इतना प्रभावशाली है के आप सोच नही सकते, चमत्कार जैसा लगेगा। इस औषधि को हमेशा ताजा बनाकर लगाना है। किसी का भी घाव किसी भी औषधि से ठीक नही हो रहा है तो ये लगाइए।

💲जो सोराइसिस गिला है जिसमे खून भी निकलता है, पस भी निकलता है उसको यह औषधि पूर्णरूप से ठीक कर देता है।
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♓प्राय: यह एक्सीडेंट के केस में खूब प्रयोग होता है क्योंकि ये लगाते ही खून बंद हो जाता है। आपरेशन का कोई भी घाव के लिए भी यह सबसे अच्छा औषधि है।

♈ गीला एक्जीमा में यह औषधि बहुत काम करता है,

♊जले हुए घाव में भी काम करता है।

Friday, May 12, 2017

पित्ताशय का केंसर

*पित्ताशय का केंसर*

होम्यो की बर्बेरिस वलगेरिस 200 लेकर , 15 बून्द 1 गिलास पानी में डालकर पिए।
इस पानी को आधा आधा दिन में 2 बार ले।
दिन में टोटल 4 बार ये पिये।

राजीव दीक्षित जी द्वारा प्राप्त ज्ञान से।

आज ही yutube पर राजीव दीक्षित सर्च करे।

पवन गौड़।

कुत्ता काटे का इलाज

कुत्ता काटे का इलाज
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नमस्कार दोस्तों अगर किसी को कोई पागल  कुत्ता काट ले तो बहुत समस्या मे घिर जाते है क्या करे dr भी 5 इंजेक्शन लगाते है और एक की कीमत कम से कम 400 के आस पास होती है उसका इलाज अपने पास बिल्कुल फ्री है और सुलभ है
प्रयोग - एक काला झीगुर पकडे और गुड़ मे दवा कर खिला दे पूरे दिन सिवा दूध के कुछ न दे जब वो मूत्र करे तो एक कपड़े पर करे तो पायेगा कि उसे जिस कलर के कुत्ते ने काटा है वैसे ही बाल उस कपड़े पर मिलेंगे ऐसा ही फ़िर तीसरे दिन करे
है न बिल्कुल फ्री की दवा
शाकाहारी लोगों के लिये भी है एक अन्य प्रयोग
कुकरौंधा के पत्ते साफ कर पीस कर गुड़ के साथ तीन दिन दे एक खुराक मे लगभग दो चम्मच दवा ले
आजमाये और लाभ ले ये पोस्ट आगे भेजो जिससे और लोग भी लूट से बचे
वंदेमातरम
जय मातादी
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महिला संजीवनी 
गुरुवेंद्र सिंह शाक्य
जिला -एटा , उत्तर प्रदेश
9466623519
संजीवनी परिवार 
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दाद, खाज, खुजली को जड़ से मिटाएं ।

दाद, खाज, खुजली को जड़ से मिटाएं ।
दाद, खाज, खुजली एक गंभीर चर्म रोग है। यदि समय से इस पर ध्‍यान नहीं दिया गया तो यह त्‍वचा पर अपनी जड़ें जमा लेता है । खासतौर से गुप्‍तांगों के आसपास यह तेज़ी से फैलता है। जब दाद के बाद काले निशान पड़ जाते हैं तो उसे एक्ज़िमा कहते हैं।
✔दाद, खाज, खुजली के कारण
रसायनिक चीज़ों – साबुन, चूना, सोडा, डिटर्जेंट आदि का ज़्यादा प्रयोग, कब्‍ज़, रक्‍त विकार, महिलाओं में मासिक धर्म की गड़बड़ी और किसी दाद, खाज, खुजली वाले व्‍यक्ति के कपड़े पहनने से यह रोग हो सकता है।
✔लक्षण
इस रोग में त्वचा पर छोटे-छोटे लाल दाने निकल आते हैं, इनमें खुजली होती है और खुजलाने के बाद जलन होती है। बाद में ये दाग़ के रूप में फैलने लगते हैं। यदि पूरे शरीर में एक्ज़िमा हो गया है तो बुखार भी आ सकता है।
✔बचाव
 जिन्‍हें दाद, खाज, खुजली हो गई है उन्‍हें सबसे पहले चाहिए कि नहाते वक़्त साबुन, शैंपू आदि का इस्‍तेमाल बंद कर दें। यदि ज़रूरी हो तो नहाने में ग्लिसिरीन सोप का इस्‍तेमाल करें। नहाने के बाद नारियल का तेल लगाएं।
 कपड़े साफ़ करते वक्‍त अच्‍छी तरह धुल लेना चाहिए, उसमें डिटर्जेंट का थोड़ा सा भी अंश नहीं होना चाहिए। पूरी तरह सूख जाने के बाद ही पहनें।
 नमक का सेवन बंद कर दें, यदि ज़रूरी हो तो बहुत कम मात्रा में नमक लें।
पानी में नीम के पत्‍तों को उबाल कर स्‍नान करने से आराम मिलता है और एक्ज़िमा के कीटाणु नष्‍ट हो जाते हैं।
 दाद, खाज, खुजली में खट्टे, चटपटे व मीठी चीज़ों के सेवन से बचें।
✔उपचार
 अनार के पत्‍तों को पीसकर लगाने से दाद ठीक हो जाता है।
 दाद  नींबू का रस लगा दें। दिन में तीन-चार बार ऐसा करने से कुछ ही दिनों दाद चला जाता है।
 केले का गूदा मसलकर उसमें नींबू का रस मिला लें और दाद पर लगा दें, कुछ दिनों के नियमित प्रयोग से दाद समाप्‍त हो जाएगा।
 बथुआ की सब्‍ज़ी खाने व उसे उबालकर उसका रस निचोड़कर पीने से किसी भी प्रकार के चर्म रोग में लाभ मिलता है।
 गाजर को घिस लें और उसमें सेंधा नमक डालकर हल्‍का गरम कर लें, इसे दाद पर नियमित लगाने से दाद जड़ से चला जाता है।
कच्‍चे आलू का रस पीने से दाद ठीक हो जाता है।
सूखे सिंखाड़े को नींबू के रस में घिस कर लगाने से दाद, खाज, खुजली दूर हो जाती है। इसे लगाने पर पहले जलन होगी लेकिन बाद में ठंडा करता है।
 हल्‍दी का लेप लगाने से भी दाद ठीक हो जाता है। इसे दिन में तीन बार और रात को सोते समय एक बार लगाएं।
 नीम के पत्‍तों का रोज़ रस पीने से दाद ठीक हो जाएगा ।
 गुलकंद व दूध पीने से भी लाभ होता है।
 दाद, खाज, खुजली को जड़ से समाप्‍त करने के लिए नीम की पत्‍ती को दही के साथ पीसकर लगाया जाता है। यह बहुत ही कारगर औषधि है।
 गेंदे  के फूल की पत्तियों को पानी में उबालकर प्रभावित जगह पर दिन में तीन-चार बार लगाएं। गेंदे के फूल में एंटी बैक्टीरियल व एंटी वायरल तत्व होते हैं जो चर्म रोग को दूर करने में सहायक होते हैं।

चर्बी कम करने का नुक्शा

*_⚫चर्बी कम करने का नुक्शा_⚫*
*☘हरा धनिया            50 ग्राम*
*नींबू का रस         02 चमच*
*☘जीरा                  1/2 चमच*
*कढ़ी  पत्ता           02  Gms*
*☘सेंधा नमक.     01स्वादानुसार*
*पानी                  02 Glass*
_उपर बताइ गइ सभी चिजो को मिक्स करें आैर लगभग 2 ग्लास पानी मिलाकर मिक्सर मे क्रश करके रस बनाले फिर इसको छानकर सुबह खाली पेट यहं ज्युस एक साथ दो ग्लास पी लीजिए उसको पीने के बाद 30 मिनिट तक कुछ भी नही खानां है_
*शुभ प्रभात मित्रों*

स्वस्थ रहने के साधारण उपाय

Arogya
*स्वस्थ रहने के साधारण उपाय*::--
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1-- 90 प्रतिशत रोग केवल पेट से होते हैं। पेट में कब्ज नहीं रहना चाहिए। अन्यथा रोगों की कभी कमी नहीं रहेगी।
2-- कुल 13 अधारणीय वेग हैं !
3--160 रोग केवल मांसाहार से होते है !
4-- 103 रोग भोजन के बाद जल पीने से होते हैं। भोजन के 1 घंटे बाद ही जल पीना चाहिये।
5-- 80 रोग चाय पीने से होते हैं।
6-- 48 रोग ऐलुमिनियम के बर्तन या कुकर के खाने से होते हैं।
7-- शराब, कोल्डड्रिंक और चाय के सेवन से हृदय रोग होता है।
8-- अण्डा खाने से हृदयरोग, पथरी और गुर्दे खराब होते हैं।
9-- ठंडे जल (फ्रिज) और आइसक्रीम से बड़ी आंत सिकुड़ जाती है।
10-- मैगी, गुटका, शराब, सूअर का माँस, पिज्जा, बर्गर, बीड़ी, सिगरेट, पेप्सी, कोक से बड़ी आंत सड़ती है।
11-- भोजन के पश्चात् स्नान करने से पाचनशक्ति मन्द हो जाती है और शरीर कमजोर हो जाता है।
12-- बाल रंगने वाले द्रव्यों (हेयरकलर) से आँखों को हानि (अंधापन भी) होती है।
13-- दूध (चाय) के साथ नमक (नमकीन पदार्थ) खाने से चर्म रोग हो जाता है।
14-- शैम्पू, कंडीशनर और विभिन्न प्रकार के तेलों से बाल पकने, झड़ने और दोमुहें होने लगते हैं।
15-- गर्म जल से स्नान से शरीर की प्रतिरोधक शक्ति कम हो जाती है और शरीर कमजोर हो जाता है। गर्म जल सिर पर डालने से आँखें कमजोर हो जाती हैं।
16-- टाई बांधने से आँखों और मस्तिष्क को हानि पहुँचती है।
17-- खड़े होकर जल पीने से घुटनों (जोड़ों) में पीड़ा होती है।
18-- खड़े होकर मूत्र-त्याग करने से रीढ़ की हड्डी को हानि होती है।
19-- भोजन पकाने के बाद उसमें नमक डालने से रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) बढ़ता है।
20-- जोर लगाकर छींकने से कानों को क्षति पहुँचती है।
21-- मुँह से साँस लेने पर आयु कम होती है।
22-- पुस्तक पर अधिक झुकने से फेफड़े खराब हो जाते हैं और क्षय (टीबी) होने का भी डर रहता है।
23-- चैत्र माह में नीम के पत्ते खाने से रक्त शुद्ध हो जाता है, मलेरिया नहीं होता है।
24-- तुलसी के सेवन से मलेरिया नहीं होता है।
25-- मूली प्रतिदिन खाने से व्यक्ति अनेक रोगों से मुक्त रहता है।
26-- अनार आंव, संग्रहणी, पुरानी खांसी व हृदय रोगों के लिए सर्व श्रेष्ठ है।
27-- हृदय-रोगी के लिए अर्जुन की छाल, लौकी का रस, तुलसी, पुदीना, मौसमी, सेंधा नमक, गुड़, चोकर-युक्त आटा, छिलके-युक्त अनाज औषधियां हैं।
28-- भोजन के पश्चात् पान, गुड़ या सौंफ खाने से पाचन अच्छा होता है। अपच नहीं होता है।
29-- अपक्व भोजन (जो आग पर न पकाया गया हो) से शरीर स्वस्थ रहता है और आयु दीर्घ होती है।
30-- मुलहठी चूसने से कफ बाहर आता है और आवाज मधुर होती है।
31-- जल सदैव ताजा (चापाकल, कुएं आदि का) पीना चाहिये, बोतलबंद (फ्रिज) पानी बासी और अनेक रोगों के कारण होते हैं।
32-- नीबू गंदे पानी के रोग (यकृत, टाइफाइड, दस्त, पेट के रोग) तथा हैजा से बचाता है।
33-- चोकर खाने से शरीर की प्रतिरोधक शक्ति बढ़ती है। इसलिए सदैव गेहूं मोटा ही पिसवाना चाहिए।
34-- फल, मीठा और घी या तेल से बने पदार्थ खाकर तुरन्त जल नहीं पीना चाहिए।
35-- भोजन पकने के 48 मिनट के अन्दर खा लेना चाहिए। उसके पश्चात् उसकी पोशकता कम होने लगती है। 12 घण्टे के बाद पशुओं के खाने लायक भी नहीं रहता है।
36-- मिट्टी के बर्तन में भोजन पकाने से पोष्कता 100%, कांसे के बर्तन में 97%, पीतल के बर्तन में 93%, अल्युमिनियम के बर्तन और प्रेशर कुकर में 7-13% ही बचते हैं।
37-- गेहूँ का आटा 15 दिनों पुराना और चना, ज्वार, बाजरा, मक्का का आटा 7 दिनों से अधिक पुराना नहीं प्रयोग करना चाहिए।
38-- 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को मैदा (बिस्कुट, ब्रैड, समोसा आदि) कभी भी नहीं खिलाना चाहिए।
39-- खाने के लिए सेंधा नमक सर्वश्रेष्ठ होता है उसके बाद काला नमक का स्थान आता है। सफेद नमक जहर के समान होता है।
40-- जल जाने पर आलू का रस, हल्दी, शहद, घृतकुमारी में से कुछ भी लगाने पर जलन ठीक हो जाती है और फफोले नहीं पड़ते।
41-- सरसों, तिल, मूंगफली या नारियल का तेल ही खाना चाहिए। देशी घी ही खाना चाहिए है। रिफाइंड तेल और वनस्पति घी (डालडा) जहर होता है।
42-- पैर के अंगूठे के नाखूनों को सरसों तेल से भिगोने से आँखों की खुजली लाली और जलन ठीक हो जाती है।
43-- पान खाने का चूना 70 रोगों को ठीक करता है।
44-- चोट, सूजन, दर्द, घाव, फोड़ा होने पर उस पर 5-20 मिनट तक चुम्बक रखने से जल्दी ठीक होता है। हड्डी टूटने पर चुम्बक का प्रयोग करने से आधे से भी कम समय में ठीक होती है।
45-- मीठे में मिश्री, गुड़, शहद, देशी (कच्ची) चीनी का प्रयोग करना चाहिए सफेद चीनी जहर होता है।
46-- कुत्ता काटने पर हल्दी लगाना चाहिए।
47-- बर्तन सदा मिटटी के ही प्रयोग करने चाहिए।
48-- टूथपेस्ट और ब्रुश के स्थान पर दातुन और मंजन करना चाहिए दाँत मजबूत रहेंगे। (आँखों के रोग में दातुन नहीं करना)
49-- यदि सम्भव हो तो सूर्यास्त के पश्चात् न तो पढ़े और लिखने का काम तो न ही करें तो अच्छा है।
50-- निरोग रहने के लिए अच्छी नींद और अच्छा (ताजा) भोजन अत्यन्त आवश्यक है।
51-- देर रात तक जागने से शरीर की प्रतिरोधक शक्ति कमजोर हो जाती है। भोजन का पाचन भी ठीक से नहीं हो पाता है आँखों के रोग भी होते हैं।
52-- प्रातः का भोजन राजकुमार के समान, दोपहर का राजा और रात्रि का भिखारी के समान करना चाहिये ।
आशा है आप स्वयं अपने परिवार में भी इसे लागू करेंगे।
प्रिय स्वीट फॅमिली मेंबर,
अपनी दिनचर्या को बीमार होने के बाद भी तो सही बनाओगे, बेहतर हैं बीमार नहीं हो, ऐसी दिनचर्या बना ले। निश्चित लाभ मिलेगा। मैं स्वयं भी प्रयासरत हूं आप भी प्रयत्न करना शुरू करे.

पत्तल में भोजन करने के लाभ

*पत्तल में भोजन करने के है अदभुत लाभ |*
आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि हमारे देश मे 2000 से अधिक वनस्पतियों की पत्तियों से तैयार किये जाने वाले पत्तलों और उनसे होने वाले लाभों के विषय मे पारम्परिक चिकित्सकीय ज्ञान उपलब्ध है पर मुश्किल से पाँच प्रकार की वनस्पतियों का प्रयोग हम अपनी दिनचर्या मे करते है।
आम तौर पर केले की पत्तियो मे खाना परोसा जाता है। प्राचीन ग्रंथों मे केले की पत्तियो पर परोसे गये भोजन को स्वास्थ्य के लिये लाभदायक बताया गया है। आजकल महंगे होटलों और रिसोर्ट मे भी केले की पत्तियो का यह प्रयोग होने लगा है।
⏫ पलाश के पत्तल(pattal) में भोजन करने से स्वर्ण के बर्तन में भोजन करने का पुण्य व आरोग्य मिलता है ।
⏫ benefits of eating food on banana leaf केले के पत्तल में भोजन करने से चांदी के बर्तन में भोजन करने का पुण्य व आरोग्य मिलता है ।
⏫ रक्त की अशुद्धता के कारण होने वाली बीमारियों के लिये पलाश से तैयार पत्तल को उपयोगी माना जाता है। पाचन तंत्र सम्बन्धी रोगों के लिये भी इसका उपयोग होता है। आम तौर पर लाल फूलो वाले पलाश को हम जानते हैं पर सफेद फूलों वाला पलाश भी उपलब्ध है। इस दुर्लभ पलाश से तैयार पत्तल को बवासिर (पाइल्स) के रोगियों के लिये उपयोगी माना जाता है।
⏫ जोडो के दर्द के लिये करंज की पत्तियों से तैयार पत्तल (pattal)उपयोगी माना जाता है। पुरानी पत्तियों को नयी पत्तियों की तुलना मे अधिक उपयोगी माना जाता है।
⏫लकवा (पैरालिसिस) होने पर अमलतास की पत्तियों से तैयार पत्तलो को उपयोगी माना जाता है।
इसे भी पढ़ें – जानिए भोजन से जुडी महत्वपूर्ण बातें
✅इसके अन्य लाभ :
1. सबसे पहले तो उसे धोना नहीं पड़ेगा, इसको हम सीधा मिटटी में दबा सकते है l
2. न पानी नष्ट होगा l
3. न ही कामवाली रखनी पड़ेगी, मासिक खर्च भी बचेगा l
4. न केमिकल उपयोग करने पड़ेंगे l
5. न केमिकल द्वारा शरीर को आंतरिक हानि पहुंचेगी l
6. अधिक से अधिक वृक्ष उगाये जायेंगे, जिससे कि अधिक आक्सीजन भी मिलेगी l
7. प्रदूषण भी घटेगा ।
8. सबसे महत्वपूर्ण झूठे पत्तलों को एक जगह गाड़ने पर, खाद का निर्माण किया जा सकता है, एवं मिटटी की उपजाऊ क्षमता को भी बढ़ाया जा सकता है l
9. पत्तल(pattal) बनाए वालों को भी रोजगार प्राप्त होगा l
10. सबसे मुख्य लाभ, आप नदियों को दूषित होने से बहुत बड़े स्तर पर बचा सकते हैं, जैसे कि आप जानते ही हैं कि जो पानी आप बर्तन धोने में उपयोग कर रहे हो, वो केमिकल वाला पानी, पहले नाले में जायेगा, फिर आगे जाकर नदियों में ही छोड़ दिया जायेगा l जो जल प्रदूषण में आपको सहयोगी बनाता है